21 सितंबर 2026
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कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता गौरव की मौत, अब भारत में 55 चीते शेष

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कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता गौरव की मौत, अब भारत में 55 चीते शेष

सारांश

नामीबिया से लाए गए चीता गौरव की कूनो में मौत ने प्रोजेक्ट चीता की स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली पर फिर सवाल खड़े किए हैं। 10 वर्ष से अधिक आयु के गौरव को 12 सितंबर को रेस्क्यू किया गया था, लेकिन लगातार उपचार के बावजूद उसे नहीं बचाया जा सका। भारत में अब 55 चीते शेष हैं।

मुख्य बातें

चीता गौरव की 21 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे कूनो नेशनल पार्क में इलाज के दौरान मौत हुई।
गौरव को 12 सितंबर को कमज़ोरी और डिहाइड्रेशन के चलते जंगल से रेस्क्यू किया गया था; उसकी आयु 10 वर्ष से अधिक थी।
मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सैंपल जांच के बाद होगी।
कूनो में अब 51 चीते शेष हैं, जिनमें 36 भारत-जन्मे हैं और 16 जंगल में स्वतंत्र विचरण कर रहे हैं।
गांधीसागर अभयारण्य के 4 चीतों सहित भारत में कुल 55 चीते मौजूद हैं।

कूनो नेशनल पार्क (श्योपुर, मध्य प्रदेश) में प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से लाए गए चीता गौरव की सोमवार, 21 सितंबर 2026 को शाम करीब 4 बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। 10 वर्ष से अधिक आयु के गौरव को गंभीर कमज़ोरी और डिहाइड्रेशन के बाद 12 सितंबर को जंगल से रेस्क्यू किया गया था। उसकी मृत्यु के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 51 रह गई है।

रेस्क्यू से मृत्यु तक: घटनाक्रम

कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा सोमवार शाम जारी प्रेस नोट के अनुसार, 12 सितंबर को नियमित निगरानी के दौरान गौरव कमज़ोर और सुस्त दिखाई दिया था, जिसके बाद वन्यजीव चिकित्सकों ने उसे तत्काल जंगल से रेस्क्यू किया।

प्रारंभिक जांच में मांसपेशियों की क्षति और गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षण पाए गए। इसके अलावा, किसी अंतर्निहित पुरानी बीमारी की आशंका भी जताई गई थी। बेहतर चिकित्सकीय निगरानी के लिए उसे पालपुर स्थित क्वारंटीन बोमा में रखा गया, जहाँ चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी देखभाल करती रही।

लगातार उपचार और देखभाल के बावजूद गौरव की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और 21 सितंबर की शाम उसने दम तोड़ दिया। पार्क प्रबंधन के अनुसार मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लिए गए सैंपलों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

कूनो में अब चीतों की स्थिति

गौरव की मृत्यु के बाद कूनो नेशनल पार्क में कुल 51 चीते शेष हैं। इनमें से 36 चीते भारत में ही जन्मे हैं, जो प्रोजेक्ट के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है।

पार्क प्रबंधन के अनुसार, इन 51 चीतों में से 16 चीते वर्तमान में जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। गांधीसागर अभयारण्य में मौजूद 4 चीतों को मिलाकर भारत में चीतों की कुल संख्या 55 बताई गई है।

प्रोजेक्ट चीता पर असर

गौरतलब है कि सितंबर 2022 में नामीबिया से पहले 8 चीते लाए गए थे और तब से यह परियोजना भारत में वन्यजीव पुनर्स्थापना का सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास बनी हुई है। गौरव की मौत उन कई मौतों में से एक है जो इस परियोजना के दौरान दर्ज की गई हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब प्रोजेक्ट चीता की निगरानी और स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ लगातार सवाल उठाते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की जलवायु और पारिस्थितिकी में अफ्रीकी चीतों का समायोजन एक दीर्घकालिक और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है।

आगे क्या होगा

कूनो प्रबंधन ने बताया कि गौरव की मौत के कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम और सैंपल जांच की रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्वास्थ्य प्रबंधन में अंतिम निष्कर्ष निकाले जाएंगे।

प्रोजेक्ट चीता की दीर्घकालिक सफलता अब उन 36 भारत-जन्मे चीतों की जंगल में जीवित रहने की क्षमता पर निर्भर करती है, जो आने वाले वर्षों में इस पुनर्स्थापना अभियान की असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि क्या रेस्क्यू-से-उपचार की प्रणाली में वे खामियाँ दूर की गई हैं जो शुरुआती मौतों में उजागर हुई थीं। 36 भारत-जन्मे चीते एक सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन जब तक स्वास्थ्य निगरानी प्रोटोकॉल पारदर्शी रूप से सार्वजनिक नहीं होते, हर मौत के बाद सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठते रहेंगे।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीता गौरव कौन था और उसकी मौत कैसे हुई?
गौरव नामीबिया से भारत लाया गया एक नर चीता था, जिसकी आयु 10 वर्ष से अधिक थी। 12 सितंबर 2026 को कूनो जंगल में कमज़ोर और सुस्त पाए जाने पर उसे रेस्क्यू किया गया, लेकिन लगातार उपचार के बावजूद 21 सितंबर को उसकी मृत्यु हो गई।
गौरव की मौत का असली कारण क्या है?
कूनो प्रबंधन के अनुसार मौत का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लिए गए सैंपलों की जांच के बाद ही अंतिम कारण सामने आ सकेगा। प्रारंभिक जांच में मांसपेशियों की क्षति, गंभीर डिहाइड्रेशन और किसी पुरानी अंतर्निहित बीमारी की आशंका जताई गई थी।
गौरव की मौत के बाद भारत में कितने चीते बचे हैं?
गौरव की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में 51 चीते रह गए हैं। गांधीसागर अभयारण्य के 4 चीतों को मिलाकर भारत में कुल 55 चीते हैं।
प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में कितने चीते जन्मे हैं?
कूनो प्रबंधन के अनुसार, वर्तमान में 51 कूनो चीतों में से 36 चीते भारत में ही जन्मे हैं, जो परियोजना के लिए एक उत्साहजनक संकेत है। इनमें से 16 चीते फिलहाल जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।
क्या प्रोजेक्ट चीता में चीतों की मौत पहले भी हुई है?
हाँ, सितंबर 2022 में नामीबिया से पहले 8 चीते लाने के बाद से परियोजना के दौरान कई चीतों की मौत दर्ज हो चुकी है। गौरव की मृत्यु इसी क्रम में एक और घटनाक्रम है, जो भारत की जलवायु और पारिस्थितिकी में अफ्रीकी चीतों के समायोजन की चुनौती को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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