कुनो नेशनल पार्क में चीता शावक की संदिग्ध गोलीबारी से मौत, CBI जांच की उठी माँग
सारांश
मुख्य बातें
कुनो नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) में 25 अक्टूबर 2026 की शाम 19 महीने के एक नर चीता शावक को श्योपुर से सटे मोरेना जिले के प्रादेशिक वन प्रभाग में घायल अवस्था में पाया गया। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार शावक के पेट में तीन से चार धातु की गोलियाँ (मेटल पेलेट्स) पाई गईं, जिससे अधिकारियों को आशंका है कि उसे जानबूझकर गोली मारी गई। विशेष उपचार के लिए जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बावजूद शावक की मौत हो गई।
घटनाक्रम: कैसे मिला घायल शावक
एक निगरानी दल ने 25 अक्टूबर की शाम मोरेना जिले के वन क्षेत्र में शावक को गंभीर रूप से घायल पाया। मादा चीता निर्वा के बच्चों में से यह नर शावक संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकल आया था। उसे रात भर में बचाया गया और प्रारंभिक चिकित्सा जाँच के लिए कुनो लाया गया।
प्रारंभिक परीक्षण में पेट के भीतर धातु के छर्रे मिलने के बाद शावक को उन्नत उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया, लेकिन वहाँ उसकी मौत हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का चीता संरक्षण कार्यक्रम पहले से ही कई चीतों की मौत के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहा है।
जाँच की स्थिति
वन विभाग ने वन्यजीव सुरक्षा के लिए गठित स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को इलाके में तैनात किया है। इसके साथ ही राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) से भी जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए सहयोग लिया जा रहा है।
जाँचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि शावक पर पारंपरिक 'भरमार' (मजल-लोडिंग बंदूक) से गोली चलाई गई या देसी 12-बोर बंदूक का इस्तेमाल हुआ। फोरेंसिक और बैलिस्टिक परीक्षण से इस्तेमाल किए गए हथियार की पहचान होने की उम्मीद है।
वन्यजीव कार्यकर्ता की CBI जाँच की माँग
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कुनो के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा, डीएफओ थिरु और एसडीओ अमृतांशु को हटाने की माँग करते हुए वन विभाग को जानवर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल बताया।
दुबे ने कहा, 'मैंने वर्षों से ऐसे खतरों के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने अनदेखी की। कुनो फील्ड डायरेक्टर पर भरोसा नहीं किया जा सकता।' उन्होंने संदिग्ध गोलीबारी और शावक की मौत की तत्काल CBI जाँच की माँग की।
चीता संरक्षण कार्यक्रम पर गहराता संकट
गौरतलब है कि 2022 में नामीबिया और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाया गया था। तब से अब तक कई चीतों की मौत हो चुकी है, जिससे कार्यक्रम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। यह घटना संरक्षित इलाकों की सीमाओं से बाहर निकलने वाले इन दुर्लभ जानवरों की सुरक्षा की चुनौती को और उजागर करती है।
आलोचकों का कहना है कि बफर ज़ोन में पर्याप्त गश्त का अभाव और स्थानीय मानव-वन्यजीव संघर्ष इस तरह की घटनाओं की जड़ है। फोरेंसिक जाँच के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।