कुनो चीता मौत मामला: चार वन अधिकारी निलंबित, तीन गिरफ्तार; केएनजी-22 को मारी गई थीं 5 गोलियाँ
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कुनो नेशनल पार्क से बाहर निकले एक चीते की गोली मारकर हत्या के मामले में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए चार वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और जाँच के दौरान तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। मृत चीते की पहचान केएनजी-22 के रूप में हुई है — यह 19 महीने का नर चीता था, जिसकी 27 अक्टूबर 2026 की सुबह जबलपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई।
घटनाक्रम: कैसे हुई चीते की मौत
केएनजी-22 25 अक्टूबर 2026 को मुरैना जिले के एक वन क्षेत्र में घायल अवस्था में मिला था। यह स्थान कुनो नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र की सीमा से बाहर था। निगरानी दल ने उसे बचाकर पहले कुनो के पशु चिकित्सा केंद्र पहुँचाया, जहाँ हालत गंभीर देखते हुए उसे जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय रेफर किया गया।
सीटी स्कैन में चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशी तंत्र और तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति का पता चला। आपातकालीन सर्जरी के दौरान पशु चिकित्सकों ने उसके शरीर से गोली के पाँच छर्रे बरामद किए। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
जाँच और गिरफ्तारी
मामले की जाँच के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अक्टूबर 2026 को वन और पुलिस अधिकारियों की एक चार सदस्यीय विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की। जाँच कर रही राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने मुरैना-श्योपुर क्षेत्र में करीब 20 लोगों से पूछताछ की है और शिकार गतिविधियों में संलिप्तता के संदेह में कई घरों की तलाशी भी ली गई है।
जाँचकर्ताओं को आशंका है कि चीते पर पारंपरिक 'भरमार' बंदूक से फायरिंग की गई थी, हालाँकि संबंधित हथियार अब तक बरामद नहीं हो सका है। तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
केंद्रीय टीम तैनात, वन अधिकारी निलंबित
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अधिकारियों सहित एक तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम को भी मामले की जाँच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए तैनात किया गया है। चार वनकर्मियों का निलंबन कुनो की सीमा से बाहर निकलने वाले चीतों की निगरानी में कथित चूक को लेकर हुआ है।
गौरतलब है कि केएनजी-22 दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता निरवा की संतान था — यानी यह भारत में पैदा हुई दूसरी पीढ़ी के चीतों में से एक था, जो इस मौत को और अधिक गंभीर बनाता है।
चीता पुनर्वास परियोजना पर सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब कुनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना पहले से ही कई चीतों की मौत के कारण आलोचकों के निशाने पर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षित क्षेत्र की सीमाओं से बाहर जाने वाले चीतों के लिए बफर ज़ोन में पर्याप्त सुरक्षा तंत्र का अभाव इस त्रासदी की प्रमुख वजह है।
आलोचकों का कहना है कि निगरानी व्यवस्था में सुधार और स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़े बिना ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा। आने वाले दिनों में SIT और केंद्रीय टीम की रिपोर्ट यह तय करेगी कि हथियार बरामदगी और मुख्य आरोपियों की पहचान में जाँच कितनी आगे बढ़ पाती है।