29 अक्टूबर 2026
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कुनो चीता शावक की संदिग्ध मौत: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सीबीआई जांच के लिए जनहित याचिका दायर

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कुनो चीता शावक की संदिग्ध मौत: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सीबीआई जांच के लिए जनहित याचिका दायर

सारांश

कुनो में जन्मा एक 19 माह का चीता शावक पार्क की सीमा से बाहर मुरैना के जंगलों में छर्रों के साथ मृत मिला — और अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सीबीआई जांच की माँग उठी है। यह घटना 2022 के चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम की निगरानी-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 28 अक्टूबर 2026 को जनहित याचिका दायर; कुनो नेशनल पार्क के 19 माह के चीता शावक की मौत की सीबीआई जांच की माँग।
शावक 26-27 अक्टूबर को पार्क की सीमा के बाहर मुरैना प्रादेशिक वन प्रभाग में छर्रों के साथ घायल मिला और बाद में उसकी मौत हो गई।
याचिकाकर्ता अजय दुबे ने ट्रैकिंग, फील्ड निगरानी और अवैध शिकार-विरोधी प्रतिक्रिया में विफलता का आरोप लगाया।
प्रतिवादियों में केंद्र सरकार , मध्य प्रदेश सरकार , NTCA और पर्यावरण मंत्रालय शामिल हैं।
याचिका में 225 बाघ पंजों की जब्ती से जुड़े 27 जून 2025 के अंतरराज्यीय शिकार-गिरोह मामले का भी हवाला।
सुनवाई की तारीख अभी तय होनी बाकी है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 28 अक्टूबर 2026 को एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें कुनो नेशनल पार्क के 19 महीने के चीता शावक की कथित गोली लगने से हुई मौत की सीबीआई जांच की माँग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संरक्षित क्षेत्र की सीमा से बाहर इस जानवर की निगरानी और सुरक्षा-व्यवस्था में गंभीर चूक हुई है।

घटनाक्रम: क्या हुआ और कहाँ

याचिका के अनुसार, कुनो नेशनल पार्क में मादा चीता निर्वा से जन्मा नर शावक 26-27 अक्टूबर की दरम्यानी रात राष्ट्रीय उद्यान की संरक्षित सीमाओं के बाहर मुरैना प्रादेशिक वन प्रभाग में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। शावक के शरीर में बंदूक के छर्रे पाए गए, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब कुनो कार्यक्रम पहले ही कई चीतों की मौत को लेकर सार्वजनिक आलोचना झेल चुका है।

याचिका में क्या माँग की गई है

भोपाल स्थित वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने वकील विनीता आहूजा और आदित्य सांघी के माध्यम से यह याचिका दायर की है। याचिका में छर्रों, पशु-चिकित्सा निष्कर्षों और ट्रैकिंग डेटा की वैज्ञानिक फोरेंसिक जांच की माँग की गई है ताकि मौत की परिस्थितियाँ स्थापित हो सकें और किसी भी चूक के लिए जिम्मेदारी तय हो सके। इसके अलावा याचिका में माँग है कि कुनो के प्रबंधन से असंबद्ध वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञों द्वारा एक स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए तथा आसपास के क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन भी हो।

याचिका में प्रतिवादी के रूप में केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नामित किया गया है।

अजय दुबे का पक्ष

दुबे ने कहा, 'यह कोई अलग-थलग चोट नहीं है। अगर कूनो में पैदा हुआ रेडियो कॉलर वाला चीता मुरैना के जंगलों में गोलियों के छर्रों के साथ पाया जाता है और मर जाता है, तो यह दिखाता है कि पार्क के बाहर हमारी ट्रैकिंग, फील्ड निगरानी और अवैध शिकार-विरोधी प्रतिक्रिया ध्वस्त हो गई है। केवल सीबीआई के नेतृत्व वाली फोरेंसिक जांच ही सच्चाई का पता लगा सकती है।'

उन्होंने यह भी कहा, 'हम अपराध को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित नहीं हैं, लेकिन रोकथाम जांच जितनी ही महत्वपूर्ण है। अदालत को आपातकालीन प्रतिक्रिया और ग्राम स्तर की जागरूकता सहित कूनो से परे चीतों के लिए एक व्यापक सुरक्षा एवं निगरानी योजना का निर्देश देना चाहिए।'

संगठित वन्यजीव अपराध का संदर्भ

याचिका में 27 जून 2025 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) द्वारा जारी उस प्रेस विज्ञप्ति का भी हवाला दिया गया है, जिसमें तीन बाघों के शिकार में कथित रूप से संलिप्त एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ और 225 पंजों की जब्ती का उल्लेख है। आलोचकों का कहना है कि यह संदर्भ यह स्थापित करता है कि कुनो के आसपास का क्षेत्र संगठित वन्यजीव अपराध के लिए संवेदनशील है।

गौरतलब है कि घटना की जांच के लिए राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STF) को पहले ही तैनात किया जा चुका है, लेकिन याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य एजेंसी पर्याप्त नहीं है और मामले की संवेदनशीलता केंद्रीय जांच की माँग करती है।

कुनो चीता कार्यक्रम और आगे की राह

2022 में शुरू हुए चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम के तहत कुनो में चीते लाए गए थे। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(G) तथा वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 50 का आधार लिया गया है। इस याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी बाकी है। यदि न्यायालय इसे स्वीकार करता है, तो यह कुनो प्रबंधन और राष्ट्रीय उद्यान की परिधि में वन्यजीव सुरक्षा तंत्र की व्यापक समीक्षा का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पार्क की सीमा से बाहर एक रेडियो-कॉलर शावक का छर्रों के साथ मिलना यह सवाल उठाता है कि क्या परिधि-क्षेत्र प्रबंधन को उसी गंभीरता से लिया गया जितना पुनर्वास को। राज्य STF की जांच पर्याप्त क्यों नहीं मानी जा रही, यह समझना ज़रूरी है — क्योंकि यदि निगरानी-तंत्र में संस्थागत चूक है, तो उसे केवल एक जांच एजेंसी नहीं, बल्कि ढाँचागत सुधार की ज़रूरत है। इस PIL का असली महत्व किसी एक शावक की मौत से नहीं, बल्कि इस सवाल से है कि क्या भारत का चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम बाड़ के बाहर की दुनिया के लिए तैयार है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुनो नेशनल पार्क के चीता शावक की मौत कैसे हुई?
याचिका के अनुसार, कुनो में मादा चीता निर्वा से जन्मा 19 माह का नर शावक 26-27 अक्टूबर को पार्क की सीमा के बाहर मुरैना प्रादेशिक वन प्रभाग में गंभीर रूप से घायल मिला। उसके शरीर में बंदूक के छर्रे पाए गए, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में क्या माँगा गया है?
याचिका में सीबीआई के नेतृत्व में फोरेंसिक जांच, कुनो प्रबंधन से असंबद्ध वन्यजीव विशेषज्ञों की स्वतंत्र समीक्षा, आसपास के क्षेत्रों का जोखिम मूल्यांकन और चीतों के लिए व्यापक सुरक्षा-निगरानी योजना की माँग की गई है।
यह याचिका किसने और किस आधार पर दायर की है?
भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने वकील विनीता आहूजा और आदित्य सांघी के माध्यम से यह याचिका दायर की है। याचिका का आधार संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(G) तथा वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 50 हैं।
कुनो चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम कब शुरू हुआ था?
यह कार्यक्रम 2022 में शुरू किया गया था, जब दशकों बाद अफ्रीकी चीतों को भारत के कुनो नेशनल पार्क में लाया गया। तब से यह कार्यक्रम कई चीतों की मौत और प्रबंधन-संबंधी सवालों को लेकर आलोचना का सामना कर रहा है।
क्या इस मामले में पहले से कोई जांच चल रही है?
हाँ, घटना की जांच के लिए राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STF) को पहले ही तैनात किया जा चुका है। हालाँकि याचिकाकर्ता का तर्क है कि मामले की संवेदनशीलता और संभावित संगठित अपराध का संदर्भ केंद्रीय सीबीआई जांच की माँग करता है।
राष्ट्र प्रेस
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