8 अक्टूबर 2026
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ईरान की नई सैन्य रणनीति: दुश्मन से पहले करेंगे प्री-एम्प्टिव हमला, मिसाइल रेंज बढ़ाने का फैसला

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ईरान की नई सैन्य रणनीति: दुश्मन से पहले करेंगे प्री-एम्प्टिव हमला, मिसाइल रेंज बढ़ाने का फैसला

सारांश

ईरान ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि वह रक्षात्मक नहीं, अब आक्रामक रणनीति पर चलता है — दुश्मन से पहले हमला करने की नीति। अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद मिसाइल रेंज बढ़ाने का फैसला और एमओयू की समयसीमा बीत जाना — मध्यपूर्व में तनाव के नए अध्याय की शुरुआत है।

मुख्य बातें

ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि ईरान अब प्री-एम्प्टिव यानी पहले से सैन्य हमला करने की नीति अपना चुका है।
जुलाई के अंत में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला इसी नई नीति के तहत किया गया था।
ईरान अपनी मिसाइलों की रेंज, रफ्तार और सटीकता बढ़ाने पर काम कर रहा है; दुश्मन की सेनाएँ तट से एक हजार किलोमीटर दूर तैनात हैं।
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद 8 अप्रैल को सीजफायर और 18 जून को एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
17 अगस्त को एमओयू की समयसीमा समाप्त; अंतिम समझौते पर कोई प्रगति नहीं, तनाव जारी।

ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि ईरान अब आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन की किसी भी कार्रवाई को रोकने के लिए पहले से सैन्य हमला करने की नीति अपना चुका है। अकरमिनिया ने ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही, जो ईरान की रक्षात्मक से आक्रामक सैन्य रणनीति की ओर ऐतिहासिक बदलाव को रेखांकित करती है।

रणनीति में बदलाव: रक्षात्मक से आक्रामक

अकरमिनिया ने स्पष्ट किया कि ईरानी सशस्त्र बलों ने अपनी नीति को पूरी तरह बदल दिया है — अब वे दुश्मन के हमले का इंतजार करने की बजाय पहले कार्रवाई करने को प्राथमिकता देंगे। उनके अनुसार, यह बदलाव अमेरिका और इजरायल के साथ हुए हालिया संघर्ष के दौरान ही व्यवहार में लाया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि प्री-एम्प्टिव यानी पहले से की गई सैन्य कार्रवाई को 'वैध' माना जाता है, बशर्ते इसमें आवश्यकता, तत्काल खतरे और हमले के अनुपात जैसे सिद्धांतों का पालन हो।

हाल के सैन्य अभियान जो नई नीति की बानगी

अकरमिनिया के अनुसार, नई रणनीति के तहत ईरान पहले ही कई अभियान चला चुका है। जुलाई के अंत में जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला इसी नीति का हिस्सा था।

इसके अलावा, इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में उन समूहों के ठिकानों पर भी कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें ईरान 'क्रांति-विरोधी और अलगाववादी' बताता है। अकरमिनिया ने जॉर्डन हमले के बारे में कहा, 'इस हमले से हमने उनसे पहल करने का मौका छीन लिया और वे कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं रहे।'

मिसाइल क्षमता विस्तार: रेंज, रफ्तार और सटीकता

अमेरिकी जमीनी हमले की आशंका पर अकरमिनिया ने कहा कि उनका आकलन है कि अमेरिका जमीनी हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने बताया कि हालिया युद्ध के दौरान ईरान इस नतीजे पर पहुँचा कि उसे अपनी मिसाइलों की रेंज निश्चित रूप से बढ़ानी होगी, क्योंकि दुश्मन ने अपनी सेनाएँ ईरानी तटों से करीब एक हजार किलोमीटर दूर तैनात की हैं।

उन्होंने दावा किया कि ईरान की आने वाली नई मिसाइलें पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक होंगी तथा मिसाइल अपग्रेडेशन का काम जारी रहेगा।

संघर्ष और सीजफायर की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई मिसाइल व ड्रोन हमले किए और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

8 अप्रैल को संघर्ष में शामिल पक्षों के बीच सीजफायर हुआ। इसके बाद 18 जून को ईरान और अमेरिका ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर किसी अंतिम समझौते पर पहुँचना था। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन लगातार बढ़ते तनाव के बीच दोनों पक्ष पर्याप्त प्रगति नहीं कर सके।

आगे क्या होगा

एमओयू की समयसीमा बीत जाने और अंतिम समझौते के अभाव में मध्यपूर्व में तनाव बरकरार है। ईरान की नई प्री-एम्प्टिव नीति और मिसाइल क्षमता विस्तार के ऐलान से क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण नए सिरे से परिभाषित होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान महज चेतावनी नहीं, बल्कि ईरान की संरचनात्मक रणनीतिक दिशा में एक स्थायी बदलाव का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया, और ठीक उसके बाद ईरान ने प्री-एम्प्टिव नीति का सार्वजनिक ऐलान किया। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ती पकड़ और मिसाइल रेंज विस्तार मिलकर एक ऐसे ईरान की तस्वीर बनाते हैं जो अब कूटनीतिक समाधान से ज्यादा सैन्य निरोध पर भरोसा कर रहा है — यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत की खाड़ी नीति दोनों के लिए गंभीर निहितार्थ रखता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान की नई प्री-एम्प्टिव सैन्य नीति क्या है?
ईरान ने घोषणा की है कि वह अब दुश्मन के हमले का इंतजार किए बिना, आवश्यकता और तत्काल खतरे के आधार पर पहले से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह रक्षात्मक से आक्रामक रणनीति की ओर औपचारिक बदलाव है, जिसे अमेरिका-इजरायल के साथ हुए हालिया संघर्ष में व्यवहार में लाया जा चुका है।
ईरान ने जॉर्डन के अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कब हमला किया?
ईरानी सेना के प्रवक्ता के अनुसार, जुलाई के अंत में जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया गया था। यह हमला नई प्री-एम्प्टिव नीति के तहत किया गया पहला बड़ा अभियान बताया जा रहा है।
ईरान-अमेरिका एमओयू क्या था और अब इसकी स्थिति क्या है?
18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुँचना था। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई और दोनों पक्ष बढ़ते तनाव के बीच किसी समझौते पर नहीं पहुँच सके।
ईरान अपनी मिसाइल क्षमता क्यों बढ़ा रहा है?
ईरानी सेना प्रवक्ता के अनुसार, दुश्मन ने अपनी सेनाएँ ईरानी तटों से करीब एक हजार किलोमीटर दूर तैनात की हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए ईरान अपनी मिसाइलों की रेंज, रफ्तार और सटीकता में सुधार पर काम कर रहा है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हालिया संघर्ष कब शुरू हुआ और इसका क्या हश्र हुआ?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कड़ा किया। 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ, लेकिन जून में हस्ताक्षरित एमओयू की समयसीमा बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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