कूनो नेशनल पार्क में चीते को गोली मारने के मामले में STF गठित, 5 छर्रे बरामद
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते (केएनजी22) को गोली मारे जाने के मामले में राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित की। वन और पुलिस अधिकारियों की इस संयुक्त जाँच टीम का गठन इसलिए किया गया क्योंकि इलाज के दौरान चीते के शरीर से पैलेट गन के 5 छर्रे बरामद हुए और मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। इस घटना ने भारत के महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुई मौत
चीते केएनजी22 को 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 से रेस्क्यू किया गया था। वन विभाग के बयान के अनुसार, प्रारंभिक एक्स-रे जाँच में उसके शरीर में अलग-अलग स्थानों पर कई बाहरी वस्तुएं दिखीं। इसके बाद उसे आगे के उपचार के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के वेटरनरी सर्जरी और रेडियोलॉजी विभाग भेजा गया।
सीटी स्कैन में पता चला कि इन बाहरी वस्तुओं ने चीते के अंदरूनी अंगों, मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम और नर्वस सिस्टम को गहरा नुकसान पहुँचाया था। इमरजेंसी सर्जरी के दौरान उसके शरीर से 5 छर्रे निकाले गए, लेकिन वेटरनरी टीम के अथक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
STF की जाँच और वन विभाग का बयान
प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन समिता राजोरा ने बताया कि STF की जाँच यह स्थापित करेगी कि जानवर को किन परिस्थितियों में गोली मारी गई और क्या इसके लिए कोई व्यक्ति जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, 'इमरजेंसी सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से बंदूक के पाँच छर्रे निकाले गए।' अभी तक संदिग्ध गोलीबारी या किसी आरोपी के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि वन विभाग ने अब तक किसी को भी इस मामले में नामजद नहीं किया है। STF की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
भारत में चीतों की घटती संख्या
केएनजी22 की मौत के साथ भारत में चीतों की कुल जनसंख्या घटकर 58 रह गई है। इनमें से 52 चीते कूनो नेशनल पार्क में, 4 गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में, और 2 वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं। यह मौत ऐसे समय में आई है जब कूनो में पहले भी कई चीतों की मृत्यु हो चुकी है, जिनसे कार्यक्रम की सफलता पर प्रश्नचिह्न उठते रहे हैं।
चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क भारत के चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम का केंद्रीय स्थल है। यह कार्यक्रम सितंबर 2022 में नामीबिया से चीतों को लाने के साथ शुरू हुआ था। बाद में दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए, जहाँ यह प्रजाति 1952 में विलुप्त घोषित हो गई थी। भारत में इस प्रजाति की स्थायी आबादी बसाने का यह प्रयास दुनिया में अपनी तरह का पहला अंतर-महाद्वीपीय चीता पुनर्वास कार्यक्रम है।
केएनजी22 जैसे मामलों में कथित मानवीय हस्तक्षेप और गोलीबारी की घटना इस संवेदनशील संरक्षण परियोजना के समक्ष नई चुनौती बनकर सामने आई है। STF की जाँच के नतीजे न केवल दोषियों का पता लगाएंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि आगे चलकर इस कार्यक्रम की सुरक्षा कैसे और मजबूत की जाए।