17 अगस्त 2026
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यासुकुनी मंदिर दर्शन पर चीन का कड़ा जवाब: जापानी सैन्यवाद का प्रतीक, टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ पर चेतावनी

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यासुकुनी मंदिर दर्शन पर चीन का कड़ा जवाब: जापानी सैन्यवाद का प्रतीक, टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ पर चेतावनी

सारांश

जापानी राजनीतिज्ञों के यासुकुनी मंदिर दर्शन पर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है। टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ के वर्ष में चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता च्यांग पिन ने जापान को चेताया कि 'नई किस्म के सैन्यवाद' की राह पर चलने पर न्याय का सामना करना पड़ेगा।

मुख्य बातें

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता च्यांग पिन ने 15 अगस्त को जापानी राजनीतिज्ञों के यासुकुनी मंदिर दर्शन की कड़ी निंदा की।
च्यांग पिन के अनुसार यासुकुनी मंदिर जापानी सैन्यवाद के वैदेशिक आक्रमण का आध्यात्मिक प्रतीक है, जहाँ युद्ध अपराधियों की पूजा होती है।
वर्तमान वर्ष टोक्यो ट्रायल की शुरुआत की 80वीं वर्षगांठ है — चीन ने इसे विशेष रूप से रेखांकित किया।
चीन ने चेताया कि जापान यदि 'नई किस्म के सैन्यवाद' पर अड़ा रहा तो उसे न्याय की सुनवाई का सामना करना होगा।
जापान से एशियाई पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने के लिए युद्ध अपराधों का आत्म-निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया।

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता च्यांग पिन ने 15 अगस्त 2026 को जापानी राजनीतिज्ञों द्वारा यासुकुनी मंदिर के दर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मंदिर जापानी सैन्यवाद के वैदेशिक आक्रमण का आध्यात्मिक उपकरण और प्रतीक है, जहाँ एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र की जनता के रक्त से सने जापानी युद्ध अपराधियों की पूजा होती है। बीजिंग की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब वर्तमान वर्ष टोक्यो ट्रायल की शुरुआत की 80वीं वर्षगांठ है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रवक्ता च्यांग पिन ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि जापानी राजनीतिज्ञों की इस कार्रवाई ने खुलेआम ऐतिहासिक न्याय का अपमान किया है और पीड़ित देशों की जनता की भावनाओं को गंभीर ठेस पहुँचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम का मर्म आक्रमण की जिम्मेदारी को छिपाकर द्वितीय विश्व युद्ध में फासिस्ट-विरोधी गठबंधन की जीत की उपलब्धियों और युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देना है।

चीन की चेतावनी और ऐतिहासिक संदर्भ

च्यांग पिन ने कहा कि आक्रमण के इतिहास का सामना कर युद्ध अपराधों का गहरा आत्म-निरीक्षण करना ही जापान द्वारा एशियाई पड़ोसी देशों के साथ संबंध विकसित करने का आधार है। उन्होंने टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए जापान से ऐतिहासिक सबक लेकर ऐसी 'गलत कार्रवाइयाँ' बंद करने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि यासुकुनी मंदिर में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोषी ठहराए गए जापानी युद्ध अपराधियों को भी सम्मानित किया जाता है, जिसके कारण यह मंदिर चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों के साथ राजनयिक तनाव का स्थायी केंद्र बना हुआ है।

क्षेत्रीय शांति पर असर की चेतावनी

च्यांग पिन ने यह भी कहा कि यदि जापान 'तथाकथित नई किस्म के सैन्यवाद' को बढ़ावा देता रहा और क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुँचाने का स्रोत बनता रहा, तो उसे 'न्याय की सुनवाई का सामना करना पड़ेगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब जापान अपनी रक्षा नीति में व्यापक बदलाव कर रहा है और रक्षा बजट को सकल घरेलू उत्पाद के 2% तक बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विश्लेषकों के अनुसार, यासुकुनी दर्शन का मुद्दा चीन-जापान और दक्षिण कोरिया-जापान संबंधों में दशकों से संवेदनशील बिंदु रहा है। यह ऐसी Nवीं घटना है जिसमें जापानी नेताओं के मंदिर दर्शन के बाद बीजिंग और सियोल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। आलोचकों का कहना है कि इस मुद्दे पर जापान की घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय कूटनीति के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।

क्या होगा आगे

चीन के इस बयान के बाद जापान-चीन राजनयिक संबंधों पर असर की आशंका जताई जा रही है। यह देखना होगा कि जापान सरकार इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं। टोक्यो ट्रायल की वर्षगांठ के संदर्भ में बीजिंग का यह कदम क्षेत्रीय स्मृति-राजनीति को फिर से केंद्र में लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और बीजिंग की यह प्रतिक्रिया अपने आप में नई नहीं है — लेकिन टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ के वर्ष में इसका समय और तेवर दोनों सुविचारित लगते हैं। ध्यान देने योग्य यह है कि चीन ने 'न्याय की सुनवाई' जैसे असाधारण रूप से तीखे शब्दों का प्रयोग किया, जो सामान्य राजनयिक विरोध से एक कदम आगे है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जापान अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव कर रहा है — और बीजिंग इस आंतरिक बहस को बाहरी दबाव से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि यासुकुनी दर्शन जापान की घरेलू राजनीति में एक सुविचारित संकेत है — और चीन की तीखी प्रतिक्रिया उसी राजनीति को अनजाने में ऊर्जा देती है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यासुकुनी मंदिर विवाद क्या है और चीन इस पर आपत्ति क्यों करता है?
यासुकुनी मंदिर टोक्यो में स्थित एक शिंतो मंदिर है जहाँ द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए जापानी सैनिकों के साथ-साथ युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को भी सम्मानित किया जाता है। चीन और दक्षिण कोरिया इसे जापानी सैन्यवाद का प्रतीक मानते हैं और जापानी नेताओं के दर्शन को ऐतिहासिक पुनरावर्तनवाद के रूप में देखते हैं।
चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता च्यांग पिन ने क्या कहा?
च्यांग पिन ने 15 अगस्त को कहा कि यासुकुनी मंदिर जापानी सैन्यवाद के वैदेशिक आक्रमण का आध्यात्मिक उपकरण है और जापानी राजनीतिज्ञों के दर्शन ने ऐतिहासिक न्याय का अपमान किया है। उन्होंने जापान को चेताया कि यदि वह 'नई किस्म के सैन्यवाद' पर अड़ा रहा तो उसे न्याय की सुनवाई का सामना करना पड़ेगा।
टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ का इस विवाद से क्या संबंध है?
टोक्यो ट्रायल (1946-1948) में जापानी युद्ध नेताओं को द्वितीय विश्व युद्ध के अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। चीन ने इस वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए जापान से ऐतिहासिक सबक लेने और यासुकुनी दर्शन जैसी 'गलत कार्रवाइयाँ' बंद करने का अनुरोध किया।
इस बयान का चीन-जापान संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?
यासुकुनी मंदिर का मुद्दा पहले भी चीन-जापान राजनयिक संबंधों में तनाव का कारण बनता रहा है। चीन के इस कड़े बयान के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद प्रभावित होने की आशंका है, विशेषकर ऐसे समय में जब जापान अपनी रक्षा नीति में बड़े बदलाव कर रहा है।
चीन ने जापान से क्या माँग की है?
चीन ने जापान से आक्रमण के इतिहास का सामना कर युद्ध अपराधों का गहरा आत्म-निरीक्षण करने और यासुकुनी मंदिर दर्शन जैसी कार्रवाइयाँ बंद करने का अनुरोध किया है। चीन का कहना है कि यही एशियाई पड़ोसी देशों के साथ जापान के संबंध सुधरने का आधार है।
राष्ट्र प्रेस
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