24 अगस्त 2026
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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा रुख: नियम तोड़ने वाले जहाजों पर जब्ती तक की कार्रवाई संभव

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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा रुख: नियम तोड़ने वाले जहाजों पर जब्ती तक की कार्रवाई संभव

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का शिकंजा और कसा — पीजीएसए ने नियम तोड़ने वाले जहाजों को जब्ती तक की चेतावनी दी, जबकि संसदीय समिति ने जलमार्ग सेवाओं पर शुल्क वसूली के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए नई अनिश्चितता खड़ी करता है।

मुख्य बातें

पीजीएसए ने 24 अगस्त 2026 को घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट में नियम तोड़ने वाले जहाजों पर जुर्माना, हिरासत या जब्ती की कार्रवाई हो सकती है।
व्यापारियों और कंपनियों को जहाज किराए पर लेने से पहले पीजीएसए की 'नियम न मानने वाले जहाजों' की सूची देखने की सलाह दी गई।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन, पर्यावरण, ईंधन, बीमा और सुरक्षा सेवाओं पर शुल्क वसूली के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को 'अमेरिका का क्षेत्र' बताया, लेकिन कोई कानूनी या क्षेत्रीय आधार नहीं दिया।
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान ने इन देशों से जुड़े जहाजों के आवागमन पर पहले ही रोक लगा दी थी।

ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने 24 अगस्त 2026 को घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय ईरानी नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को भविष्य में इस जलमार्ग के उपयोग पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारे पर तेहरान के नियंत्रण को और सख्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पीजीएसए की चेतावनी: क्या हैं संभावित दंड

पीजीएसए ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी एक आधिकारिक पोस्ट में स्पष्ट किया कि नियम उल्लंघन करने वाले जहाजों पर जुर्माना, हिरासत या जब्ती तक की कार्रवाई की जा सकती है। अथॉरिटी ने पर्शियन गल्फ क्षेत्र में व्यापार करने वाले व्यापारियों और कंपनियों को सलाह दी कि वे कोई भी जहाज किराए पर लेने से पहले पीजीएसए की वेबसाइट पर उपलब्ध 'नियम न मानने वाले जहाजों' की सूची अवश्य जाँचें।

यह चेतावनी उन शिपिंग कंपनियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो खाड़ी देशों से कच्चे तेल और अन्य माल का परिवहन करती हैं, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।

संसदीय समिति की मंजूरी: अब शुल्क भी वसूलेगा ईरान

इसी दिन, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन कशकावी ने बताया कि समिति ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा से संबंधित एक मसौदा प्रस्ताव के एक अनुच्छेद को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान इस जलमार्ग में दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क वसूल करेगा।

कशकावी के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क में नौवहन सेवाएँ, पर्यावरण संबंधी सेवाएँ, विशेष परिस्थितियों में ईंधन भरने की सुविधा, बीमा और सुरक्षा सेवाएँ शामिल हैं। यह प्रस्ताव समिति की रविवार की बैठक में पारित किया गया।

ट्रंप का विवादास्पद दावा: 'होर्मुज अमेरिका का क्षेत्र'

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कैरोलिना के मर्टल बीच में एक चुनावी रैली के दौरान होर्मुज स्ट्रेट को 'अमेरिका का क्षेत्र' बताया था। वे वहाँ रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार डार्लीन ग्राहम के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। हालाँकि, ट्रंप ने इस दावे के समर्थन में कोई कानूनी या क्षेत्रीय आधार प्रस्तुत नहीं किया।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ जारी तनाव का उनके घरेलू आर्थिक कार्यक्रम पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा, 'मुझे यह करना पसंद नहीं है, लेकिन हमें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर ध्यान देना होगा और परमाणु हथियारों के मुद्दे को रोकना होगा, क्योंकि वे परमाणु हथियार हासिल कर सकते हैं और हम ऐसा होने नहीं दे सकते।' साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान किसी समझौते के लिए उत्सुक दिखता है।

पृष्ठभूमि: फरवरी से जारी है तनाव

गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और सख्त कर ली थी। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने इन दोनों देशों से जुड़े या उनके सहयोगी जहाजों के इस जलमार्ग से सुरक्षित आवागमन पर रोक लगा दी थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है। अब पीजीएसए की नई चेतावनी और संसदीय समिति के शुल्क प्रस्ताव ने इस तनाव को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है।

आगे क्या होगा

संसदीय समिति द्वारा मंजूर किया गया यह प्रस्ताव अभी पूर्ण संसदीय अनुमोदन की प्रतीक्षा में है। यदि यह कानून बनता है, तो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को ईरान को शुल्क चुकाना होगा — एक ऐसा कदम जो वैश्विक शिपिंग लागत और तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और अमेरिका-ईरान वार्ता की दिशा आने वाले हफ्तों में इस संकट का रुख तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी यह ईरान को अपनी कार्रवाइयों को 'संप्रभुता की रक्षा' के रूप में पेश करने का मौका देता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इस जलमार्ग से गुजरता है — ऐसे में शुल्क वसूली का कानून बना तो शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा, जिसकी मार भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ेगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीजीएसए ने होर्मुज स्ट्रेट पर कौन सी नई चेतावनी जारी की है?
पीजीएसए ने 24 अगस्त 2026 को घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय ईरानी नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर जुर्माना, हिरासत या जब्ती तक की कार्रवाई हो सकती है। साथ ही व्यापारियों को जहाज किराए पर लेने से पहले पीजीएसए की 'नियम न मानने वाले जहाजों' की सूची जाँचने की सलाह दी गई है।
ईरानी संसद का होर्मुज स्ट्रेट पर शुल्क प्रस्ताव क्या है?
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन, पर्यावरण, ईंधन, बीमा और सुरक्षा सेवाओं के लिए शुल्क वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव अभी पूर्ण संसदीय अनुमोदन की प्रतीक्षा में है।
ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को 'अमेरिका का क्षेत्र' क्यों बताया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कैरोलिना के मर्टल बीच में एक चुनावी रैली के दौरान यह दावा किया, हालाँकि उन्होंने इसके लिए कोई कानूनी या क्षेत्रीय आधार नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव कब से बढ़ा है?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने इन देशों से जुड़े या उनके सहयोगी जहाजों के होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन पर रोक लगा दी थी। तब से यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बना हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सख्ती का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है और भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। यदि शुल्क प्रस्ताव कानून बनता है या जहाज जब्ती की कार्रवाइयाँ बढ़ती हैं, तो शिपिंग लागत बढ़ने से भारत में ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ सकता है।
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