कूनो नेशनल पार्क चीते की गोली से मौत: केंद्र ने भेजी NTCA-WCCB की हाई-लेवल जांच टीम
सारांश
मुख्य बातें
कूनो नेशनल पार्क के 19 महीने के नर चीते केएनजी22 — जो चीता 'निर्वा' का शावक था — की बंदूक की गोलियों से हुई मौत को अत्यंत गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को जांच के लिए एक उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम मध्य प्रदेश रवाना की। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट चीता राष्ट्रीय महत्व की पहल है और पुनर्स्थापित चीतों की सुरक्षा में किसी भी चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
घटनाक्रम: कैसे मिला घायल चीता
मध्य प्रदेश वन विभाग के अनुसार, केएनजी22 को 25 अक्टूबर 2026 को कूनो नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र की सीमा से बाहर मुरैना के क्षेत्रीय जंगल में घायल अवस्था में पाया गया। उसे उसी दिन श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन से बचाकर जबलपुर की पशु चिकित्सा सुविधा में स्थानांतरित किया गया, जहाँ आपातकालीन सर्जरी की गई।
सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पाँच गोलियाँ निकाली गईं। मेडिकल जांच में गोलियों से हुई कई गंभीर आंतरिक चोटों की पुष्टि हुई। तमाम चिकित्सीय प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर 2026 को इस शावक की मृत्यु हो गई।
केंद्रीय जांच टीम की संरचना
पर्यावरण मंत्रालय द्वारा भेजी गई उच्चस्तरीय टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और WCCB के क्षेत्रीय उप निदेशक शामिल हैं। इस टीम को तीन प्रमुख जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं — मौत के कारणों की गहन पड़ताल, उपलब्ध सभी साक्ष्यों का विश्लेषण, और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ समन्वय कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना।
टीम सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुपालन और चीतों की निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी। अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें मंत्रालय को सौंपने के बाद राज्य सरकार तथा फील्ड अधिकारियों को आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार ने इस घटना की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) पहले ही गठित कर दी है। केंद्रीय टीम इस STF के साथ मिलकर काम करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब प्रोजेक्ट चीता की सफलता को लेकर पहले से ही विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की नज़रें लगी हुई हैं।
प्रोजेक्ट चीता पर असर और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत में 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों की पुनर्स्थापना के बाद से कूनो नेशनल पार्क में कई चीतों की मौत हो चुकी है। प्रत्येक मौत पर विशेषज्ञ इस कार्यक्रम की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर सवाल उठाते रहे हैं। यह पहली बार है जब किसी चीते की मौत का सीधा संबंध गोली लगने से जोड़ा गया है, जो वन्यजीव सुरक्षा की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।
आलोचकों का कहना है कि चीतों का संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलना और स्थानीय मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना पहले से ज्ञात जोखिम था, जिस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। केंद्रीय टीम की जांच रिपोर्ट यह स्पष्ट कर सकती है कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर पर्यावरण मंत्रालय राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी करेगा। माना जा रहा है कि चीतों के मूवमेंट की निगरानी और उनके संरक्षित क्षेत्र से बाहर जाने पर रोक के उपायों को और मजबूत किया जाएगा। प्रोजेक्ट चीता की विश्वसनीयता अब इस जांच के निष्कर्षों और उन पर होने वाली कार्रवाई पर काफी हद तक निर्भर करेगी।