ईरान ने RAF फेयरफोर्ड मामले में ब्रिटेन का आरोप खारिज किया, विदेश मंत्री अराघची ने एक्स पर दिया जवाब
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 1 अक्टूबर 2026 को ब्रिटिश सरकार के उस दावे को सिरे से नकार दिया, जिसमें दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे रॉयल एयर फोर्स (RAF) फेयरफोर्ड के निकट हुई संदिग्ध गतिविधि में ईरान की 'भूमिका' बताई गई थी। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर यह खंडन किया — ठीक एक दिन बाद, जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बीबीसी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ईरानी संलिप्तता के 'पुख्ता संकेत' बताए थे।
मुख्य घटनाक्रम
इस विवाद की शुरुआत उस रविवार से हुई जब ब्रिटिश पुलिस ने ग्लूसेस्टरशायर के ग्रामीण क्षेत्र में RAF फेयरफोर्ड बेस के पास 20 से 29 वर्ष की आयु के पाँच संदिग्धों को हिरासत में लिया। पुलिस को सूचना मिली थी कि तीन वैन बेस की दिशा में बढ़ रही हैं। इन व्यक्तियों पर विस्फोटक एवं आतंकवाद से जुड़े अपराध के संदेह में कार्रवाई की गई।
वैन में मिली सामग्री की जाँच और लंदन में संबंधित पतों की पड़ताल के बाद सोमवार को सभी पाँचों को पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया। यह रिहाई ही बाद में कूटनीतिक तनाव का केंद्र बन गई।
ईरान की प्रतिक्रिया
अराघची ने एक्स पर लिखते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बयान को सीधे उद्धृत किया: 'पीएम बर्नहम का कहना है कि यूके सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि हमारा मानना है कि RAF फेयरफोर्ड की घटना में ईरान की भूमिका थी।' इसके जवाब में अराघची ने कहा, 'मैं ईरान के इस विचार की पुष्टि कर सकता हूँ कि विदेशी देशों के लिए काम करने वाले तथाकथित आतंकवादियों को रिहा करना ही सब कुछ बयां करता है। आप गलत दिशा में प्रयास कर रहे हैं।'
यह टिप्पणी ब्रिटेन के उस निर्णय पर एक तीखा कटाक्ष थी, जिसमें संदिग्धों को हिरासत से मुक्त किया गया — और यह संकेत भी कि तेहरान इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित मानता है।
अमेरिका की कड़ी आलोचना
संदिग्धों की रिहाई पर अमेरिकी प्रशासन ने भी नाराज़गी जताई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि वे ब्रिटेन के इस कदम से 'परेशान' हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में 'नेशनल हिस्पैनिक हेरिटेज मंथ' कार्यक्रम के दौरान इराक, ईरान और वेनेज़ुएला सहित कई विदेश नीति मुद्दों पर बोलते हुए दावा किया कि अमेरिका 'बहुत जल्द ईरान से जीत जाएगा।'
ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान की सैन्य क्षमताएँ कमजोर हो चुकी हैं और वाशिंगटन ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर 'लगभग पूर्ण नियंत्रण' स्थापित कर लिया है — हालाँकि इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
व्यापक संदर्भ और तनाव की पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि RAF फेयरफोर्ड एक अत्यंत संवेदनशील अमेरिकी-ब्रिटिश संयुक्त सैन्य अड्डा है, जिसे परमाणु-सक्षम B-52 बमवर्षक विमानों के ठिकाने के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे बेस के निकट किसी भी संदिग्ध गतिविधि को लंदन और वाशिंगटन, दोनों अत्यंत गंभीरता से लेते हैं।
ब्रिटेन ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने दावे के पक्ष में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया है। प्रधानमंत्री बर्नहम ने स्वयं माना कि जाँच 'जटिल और गहन' है। इस पृष्ठभूमि में अराघची का खंडन और ट्रंप की तीखी टिप्पणियाँ इस मामले को एक बहु-पक्षीय कूटनीतिक विवाद का रूप देती हैं।
आगे क्या
ब्रिटिश पुलिस की जाँच जारी है और पाँचों संदिग्ध फिलहाल जमानत पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लंदन ईरानी संलिप्तता के अपने दावे को किस स्तर के साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाता है, और क्या यह मामला ब्रिटेन-ईरान राजनयिक संबंधों पर नए सिरे से असर डालेगा।