ईरान के संवर्धित यूरेनियम का हटाना: 15 बिंदुओं के संघर्ष-विराम प्रस्ताव की आवश्यक शर्त

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ईरान के संवर्धित यूरेनियम का हटाना: 15 बिंदुओं के संघर्ष-विराम प्रस्ताव की आवश्यक शर्त

सारांश

यरूशलम से महत्वपूर्ण खबर। इजरायल के पूर्व राजदूत जेरेमी इसाचारॉफ ने कहा है कि अमेरिका की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में ईरान से यूरेनियम हटाना एक प्रमुख बिंदु है। क्या यह प्रस्ताव ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित कर पाएगा?

Key Takeaways

  • ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हटाना संघर्ष-विराम प्रस्ताव की एक महत्वपूर्ण शर्त है।
  • अमेरिका ने 15 बिंदुओं का प्रस्ताव ईरान को भेजा है।
  • इजरायल और भारत के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं।
  • कूटनीतिक संपर्क से राजनीतिक समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।
  • संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

यरूशलम, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जर्मनी में इजरायल के पूर्व राजदूत जेरेमी इसाचारॉफ ने कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान को भेजे गए 15-सूत्रीय संघर्ष-विराम प्रस्ताव में, परमाणु प्रसार के संदर्भ में, संवर्धित यूरेनियम को हटाना सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।

एक इंटरव्यू के दौरान इसाचारॉफ ने बताया कि हाल के वर्षों में ईरान ने लगभग 10,000 किलोग्राम यूरेनियम को विभिन्न स्तरों पर संवर्धित किया है, जिसमें से 8,500 किलोग्राम को 3.67 प्रतिशत तक और 1,000 किलोग्राम को 20 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है।

जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका की ओर से ईरान को संघर्ष समाप्त करने के लिए भेजे गए 15 बिंदुओं के प्रस्ताव के बारे में उनका क्या विचार है, तो जेरेमी इसाचारॉफ ने कहा, "हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी परमाणु सामग्री को हटाने, ईरान में मिसाइल भंडार और क्षमताओं को सीमित करने तथा होर्मुज स्ट्रेट पर संयुक्त नियंत्रण रखने की बात की थी। यह सिर्फ 450 किलो या उससे अधिक यूरेनियम को हटाने के बारे में नहीं है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "हाल के वर्षों में ईरान ने लगभग 10,000 किलोग्राम यूरेनियम को विभिन्न स्तरों तक संवर्धित किया है, जिसमें 460 किलोग्राम यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक भी संवर्धित किया गया है। मेरे लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि इन 15 बिंदुओं में से कोई भी किस हद तक संवर्धित यूरेनियम को हटवाने में सफल हो पाता है। इसके साथ ही, यह स्पष्ट होना चाहिए कि आईएईए को ईरान के अंदर मौजूद इन सामग्रियों, स्थानों और सुविधाओं की पूरी तरह से जांच करने की अनुमति प्राप्त हो।"

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए ईरान को 15 बिंदुओं की योजना भेजी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी उन दो अधिकारियों के हवाले से दी गई है जिन्हें इस कूटनीतिक पहल की जानकारी दी गई थी।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे।

इसाचारॉफ ने यह भी बताया कि इजरायल का ईरान और हिज्बुल्लाह के हमलों का सामना करना जारी है और "अभी कुछ भी हो सकता है।"

इजरायल की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से आशा करता हूं कि कूटनीतिक संपर्क जारी रहेंगे। मैंने राष्ट्रपति ट्रंप की हाल ही में की गई टिप्पणियों को ध्यान से सुना। मुझे समझ आता है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही है, और इस चैनल के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान एक राजनीतिक समाधान खोजने में महत्वपूर्ण हो सकता है।"

पूर्व राजदूत ने पश्चिम एशिया के संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता की खबरों पर चर्चा की और कहा कि इजरायल भारत को "एक बहुत करीबी रणनीतिक साझेदार" मानता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इजरायल यात्रा को इस रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा, "हमारा पाकिस्तान के साथ कोई संबंध नहीं है। हमारी सबसे बड़ी मित्रता भारत के साथ है। हम भारत को एक बहुत करीबी रणनीतिक साझेदार मानते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा इस रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण थी।"

इसाचारॉफ ने कहा, "मेरा मानना है कि बहुत करीबी सहयोगियों के साथ परामर्श करना हमेशा आवश्यक है। हमें अपने सहयोगियों, जैसे भारत के साथ वर्तमान स्थिति पर गहन और निरंतर बातचीत करनी चाहिए।"

Point of View

NationPress
27/03/2026

Frequently Asked Questions

ईरान के यूरेनियम संवर्धन का क्या महत्व है?
यूरेनियम का संवर्धन परमाणु ऊर्जा और हथियारों के लिए आवश्यक है, इसीलिए इसका नियंत्रण महत्वपूर्ण है।
संघर्ष-विराम प्रस्ताव में और क्या शामिल है?
इस प्रस्ताव में ईरान की मिसाइल क्षमताओं को सीमित करने और होर्मुज स्ट्रेट पर संयुक्त नियंत्रण की बात शामिल है।
क्या इजरायल और भारत के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं?
हाँ, इजरायल भारत को एक करीबी रणनीतिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव क्या होगा?
यह संघर्ष पश्चिम एशिया में स्थिरता को प्रभावित कर सकता है और विभिन्न देशों के लिए सुरक्षा चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।
कूटनीतिक संपर्क की आवश्यकता क्यों है?
कूटनीतिक संपर्क से सभी पक्षों के बीच संवाद बढ़ता है, जो राजनीतिक समाधान की दिशा में मददगार हो सकता है।
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