15 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यासुकुनी विवाद: रक्षा मंत्री कोइजुमी पहुंचे श्राइन, PM ताकाइची ने भेजी भेंट — जापान-चीन तनाव के बीच कूटनीतिक संतुलन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यासुकुनी विवाद: रक्षा मंत्री कोइजुमी पहुंचे श्राइन, PM ताकाइची ने भेजी भेंट — जापान-चीन तनाव के बीच कूटनीतिक संतुलन

सारांश

आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगाँठ पर यासुकुनी फिर सुर्खियों में — PM ताकाइची ने दूरी बनाए रखी, लेकिन रक्षा मंत्री कोइजुमी पहुँचे। यह विभाजित संकेत जापान की उस कूटनीतिक कसरत को उजागर करता है जिसमें वह घरेलू राष्ट्रवाद और एशियाई पड़ोसियों से संबंध — दोनों को एक साथ साधने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

15 अगस्त 2026 को जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगाँठ पर यासुकुनी श्राइन फिर विवाद के केंद्र में।
प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने व्यक्तिगत दौरे से परहेज कर एलडीपी अध्यक्ष के रूप में धार्मिक भेंट भेजी।
रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी 2024 के बाद 15 अगस्त को यासुकुनी जाने वाले पहले मौजूदा रक्षा मंत्री बने।
मंत्री हितोशी किकावादा और एलडीपी महासचिव शुनिची सुजुकी समेत वरिष्ठ नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी।
यासुकुनी में 25 लाख युद्ध मृतकों के साथ-साथ 14 क्लास-ए युद्ध अपराधी भी सम्मानित हैं, जो चीन और दक्षिण कोरिया के लिए आपत्ति का कारण है।

जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगाँठ पर 15 अगस्त 2026 को टोक्यो का विवादित यासुकुनी श्राइन एक बार फिर जापानी राजनीति और कूटनीति के केंद्र में आ गया। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने व्यक्तिगत रूप से श्राइन जाने से परहेज करते हुए वहाँ धार्मिक भेंट भिजवाई, जबकि रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और एक अन्य कैबिनेट मंत्री ने स्वयं उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जापान-चीन संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और जापान-दक्षिण कोरिया संबंधों में सुधार की कोशिशें जारी हैं।

ताकाइची का कूटनीतिक संतुलन

ताकाइची ने यह भेंट प्रधानमंत्री के पद से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की अध्यक्ष के रूप में भेजी। रिपोर्टों के अनुसार, इसकी राशि उन्होंने अपनी निजी धनराशि से दी। अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री पद संभालने से पहले ताकाइची 15 अगस्त को नियमित रूप से यासुकुनी श्राइन जाती रही थीं, परंतु प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत दौरे से दूरी बनाए रखी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सुविचारित कूटनीतिक संयम का हिस्सा है — प्रधानमंत्री के रूप में यासुकुनी जाना चीन और दक्षिण कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया को आमंत्रित कर सकता था, जो जापान के लिए इस समय रणनीतिक रूप से प्रतिकूल होता।

रक्षा मंत्री कोइजुमी का दौरा — एक साल में पहला मौजूदा रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी शनिवार सुबह यासुकुनी श्राइन पहुँचे। वे 2024 के बाद 15 अगस्त को वहाँ जाने वाले पहले मौजूदा रक्षा मंत्री बने हैं। ताकाइची मंत्रिमंडल में उत्तरी क्षेत्र और ओकिनावा मामलों के प्रभारी मंत्री हितोशी किकावादा ने भी श्राइन का दौरा किया।

इसके अतिरिक्त, एलडीपी के वरिष्ठ नेताओं ने सामूहिक रूप से यासुकुनी पहुँचकर श्रद्धांजलि दी। इनमें पार्टी महासचिव शुनिची सुजुकी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

यासुकुनी विवाद की जड़ें

यासुकुनी श्राइन जापान के युद्ध में मारे गए करीब 25 लाख लोगों को समर्पित है। विवाद इसलिए है क्योंकि यहाँ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के दोषी ठहराए गए 14 क्लास-ए युद्ध अपराधियों को भी सम्मानित किया जाता है, जिनमें तत्कालीन प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो भी शामिल थे।

चीन और दक्षिण कोरिया यासुकुनी में जापानी नेताओं की यात्राओं को जापान के सैन्यवादी अतीत को महिमामंडित करने के प्रयास के रूप में देखते हैं। गौरतलब है कि जापान ने 1910 से 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप पर औपनिवेशिक शासन किया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन के बड़े हिस्से पर कब्जा किया था। इसीलिए दोनों देशों में यासुकुनी को जापान के युद्धकालीन अतीत और पर्याप्त ऐतिहासिक प्रायश्चित न करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

क्षेत्रीय कूटनीति पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब जापान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को एक नाजुक मोड़ पर संभाल रहा है। एक ओर चीन के साथ समुद्री और व्यापारिक तनाव बना हुआ है, वहीं दक्षिण कोरिया के साथ ऐतिहासिक मुद्दों पर सुलह की प्रक्रिया अभी भी नाजुक दौर में है। ताकाइची की अनुपस्थिति और कोइजुमी की उपस्थिति — दोनों एक साथ — यह दर्शाते हैं कि एलडीपी घरेलू राष्ट्रवादी भावनाओं और विदेश नीति की ज़रूरतों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।

आगे देखें तो यासुकुनी दौरों पर चीन और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देगी कि क्षेत्रीय कूटनीति किस दिशा में जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एलडीपी की सुविचारित दोहरी रणनीति है। प्रधानमंत्री कूटनीतिक नुकसान से बचती हैं, जबकि कैबिनेट सदस्य घरेलू राष्ट्रवादी आधार को संतुष्ट करते हैं — यह वही पुरानी जापानी राजनीतिक कसरत है। लेकिन इस विभाजित संकेत की सीमाएँ हैं: बीजिंग और सियोल दोनों पूरी तस्वीर देखते हैं, न कि केवल प्रधानमंत्री की कुर्सी। जब तक जापान यासुकुनी के ऐतिहासिक दर्द को संस्थागत रूप से संबोधित नहीं करता, तब तक यह हर 15 अगस्त को एशियाई कूटनीति का सबसे कमज़ोर बिंदु बना रहेगा।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यासुकुनी श्राइन विवाद क्या है?
यासुकुनी श्राइन टोक्यो में स्थित एक स्मारक है जो जापान के लगभग 25 लाख युद्ध मृतकों को समर्पित है। विवाद इसलिए है क्योंकि यहाँ द्वितीय विश्व युद्ध के 14 क्लास-ए युद्ध अपराधियों को भी सम्मानित किया जाता है, जिनमें तत्कालीन प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो शामिल थे। चीन और दक्षिण कोरिया इसे जापान के सैन्यवादी अतीत के महिमामंडन के रूप में देखते हैं।
PM ताकाइची ने यासुकुनी क्यों नहीं गईं?
ताकाइची ने अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से व्यक्तिगत दौरे से दूरी बनाए रखी है। माना जा रहा है कि यह कदम जापान-चीन और जापान-दक्षिण कोरिया संबंधों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि प्रधानमंत्री के रूप में यासुकुनी जाना दोनों देशों की तीखी प्रतिक्रिया को आमंत्रित कर सकता था।
रक्षा मंत्री कोइजुमी का यासुकुनी दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
शिंजिरो कोइजुमी 2024 के बाद 15 अगस्त को यासुकुनी जाने वाले पहले मौजूदा रक्षा मंत्री बने हैं। रक्षा मंत्री जैसे संवेदनशील पद पर बैठे व्यक्ति का यह दौरा चीन और दक्षिण कोरिया में विशेष रूप से नोट किया जाता है और क्षेत्रीय कूटनीति पर असर डाल सकता है।
चीन और दक्षिण कोरिया यासुकुनी पर आपत्ति क्यों जताते हैं?
जापान ने 1910 से 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप पर औपनिवेशिक शासन किया और द्वितीय विश्व युद्ध में चीन के बड़े हिस्से पर कब्जा किया। इसलिए दोनों देश यासुकुनी को जापान के युद्धकालीन अत्याचारों की स्वीकृति न करने और पर्याप्त ऐतिहासिक प्रायश्चित न करने के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
इस बार यासुकुनी दौरे का क्षेत्रीय कूटनीति पर क्या असर होगा?
PM ताकाइची की अनुपस्थिति से चीन और दक्षिण कोरिया की तीखी आधिकारिक प्रतिक्रिया की संभावना कम है, लेकिन रक्षा मंत्री कोइजुमी का दौरा फिर भी आपत्ति का कारण बन सकता है। जापान-दक्षिण कोरिया सुलह प्रक्रिया और जापान-चीन समुद्री तनाव के बीच यह घटनाक्रम क्षेत्रीय संबंधों को और जटिल बना सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 55 मिनट पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले