कूनो चीता शावक केएनजी22 की गोली से मौत: 6 वनकर्मी निलंबित, 8 पर एफआईआर, NTCA जाँच टीम मौके पर
सारांश
मुख्य बातें
कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता निर्वा के 19 माह के नर शावक केएनजी22 की गोली लगने से हुई मौत के मामले में 31 अक्टूबर 2024 तक कार्रवाई का दायरा तेज़ी से बढ़ा है — छह वनकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं, आठ संदिग्धों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हुई है, और केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय जाँच टीम मैदान में उतर चुकी है। मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है, जबकि एसटीएफ ने तीन अन्य संदिग्धों से पूछताछ की है।
घटनाक्रम: कैसे हुई शावक की मौत
25 अक्टूबर को नर चीता केएनजी22 श्योपुर टेरिटोरियल वन मंडल के कंपार्टमेंट नंबर 748 में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। उसे तत्काल रेस्क्यू कर जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ले जाया गया।
सीटी स्कैन में शावक के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति की पुष्टि हुई। आपातकालीन ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पाँच छर्रे निकाले गए। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह शावक की मृत्यु हो गई।
केंद्रीय जाँच टीम और एसटीएफ की तैनाती
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम कूनो भेजी है। इसमें NTCA के वन महानिरीक्षक, WCCB के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं।
इस टीम को घटनास्थल और उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा निगरानी व्यवस्था की पड़ताल की जिम्मेदारी दी गई है। समानांतर रूप से मध्य प्रदेश सरकार ने वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को शामिल कर विशेष जाँच दल (एसटीएफ) का गठन किया है।
निलंबन और गिरफ्तारियाँ
चीते की सुरक्षा एवं निगरानी में लापरवाही को लेकर ग्वालियर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) ने श्योपुर और मुरैना वन मंडल के छह वनकर्मियों को निलंबित किया है। निलंबित कर्मियों में विजयपुर के रेंजर जाहर सिंह गौड़, पहाड़गढ़ के रेंजर आकाश तोमर और डिप्टी रेंजर कीर्ति शांडिल्य सहित अन्य मैदानी कर्मचारी शामिल बताए गए हैं।
मामले में आठ संदिग्धों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हथियार बरामद करने की जानकारी दी है। बरामद हथियारों का चीते को लगे छर्रों से संबंध फॉरेंसिक जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
निगरानी तंत्र पर पार्क निदेशक का स्पष्टीकरण
शनिवार की शाम कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम शर्मा ने प्रेस बयान जारी कर सैटेलाइट कॉलर की तकनीकी सीमाओं की जानकारी दी। उनके अनुसार कूनो में सैटेलाइट कॉलर लगे चीतों की लोकेशन सामान्यतः छह घंटे के अंतराल पर मिलती है, और यदि एक लोकेशन छूट जाए तो दो सफल लोकेशन के बीच 12 घंटे या उससे अधिक का अंतर हो सकता है।
शर्मा ने बताया कि घने जंगल, पेड़ों की छतरी, पहाड़ी क्षेत्र, गुफाएँ और गहरी घाटियाँ सिग्नल को प्रभावित कर सकती हैं। लगभग 15 चीतों की निगरानी के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग के साथ वीएचएफ रेडियो रिसीवर का भी उपयोग किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सैटेलाइट कॉलर की कीमत लगभग ₹4 से 5 लाख है और यह लाइव प्रसारण नहीं, बल्कि निर्धारित अंतराल पर भौगोलिक लोकेशन भेजता है।
वन्यजीव कार्यकर्ता की माँग और विवाद
निदेशक के प्रेस बयान पर वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे 'असफल अफसर का अंग्रेजी में सजावटी वक्तव्य' बताया। दुबे ने आरोप लगाया कि उत्तम शर्मा के कार्यकाल में कूनो में दो स्निफर डॉग की मौत हुई, कूनो लैंडस्केप में दर्जनों तेंदुओं के शिकार के मामले सामने आए और माधव की बाघिन का मामला भी उभरा।
दुबे ने यह भी उठाया कि वर्ष 2021 में जब उत्तम शर्मा पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर थे, तब एक रेडियो कॉलर लगे बाघ के शिकार का मामला सामने आया था। उन्होंने माँग की कि उत्तम शर्मा को पद से तत्काल हटाया जाए, यह कहते हुए कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कूनो के शेष चीते भी खतरे में रह सकते हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना पहले ही कई चीतों की मौत के कारण सवालों के घेरे में है। केएनजी22 की मौत इस परियोजना के लिए एक और गंभीर झटका है, और जाँच के नतीजे भविष्य की संरक्षण रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।