चीन का आरोप: जापान की दक्षिणपंथी शक्ति AI से द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास को बदल रही है
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 9 अक्टूबर 2026 को बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि जापान की दक्षिणपंथी शक्तियाँ नई तकनीक का सहारा लेकर अंतरराष्ट्रीय बिग डेटा मॉडलों में गलत और भ्रामक जानकारी डाल रही हैं। उनके अनुसार, इसका मकसद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैन्यवाद के उल्लंघन अपराधों के इतिहास को मिटाना और जापान के कथित पुनःसैन्यीकरण की राह हमवार करना है।
क्या है चीन का आरोप
माओ निंग ने कहा कि जापान की दक्षिणपंथी ताकतें लगातार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा मॉडलों में द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े गलत ऐतिहासिक विषय प्रदान कर रही हैं। उनके अनुसार, इन मॉडलों की बातचीत में ऐतिहासिक अवधारणाओं के बारे में स्पष्ट रूप से गलत जवाब दिए जा रहे हैं। यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब AI आधारित सूचना प्रणालियों के जरिए ऐतिहासिक विवरणों को प्रभावित करने की आशंकाएं वैश्विक स्तर पर चर्चा में हैं।
इतिहास की लीपापोती का आरोप
प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि नई तकनीक के माध्यम से गलत डेटा फैलाना जापान की दक्षिणपंथी शक्ति द्वारा जापानी सैन्यवाद के उल्लंघन इतिहास की लीपापोती करने का नया तरीका है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों की द्वितीय विश्व युद्ध के प्रति समझ को बदलना है, ताकि जापान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के तांत्रिक नियंत्रण से बाहर निकल सके और कथित पुनःसैन्यीकरण को तेज करने के लिए लोकमत की बाधाएं दूर की जा सकें। गौरतलब है कि चीन और जापान के बीच द्वितीय विश्व युद्ध काल की ऐतिहासिक व्याख्याओं को लेकर दशकों से तनाव बना हुआ है।
चीन की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
माओ निंग ने कहा कि जापानी सैन्यवाद के उल्लंघन अपराधों के पक्के सबूत मौजूद हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणपंथी शक्तियों की यह 'बदनियत' उन देशों की जनता की भावनाओं पर गंभीर चोट है, जो इन उल्लंघनों का शिकार रहे हैं, और यह मानवता की नैतिकता को खुलेआम पैरों तले रौंदने के समान है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सतर्क रहकर इस प्रवृत्ति की रोकथाम करने का आह्वान किया।
जापान-चीन ऐतिहासिक विवाद का संदर्भ
चीन और जापान के बीच द्वितीय विश्व युद्ध काल की ऐतिहासिक व्याख्याओं, विशेषकर नानजिंग नरसंहार और जबरन श्रम जैसे मुद्दों पर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। आलोचकों का कहना है कि जापान की कुछ दक्षिणपंथी ताकतें पाठ्यपुस्तकों और सार्वजनिक विमर्श में इन घटनाओं को कम करके आंकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब AI-जनित सामग्री की विश्वसनीयता और उसके संभावित दुरुपयोग को लेकर वैश्विक बहस तेज हो रही है।
आगे क्या
चीनी विदेश मंत्रालय के इस बयान पर जापान की आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी। विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान चीन-जापान द्विपक्षीय संबंधों में एक नया घर्षण बिंदु उत्पन्न कर सकता है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर AI और ऐतिहासिक सूचना के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।