इजराइली सेना ने पत्रकारों से बदसलूकी के मामले में पूरी बटालियन को किया निलंबित
सारांश
Key Takeaways
- बटालियन का निलंबन: पूरी बटालियन को निलंबित किया गया।
- प्रेस की आज़ादी: घटना ने प्रेस की आज़ादी पर सवाल उठाए।
- जांच प्रक्रिया: जांच पूरी होने तक बटालियन को किसी ऑपरेशन में शामिल नहीं किया जाएगा।
- आंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: घटना की निंदा की गई है।
- अनुशासन: सेना ने अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया।
तेल अवीव, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वेस्ट बैंक में पत्रकारों के साथ किए गए बदसलूकी और उन्हें हिरासत में लेने के मामले में इजरायली सेना ने कड़ा कदम उठाया है। आईडीएफ ने सोमवार को पूरी बटालियन को निलंबित कर दिया और रिजर्व बटालियन की ऑपरेशनल गतिविधियों पर भी रोक लगा दी।
यह बटालियन नेत्ज़ाह यूनिट का हिस्सा है। सेना के अनुसार, बटालियन को तुरंत वेस्ट बैंक से हटा कर प्रशिक्षण पर भेजा गया है, और जांच पूरी होने तक यह किसी ऑपरेशन में शामिल नहीं होगी। बटालियन को प्रोफेशनल और एथिकल ट्रेनिंग दी जाएगी, और मामले में शामिल सैनिकों पर अलग से कार्रवाई की जाएगी।
आईडीएफ ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इसकी पुष्टि की। बताया कि चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ इयाल जमीर ने जूडिया और सामरिया के एरिया ए में एक चौकी को खाली कराने के दौरान क्षेत्र की सुरक्षा करते समय पत्रकारों के साथ आईडीएफ सैनिकों के बर्ताव की जांच की।
इयाल जमीर ने स्वीकार किया कि तय नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच में रिपोर्टरों के साथ सैनिकों के बर्ताव में कई कमियां पाई गईं। इसके अलावा, बर्ताव के नियमों में कमियां और आईडीएफ के आदेशों से भटकाव भी पाया गया।
अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा कि आईडीएफ क्षेत्र में प्रेस की आज़ादी का सम्मान करता है और इस घटना पर खेद व्यक्त करता है, इसलिए क्षेत्र में बटालियन की ऑपरेशनल तैनाती को निलंबित किया जा रहा है। इयाल जमीर ने यह भी कहा, “यह एक गंभीर नैतिक घटना है जो आईडीएफ के नियमों और मूल्यों के खिलाफ है। हम आईडीएफ में ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सीएनएन की रिपोर्टिंग टीम के साथ बदसलूकी हुई थी। आरोप है कि 26 मार्च को वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में सैनिकों ने टीम को हिरासत में लिया। इतना ही नहीं, एक फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस के साथ मारपीट की गई, जिससे उसका कैमरा टूट गया। यह टीम कुछ समय पहले ही इजरायली सेटलर्स द्वारा किए गए हमले को रिपोर्ट कर रही थी।
बदसलूकी की अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (एफपीए) ने निंदा की। संगठन ने इस घटना को हिंसक बताते हुए प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला करार दिया।
संगठन ने आरोप लगाया कि सैनिकों ने पत्रकारों और वहां मौजूद लोगों पर बंदूक तान दी, जबकि पत्रकार अपनी पहचान बता चुके थे। इस सबको लेकर बढ़ते दबाव के बीच आईडीएफ ने सोमवार को अपनी सफाई पेश की।