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सार्डिनिया के 15 रेस्तरां में 'बिना स्क्रीन की मेज': बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की अनोखी पहल

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सार्डिनिया के 15 रेस्तरां में 'बिना स्क्रीन की मेज': बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की अनोखी पहल

सारांश

इटली के सार्डिनिया में 15 रेस्तरां ने खाने की मेज से स्मार्टफोन हटाने का अनोखा प्रयोग शुरू किया है। 'बिना स्क्रीन की मेज' नाम की यह एक माह की पहल बच्चों को गेम-किट देकर माता-पिता से जोड़ने की कोशिश है — और एक बड़े सवाल का जवाब तलाशती है: क्या डाइनिंग टेबल डिजिटल लत तोड़ने की शुरुआत हो सकती है?

मुख्य बातें

सार्डिनिया, इटली के 15 रेस्तरां में 'अ तावोला सेंजा श्कर्मी' (बिना स्क्रीन की मेज) पहल शुरू हुई।
यह एक महीने का प्रायोगिक अभियान है, जो शुरू में 8 रेस्तरां से शुरू हुआ और बढ़कर 15 हो गया।
परिवारों को फोन की जगह 'किट डेल रित्रोवो' दी जाएगी — जिसमें उम्र अनुसार खेल और गतिविधियाँ होंगी।
पहल की अगुआई बाल अधिकार संरक्षक अन्ना काउ और एफआईपीई-कॉन्फकॉमर्सियो सार्डिनिया ने मिलकर की।
बाल रोग विशेषज्ञ ओसामा अल जमाल के अनुसार अत्यधिक स्क्रीन उपयोग से नींद की समस्या, सामाजिक अलगाव और आत्म-हानि के जोखिम बढ़ रहे हैं।

इटली के सार्डिनिया द्वीप के 15 रेस्तरां ने खाने की मेज पर स्मार्टफोन की बढ़ती लत से निपटने के लिए एक अभिनव अभियान की शुरुआत की है, जिसका नाम है 'अ तावोला सेंजा श्कर्मी' — यानी 'बिना स्क्रीन के खाने की मेज'। यह एक माह की प्रायोगिक पहल परिवारों को भोजन के दौरान फोन दूर रखकर एक-दूसरे से सीधी बातचीत करने के लिए प्रेरित करती है। बच्चों और किशोरों के बीच डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह प्रयोग खासी चर्चा बटोर रहा है।

पहल की शुरुआत और उद्देश्य

इस अभियान की नींव सार्डिनिया की बाल एवं किशोर अधिकार संरक्षक अन्ना काउ ने एफआईपीई-कॉन्फकॉमर्सियो सार्डिनिया के सहयोग से रखी। एल यूनियन सर्डा के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और किशोरों में डिजिटल उपकरणों की निर्भरता घटाना और परिवारों में आमने-सामने की बातचीत को पुनर्जीवित करना है। यह प्रयोग शुरुआत में 8 रेस्तरां तक सीमित था, लेकिन उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बाद इसे बढ़ाकर 15 प्रतिष्ठान कर दिया गया।

रेस्तरां में क्या होगा अलग

इन रेस्तरां में परिवारों को स्मार्टफोन की जगह एक विशेष 'किट डेल रित्रोवो' — अर्थात 'फिर से जुड़ने की किट' — दी जाएगी। इस किट में बच्चों की उम्र के अनुसार बोर्ड गेम, रंग भरने की सामग्री और अन्य इंटरैक्टिव गतिविधियाँ शामिल होंगी, ताकि खाना परोसे जाने तक का इंतजार बच्चे माता-पिता के साथ बिता सकें। इसके साथ ही अभिभावकों को सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से जुड़े जोखिमों के बारे में जानकारी भी दी जाएगी।

विशेषज्ञों की चिंता

सार्डिनिया में इतालवी बाल रोग विशेषज्ञ महासंघ के अध्यक्ष ओसामा अल जमाल ने कहा कि कई माता-पिता डिजिटल उपकरणों से जुड़े जोखिमों और उनके संभावित लाभों के प्रति पर्याप्त रूप से जागरूक नहीं हैं। उनके अनुसार, चिंता केवल स्क्रीन-टाइम की नहीं, बल्कि बच्चे किस प्रकार की सामग्री देख रहे हैं, इसकी भी है। उन्होंने नींद की समस्याओं, सामाजिक अलगाव और आत्म-हानि जैसे गंभीर दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए अधिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।

रेस्तरां मालिकों की भूमिका

एफआईपीई-कॉन्फकॉमर्सियो सार्डिनिया के अध्यक्ष एमानुएले फ्रोंजिया ने कहा कि रेस्तरां वे स्थान हैं जहाँ लोग मिलते हैं, संवाद करते हैं और साझा पल जीते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे फोन से दूर रहें, तो उन्हें स्वयं भी यही उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। गौरतलब है कि आयोजकों का स्पष्ट मानना है कि डिजिटल आदतों में बदलाव की जिम्मेदारी केवल माता-पिता पर नहीं डाली जा सकती — इसके लिए ऐसे सामूहिक माहौल की जरूरत है जहाँ पूरा परिवार मिलकर बदलाव ला सके।

भागीदार रेस्तरां और विस्तार

यह पहल कैग्लियारी, क्वार्टू सेंट'एलेना, कैपोटेरा, नुओरो, बारी सार्दो, उस्सासाई, ओरिस्तानो, अल्घेरो, ओलबिया और सांता तेरेसा गल्लूरा सहित सार्डिनिया द्वीप के विभिन्न इलाकों में फैले 15 रेस्तरां में लागू होगी। यह ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर की सरकारें और स्वास्थ्य संस्थाएँ बच्चों के स्क्रीन-टाइम को लेकर नीतिगत कदम उठाने पर विचार कर रही हैं। यदि यह एक माह का प्रयोग सफल रहा, तो इसे इटली के अन्य हिस्सों में भी विस्तार दिया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह उस बड़े सवाल को छूता है जिसे नीति-निर्माता अभी तक ठीक से हल नहीं कर पाए हैं — बच्चों के स्क्रीन-टाइम पर नियंत्रण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। 'किट डेल रित्रोवो' का विचार व्यावहारिक है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि एक महीने बाद परिवार घर पर भी इस आदत को बनाए रख पाते हैं या नहीं। यह पहल यह भी रेखांकित करती है कि केवल माता-पिता को उपदेश देने से काम नहीं चलता — बदलाव के लिए माहौल बनाना उतना ही जरूरी है। दुनिया भर में स्कूलों और सरकारों के स्मार्टफोन-बैन से परे, यह रेस्तरां-मॉडल एक रोचक विकल्प है जिस पर नजर रखनी चाहिए।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'अ तावोला सेंजा श्कर्मी' पहल क्या है?
यह इटली के सार्डिनिया द्वीप के 15 रेस्तरां द्वारा शुरू की गई एक एक-माह की प्रायोगिक पहल है, जिसमें परिवारों को भोजन के दौरान स्मार्टफोन दूर रखकर एक-दूसरे से बात करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसका मतलब है 'बिना स्क्रीन के खाने की मेज'।
रेस्तरां बच्चों को फोन की जगह क्या देंगे?
'किट डेल रित्रोवो' यानी 'फिर से जुड़ने की किट' दी जाएगी, जिसमें बच्चों की उम्र के अनुसार बोर्ड गेम, रंग भरने की सामग्री और अन्य इंटरैक्टिव गतिविधियाँ शामिल होंगी। इससे बच्चे खाना आने तक का समय माता-पिता के साथ बिता सकेंगे।
इस पहल में कितने रेस्तरां शामिल हैं और वे कहाँ हैं?
कुल 15 रेस्तरां इस पहल में शामिल हैं, जो कैग्लियारी, क्वार्टू सेंट'एलेना, नुओरो, ओरिस्तानो, अल्घेरो, ओलबिया और सांता तेरेसा गल्लूरा समेत सार्डिनिया के विभिन्न शहरों में फैले हैं। पहल की शुरुआत 8 रेस्तरां से हुई थी, लेकिन अधिक प्रतिष्ठानों की रुचि के बाद यह संख्या 15 हो गई।
बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन उपयोग से क्या नुकसान हो सकते हैं?
सार्डिनिया में इतालवी बाल रोग विशेषज्ञ महासंघ के अध्यक्ष ओसामा अल जमाल के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन उपयोग से नींद की समस्याएँ, सामाजिक अलगाव और आत्म-हानि जैसे गंभीर जोखिम सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चिंता केवल स्क्रीन-टाइम की नहीं, बल्कि बच्चे किस प्रकार की सामग्री देख रहे हैं, उसकी भी है।
इस पहल की जिम्मेदारी किसने ली है?
यह पहल सार्डिनिया की बाल एवं किशोर अधिकार संरक्षक अन्ना काउ ने एफआईपीई-कॉन्फकॉमर्सियो सार्डिनिया के सहयोग से शुरू की है। एफआईपीई-कॉन्फकॉमर्सियो सार्डिनिया के अध्यक्ष एमानुएले फ्रोंजिया ने इसे रेस्तरां की सामाजिक भूमिका से जोड़ते हुए माता-पिता से भी उदाहरण पेश करने का आग्रह किया है।
राष्ट्र प्रेस
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