ऑफस्लोडाइक डैम दौरे पर PM मोदी बोले — नीदरलैंड की जल प्रबंधन तकनीक 'पूरी दुनिया के लिए सीखने लायक'

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ऑफस्लोडाइक डैम दौरे पर PM मोदी बोले — नीदरलैंड की जल प्रबंधन तकनीक 'पूरी दुनिया के लिए सीखने लायक'

सारांश

नीदरलैंड के 32 किमी लंबे ऑफस्लोडाइक डैम पर खड़े होकर PM मोदी ने सिर्फ तारीफ नहीं की — बल्कि गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए डच विशेषज्ञता का रास्ता भी खोला। दोनों देशों के जल मंत्रालयों के बीच हस्ताक्षरित आशय पत्र इस साझेदारी को कागज़ से ज़मीन पर उतारने की पहली औपचारिक कोशिश है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब येतन ने नीदरलैंड के ऑफस्लोडाइक डैम का संयुक्त दौरा किया।
32 किलोमीटर लंबा यह बांध बाढ़ नियंत्रण और मीठे पानी के भंडारण का वैश्विक मानक माना जाता है।
मोदी ने एक्स पर लिखा कि नीदरलैंड की जल प्रबंधन तकनीक 'पूरी दुनिया के लिए सीखने लायक' है।
भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढाँचा एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग हेतु आशय पत्र पर हस्ताक्षर।
कल्पसर परियोजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी पर मीठे पानी का जलाशय, ज्वारीय ऊर्जा और परिवहन अवसंरचना का एकीकृत विकास करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मई 2025 को नीदरलैंड के प्रसिद्ध ऑफस्लोडाइक डैम का दौरा किया और इसमें इस्तेमाल की गई जल प्रबंधन तकनीक को 'पूरी दुनिया के लिए सीखने लायक' बताया। डच प्रधानमंत्री रॉब येतन के साथ इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और अंतर्देशीय जलमार्ग विस्तार में आधुनिक तकनीक के संयुक्त उपयोग पर चर्चा की। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को भारत-नीदरलैंड जल रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

ऑफस्लोडाइक डैम: एक वैश्विक मानक

32 किलोमीटर लंबा यह बांध और उस पर निर्मित कॉजवे बाढ़ नियंत्रण और भूमि पुनर्ग्रहण के क्षेत्र में विश्व स्तर पर एक मानक माना जाता है। यह डच तटरेखा को नॉर्थ सी के खतरों से सुरक्षा प्रदान करता है और साथ ही मीठे पानी के भंडारण को भी संभव बनाता है। इस संरचना को इंजीनियरिंग की दृष्टि से 20वीं सदी की सबसे जटिल जल परियोजनाओं में गिना जाता है।

PM मोदी की प्रतिक्रिया और एक्स पर संदेश

दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि जल संसाधनों के क्षेत्र में नीदरलैंड ने अग्रणी कार्य किया है और पूरी दुनिया इनसे सीख सकती है। उन्होंने ऑफस्लोडाइक की प्रमुख विशेषताओं को समझने का उल्लेख किया और डच प्रधानमंत्री को इस अवसर के लिए धन्यवाद दिया। मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आधुनिक तकनीक को सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में अपनाने पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

कल्पसर परियोजना से समानता और आशय पत्र

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में इस दौरे की तुलना गुजरात के गांधीनगर में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना से की। कल्पसर का उद्देश्य खंभात की खाड़ी पर एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाना है, जिसमें ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन अवसंरचना का एकीकृत विकास शामिल है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढाँचा एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए।

भारत-नीदरलैंड जल साझेदारी का विस्तार

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा दोनों देशों की जल प्रबंधन नवाचार, जलवायु अनुकूलन और सतत अवसंरचना के क्षेत्र में साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। दोनों नेताओं ने माना कि डच हाइड्रॉलिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और भारत की बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता मिलकर पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारियों के नए अवसर खोल सकती है। गौरतलब है कि यह भारत-नीदरलैंड जल रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में एक औपचारिक कदम है।

आगे क्या

आशय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। यह दौरा भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारियाँ मज़बूत कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दशकों से योजनाओं की फाइलों में बंद है, अब एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का केंद्र बन रही है। आशय पत्र एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन भारत में ऐसे समझौतों का इतिहास बताता है कि क्रियान्वयन की गति अक्सर घोषणाओं से पीछे रहती है। असली कसौटी यह होगी कि डच विशेषज्ञता कल्पसर की जटिल पर्यावरणीय और वित्तीय चुनौतियों को कितनी तेज़ी से सुलझाने में मदद करती है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑफस्लोडाइक डैम क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ऑफस्लोडाइक नीदरलैंड का 32 किलोमीटर लंबा बांध और कॉजवे है जो डच तटरेखा को नॉर्थ सी से सुरक्षा देता है और मीठे पानी के भंडारण को संभव बनाता है। इसे बाढ़ नियंत्रण और भूमि पुनर्ग्रहण के क्षेत्र में विश्व स्तर पर एक इंजीनियरिंग मानक माना जाता है।
PM मोदी ने नीदरलैंड में ऑफस्लोडाइक डैम का दौरा क्यों किया?
PM मोदी ने डच प्रधानमंत्री रॉब येतन के साथ इस दौरे के दौरान जल प्रबंधन तकनीक को समझा और इसे भारत के लिए 'सीखने लायक' बताया। यह यात्रा भारत-नीदरलैंड जल रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने और कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग की नींव रखने के उद्देश्य से की गई।
कल्पसर परियोजना क्या है और इसका ऑफस्लोडाइक से क्या संबंध है?
कल्पसर परियोजना गुजरात के गांधीनगर में प्रस्तावित एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी पर मीठे पानी का विशाल जलाशय बनाना है, साथ ही ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन अवसंरचना का एकीकृत विकास करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इसकी संरचनात्मक अवधारणा ऑफस्लोडाइक से मिलती-जुलती है।
भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन पर क्या समझौता हुआ?
दोनों देशों ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढाँचा एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए। यह भारत-नीदरलैंड जल रणनीतिक साझेदारी को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम है।
भारत जल प्रबंधन में नीदरलैंड की तकनीक का उपयोग कैसे करेगा?
PM मोदी के अनुसार, भारत आधुनिक डच तकनीक को सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार में अपनाने पर काम कर रहा है। दोनों नेताओं ने माना कि डच हाइड्रॉलिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और भारत की बड़े पैमाने पर परियोजनाएँ लागू करने की क्षमता मिलकर नई साझेदारियों के अवसर खोल सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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