ट्रंप का दावा: ईरान समझौते को तैयार, बातचीत सही दिशा में; 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमले की चेतावनी भी दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 नवंबर 2026 को दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ परमाणु समझौता करने का इच्छुक है और दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालाँकि, ट्रंप ने साथ ही ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और सैन्य विकल्प को खुला रखने का संकेत भी दिया।
ट्रंप ने क्या कहा
फ्लोरिडा में एक हैलोवीन पार्टी के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'वे समझौता करना चाहते हैं। हम देखेंगे कि वे ऐसा कर पाते हैं या नहीं।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान 'बहुत भरोसेमंद नहीं है' क्योंकि वह पहले समझौता करता है और फिर उससे पीछे हट जाता है। इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत को लेकर किसी 'खास जल्दबाजी' में नहीं है।
परमाणु ठिकाने पर हमले की धमकी
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कथित भूमिगत ठिकाने 'पिकएक्स माउंटेन' को निशाना बनाने की चेतावनी एक बार फिर दोहराई। उनका दावा है कि इस पहाड़ी के नीचे ईरान का परमाणु ठिकाना मौजूद है और अमेरिका चाहे तो वहाँ 'बहुत तेजी से' हमला कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद जारी है।
दोबारा सैन्य हमले के आदेश देने की संभावना पर पूछे गए सवाल को ट्रंप ने 'बेवकूफाना' करार दिया और कहा, 'मान लीजिए कि मैंने ऐसा करने का फैसला किया, तो क्या मैं आपको पहले बता दूंगा? मैं यह नहीं बता सकता।' ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पिछली अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में ईरान की नौसेना, वायुसेना और हथियार निर्माण क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।
कतर की मध्यस्थता और राजनयिक प्रयास
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कतर सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 30 और 31 अक्टूबर को कतर के प्रतिनिधियों ने पहले तेहरान और फिर दोहा में ईरानी अधिकारियों से बातचीत की। इन प्रयासों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का मार्ग प्रशस्त करना और क्षेत्र में फिर से सैन्य टकराव को रोकना है।
रूबियो का रुख: कूटनीति को प्राथमिकता
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी संकेत दिया है कि ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। रूबियो के अनुसार, वाशिंगटन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है, हालाँकि सैन्य विकल्प को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया गया है। गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे नाजुक दौर में चल रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों के अनुसार, कतर की मध्यस्थता में होने वाली अगली बैठकें इस वार्ता की दिशा तय करेंगी। यदि ईरान परमाणु समझौते की शर्तों पर लचीला रुख अपनाता है, तो प्रत्यक्ष अमेरिका-ईरान वार्ता की संभावना बन सकती है। हालाँकि ट्रंप के बयानों से स्पष्ट है कि अमेरिका दबाव बनाए रखते हुए ही किसी भी समझौते की ओर बढ़ेगा।