कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता आशा के 8 माह के शावक की मौत, भारत में चीतों की संख्या घटकर 59
सारांश
मुख्य बातें
कूनो राष्ट्रीय उद्यान, श्योपुर (मध्य प्रदेश) में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मौत हो गई। सुबह की नियमित निगरानी के दौरान शावक लापता पाया गया, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने तलाश शुरू की और कुछ समय बाद शावक मृत अवस्था में मिला। इस मौत के बाद मध्य प्रदेश में चीतों की कुल संख्या घटकर 59 रह गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
वन विभाग के कर्मचारियों ने निगरानी के दौरान देखा कि आशा अपने पाँच शावकों में से केवल चार के साथ थी। लापता शावक की तुरंत तलाश शुरू की गई और बाद में उसे मृत पाया गया।
प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर ने बताया, 'सुबह की निगरानी के दौरान आशा अपने पाँच में से चार शावकों के साथ दिखाई दी। लापता शावक की तलाश की गई और बाद में वह मृत पाया गया।' अधिकारी के अनुसार शावक की मौत का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका खुलासा हो सकेगा।
कूनो में चीतों की मौजूदा स्थिति
इस मौत के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की संख्या 53 रह गई है, जिनमें 40 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। इनमें से 15 चीते फिलहाल खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, जबकि अन्य बाड़ों में रखे गए हैं या निगरानी में हैं।
कूनो के अलावा चार चीते गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य और दो चीते वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी रखे गए हैं। इस प्रकार मध्य प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 59 है, जिनमें से 41 का जन्म भारत में हुआ है।
प्रोजेक्ट चीता की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत में चीतों को वर्ष 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। करीब सात दशकों बाद सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीते श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाए गए और प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए, ताकि इस प्रजाति को उसके ऐतिहासिक आवास क्षेत्र में फिर से बसाया जा सके।
करीब आठ महीने पहले आशा ने पाँच शावकों को जन्म दिया था, जिसे प्रोजेक्ट के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था। यह जन्म इस बात का संकेत था कि चीते भारतीय परिस्थितियों में प्रजनन करने में सक्षम हो रहे हैं।
पुनर्स्थापना कार्यक्रम की चुनौतियाँ
यह ऐसे समय में आया है जब प्रोजेक्ट चीता के तहत कई शावकों का जन्म तो हुआ है, लेकिन इसके साथ-साथ कुछ वयस्क चीतों और शावकों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है। ताज़ा घटना ने एक बार फिर चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम की चुनौतियों को उजागर किया है।
इस प्रोजेक्ट में अफ्रीकी देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल है। साथ ही चीतों के संरक्षण और प्रजनन के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार, पशु चिकित्सा देखभाल और वैज्ञानिक निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट का दीर्घकालिक उद्देश्य भारत में चीतों की एक आत्मनिर्भर आबादी विकसित करना है।
आगे की राह
शावक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण स्पष्ट होने की उम्मीद है। वन विभाग के अधिकारी मामले की जाँच कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शावकों की मृत्यु दर वन्यजीव पुनर्स्थापना परियोजनाओं में सामान्य होती है, लेकिन हर मौत से प्राप्त डेटा निगरानी और देखभाल प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने में सहायक होता है।