यासुकुनी मंदिर दौरा: जापानी PM ताकाइची ने आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ पर युद्ध अपराधियों को श्रद्धांजलि दी
सारांश
मुख्य बातें
जापान के बिना शर्त आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ पर, 15 अगस्त 2026 को, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने यासुकुनी मंदिर में पारंपरिक बलि शुल्क अदा किया — वह मंदिर जहाँ 14 श्रेणी-ए के युद्ध अपराधियों की आत्माओं को विराजमान माना जाता है। इस कदम ने एशिया में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है और चीन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
मुख्य घटनाक्रम
रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी और अन्य मंत्रिमंडल के अधिकारियों ने भी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के वरिष्ठ सदस्यों के साथ यासुकुनी मंदिर का दौरा किया। यह दौरा उस तिथि पर हुआ जब जापान ने 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण किया था — एक ऐसी तारीख जो एशिया के लाखों युद्ध-पीड़ितों के लिए गहरी संवेदनशीलता रखती है।
चीन और पीड़ित देशों की प्रतिक्रिया
चीन ने इस दौरे को ऐतिहासिक न्याय का अपमान और युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के विरुद्ध उकसावा करार दिया है। बीजिंग ने टोक्यो के समक्ष गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। आलोचकों का कहना है कि यह कदम उन एशियाई देशों के लोगों की भावनाओं को गहरी चोट पहुँचाता है जो जापानी साम्राज्यवाद के पीड़ित रहे हैं।
जापान की सैन्य नीति पर सवाल
विश्लेषकों के अनुसार, यासुकुनी दौरे को जापान की व्यापक नीतिगत दिशा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कथित तौर पर जापान सरकार अपने पुनः सैन्यीकरण की प्रक्रिया को तेज कर रही है और परमाणु हथियारों पर सार्वजनिक बहस को बढ़ावा दे रही है। यह ऐसे समय में आया है जब जापान अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव कर रहा है — रक्षा बजट को GDP के 2% तक बढ़ाने की योजना सहित। आलोचकों का कहना है कि इन कदमों ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर निंदा को आमंत्रित किया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जापान में उभरती इस प्रतिगामी प्रवृत्ति के प्रति सतर्क रहना चाहिए। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जापानी नेताओं ने इस संवेदनशील तिथि पर यासुकुनी का दौरा किया हो — यह सिलसिला दशकों से जारी है और हर बार क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाता है।
आगे क्या होगा
चीन और दक्षिण कोरिया सहित अन्य पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टोक्यो इन राजनयिक आपत्तियों का किस प्रकार जवाब देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटनाक्रम पूर्वी एशिया में ऐतिहासिक स्मृति और राजनीतिक पहचान के इर्द-गिर्द बढ़ते तनाव का हिस्सा है।