अमेरिकी कांग्रेस में ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता, सैनिकों की तैनाती पर बहस जारी
सारांश
Key Takeaways
- सैन्य तैनाती की संभावना पर सीनेटरों में चिंता।
- बढ़ते खतरों और कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता।
- डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच मतभेद।
- मानवता पर प्रभाव की चिंता।
- न्यूक्लियर क्षमता को लेकर अमेरिका के लक्ष्यों में अनिश्चितता।
वाशिंगटन, ३० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान में सैन्य तैनाती की संभावनाओं को लेकर अमेरिकी सीनेटरों में गहरी चिंता है। अमेरिका के उच्च पदस्थ नेताओं ने बढ़ते खतरों, स्पष्ट उद्देश्यों और कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मीडिया में सैन्य कार्रवाई की बढ़ती खबरों के बीच यह बहस और भी तेज हो गई है। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि हजारों अमेरिकी सेवा सदस्य मध्य पूर्व में पहुँच रहे हैं, क्योंकि लड़ाई में एक नया मोर्चा खुल रहा है।
डेमोक्रेटिक सीनेटर एंडी किम ने अधिक सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी और इसे हाल के दिनों में सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक बताया। उन्होंने सीएनएन से कहा, "हम ईरान में जमीन पर अमेरिकी सैनिक नहीं भेज सकते।" इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा कदम एक जोखिम भरा ऑपरेशन होगा।
किम ने मिशन की रणनीतिक स्पष्टता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह "केवल इसे लंबा खींचेगा और ऐसे समय में खतरा बढ़ाएगा जब हमने पहले ही बहुत से सैनिकों को खतरे में देखा है।"
उन्होंने सैन्य संघर्ष की समाप्ति के लिए एक निश्चित रूपरेखा की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "यह एक निरंतर परिवर्तित उद्देश्य है, जो सरकार की युद्ध रणनीति को लेकर सांसदों के बीच बड़ी बेचैनी को दर्शाता है।"
हालांकि, रिपब्लिकन ने सरकार के तरीके का बचाव किया और ट्रंप सरकार के फैसले को ईरान की क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए आवश्यक बताया। हाउस मेजॉरिटी लीडर स्टीव स्कैलिस ने कहा कि न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े खतरों को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
स्कैलिस ने एबीसी न्यूज को बताया, "यही असली खतरा है जो वे अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए पैदा करते हैं, जिसे खत्म करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप काम कर रहे हैं। इस ऑपरेशन को शुरू करने का जो लक्ष्य था, उसपर पहुँच रहे हैं।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने दोनों पार्टियों को शामिल करते हुए क्लासिफाइड ब्रीफिंग के जरिए कांग्रेस से बातचीत की थी।
हालांकि, ट्रंप सरकार के इस फैसले को लेकर केवल डेमोक्रेट्स ही नहीं, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी मतभेद हैं। कांग्रेस सदस्य नैन्सी मेस ने सीएनएन को बताया कि सैनिकों को भेजने का कोई भी फैसला प्रतिनिधियों से ही लेना होगा। उन्होंने कहा, "अगर हम ऐसा करने जा रहे हैं, तो कांग्रेस के पास आएं और सही अधिकारियों से ऐसा करवाएं।"
मेस ने मानवीय नुकसान के बारे में भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "मुझे हमारे सैनिकों और हमारे बेटों-बेटियों पर युद्ध के असर की चिंता है, जिन्हें हम युद्ध में भेज रहे हैं।"
डेमोक्रेटिक कांग्रेसी सुहास सुब्रमण्यम ने भी कांग्रेस की निगरानी की मांग दोहराई। उन्होंने सीएनएन से कहा, "राष्ट्रपति को अब कांग्रेस में आना चाहिए, खासकर जमीनी सेना भेजने के लिए।"
सीनेटरों में यह राजनीतिक मतभेद अमेरिका के लक्ष्यों को लेकर बड़ी अनिश्चितता को दर्शाता है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या फोकस ईरान की न्यूक्लियर क्षमता को खत्म करना है, मिसाइल सिस्टम को लक्ष्य बनाना है या शासन परिवर्तन करना है।