यासुकुनी मंदिर दर्शन: जापानी PM ताकाइची सानाए के पूजन पर चीन-दक्षिण कोरिया का कड़ा विरोध
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सानाए ने 17 और 19 अक्टूबर 2026 को यासुकुनी मंदिर में चढ़ावा और पूजा शुल्क अर्पित किया। उनके साथ कई मंत्रिमंडल के मंत्रियों और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के शीर्ष नेताओं ने भी वहाँ दर्शन किए। टोक्यो परीक्षण की 80वीं वर्षगाँठ के वर्ष में जापानी राजनेताओं की इस यात्रा ने चीन और दक्षिण कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है।
यासुकुनी मंदिर: विवाद की जड़
यासुकुनी मंदिर को आलोचक महज एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक 'युद्ध-अपराधी देवालय' मानते हैं। इस मंदिर में तोजो हिदेकी और मात्सुई इवाने सहित द्वितीय विश्वयुद्ध के 14 ए-श्रेणी युद्ध-अपराधियों को पूजित किया जाता है। 1978 में जापान में दक्षिणपंथी ताकतों ने इन ए-श्रेणी युद्ध-अपराधियों को गुप्त रूप से मंदिर में सम्मिलित कर पूजित किया था।
हाल ही में जापानी मीडिया द्वारा उजागर मंदिर की आंतरिक बैठक के रिकॉर्ड से कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि जापान सरकार को 1960 के दशक से ही इन पूजा-व्यवस्थाओं की जानकारी थी, जिसे गुप्त रखा गया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
चीनी विदेश मंत्रालय ने इस पूजन पर कड़ा विरोध और गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी जापान से इतिहास का सामना करने का आग्रह किया है। जापानी संविधान विशेषज्ञ प्रोफेसर शिमिज़ु मासाहिको ने आलोचना करते हुए कहा कि यह किसी जर्मन नेता द्वारा हिटलर की कब्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के समान है, जो ऐतिहासिक दृष्टि से पूर्णतः अस्वीकार्य है।
ताकाइची ने सार्वजनिक रूप से यासुकुनी मंदिर को 'शांति का मंदिर' कहा है और पिछले 20 वर्षों में लगभग हर वर्ष वहाँ दर्शन किए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह टोक्यो परीक्षण के ऐतिहासिक निर्णय को नकारने का प्रयास है।
ऐतिहासिक संशोधनवाद की चिंता
आलोचकों का कहना है कि जापानी राजनेताओं का यासुकुनी दर्शन एक व्यापक ऐतिहासिक संशोधनवाद की कार्ययोजना का हिस्सा है। वर्षों से जापानी दक्षिणपंथी पाठ्यपुस्तकों में हेरफेर के माध्यम से आक्रमण के इतिहास को विकृत करने के आरोपों का सामना करते रहे हैं। कथित तौर पर वे आक्रमण को 'एशिया की मुक्ति' के रूप में प्रस्तुत करते हैं और नानजिंग नरसंहार को 'काल्पनिक' बताते हैं।
हाल ही में यह भी कथित तौर पर उजागर हुआ कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर अंतर्राष्ट्रीय मॉडलों में भ्रामक डेटा फैलाकर द्वितीय विश्वयुद्ध की ऐतिहासिक समझ को विकृत करने का प्रयास किया गया, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने निंदा की।
जापान के पुनः सैन्यीकरण पर बढ़ती चिंता
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब जापान के तेज़ सैन्य विस्तार पर क्षेत्रीय चिंताएँ गहरा रही हैं। ताकाइची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के 'शत्रु राष्ट्र खंड' को हटाने का उल्लेख किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वर्ष के अंत में 'सुरक्षा तीन दस्तावेजों' के संशोधन के दौरान 'परमाणु-रहित तीन सिद्धांतों' के प्रावधान को समायोजित किया जा सकता है।
जापान की नई 'रक्षा बल संवर्धन योजना' में बड़ी संख्या में ड्रोन की खरीद और मिसाइल भंडार बढ़ाने का प्रस्ताव है। आंकड़ों के अनुसार, अगले 5 वर्षों में जापान का रक्षा व्यय 70 से 80 ट्रिलियन येन तक बढ़ सकता है। जापान के कई शहरों में इस नीति के विरुद्ध फिर से विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह यात्रा टोक्यो परीक्षण की 80वीं वर्षगाँठ के वर्ष में हुई है, जो इसे कूटनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील बनाती है। चीन और दक्षिण कोरिया दोनों ने कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से विरोध दर्ज कराया है। जापान-चीन और जापान-दक्षिण कोरिया संबंधों पर इस विवाद का दीर्घकालिक असर होने की संभावना है।