यासुकुनी दौरे पर उत्तर कोरिया की चेतावनी: 'जापान में तबाही का तूफान लाएगा नया सैन्यवाद'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने 15 अगस्त 2026 को जापान के आत्मसमर्पण दिवस पर यासुकुनी श्राइन में जापानी नेताओं और सांसदों की गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि यह 'नव-सैन्यवादी उन्माद' जापान में 'तबाही का तूफान' लेकर आएगा। प्योंगयांग ने विशेष रूप से जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के श्राइन दौरे को निशाना बनाया है।
मुख्य घटनाक्रम
15 अगस्त को जापान के द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण की वर्षगांठ पर जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने यासुकुनी श्राइन को धार्मिक भेंट भेजी, हालांकि वे स्वयं वहाँ नहीं गईं। वहीं रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने श्राइन का व्यक्तिगत दौरा किया।
इन गतिविधियों के बाद उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) ने एक तीखी टिप्पणी जारी की। इसमें जापानी राजनेताओं पर सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने और 'विदेशों में विस्तार की पुरानी इच्छा' को पूरा करने का आरोप लगाया गया।
उत्तर कोरिया का आरोप
केसीएनए ने कहा कि प्रधानमंत्री ताकाइची की 'अचानक की गई उपासना' से 'देश भर में फिर से हमले का माहौल बनाने की उनकी योजना' और 'विदेशों में विस्तार की अपनी पुरानी इच्छा को पूरा करने' की कोशिशें जाहिर होती हैं।
केसीएनए की टिप्पणी में स्पष्ट शब्दों में कहा गया: 'अपनी हार के मौके पर जापान की तरफ से भड़काया गया नया सैन्यवादी उन्माद इस द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा।' प्योंगयांग पहले भी जापान की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बदलाव को 'नव-सैन्यवाद' बताते हुए आलोचना करता रहा है।
यासुकुनी श्राइन का विवाद
यासुकुनी श्राइन जापान के युद्धों में मारे गए करीब 24.6 लाख लोगों को सम्मान देता है। इनमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 14 वर्ग-ए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। यही कारण है कि दक्षिण कोरिया और चीन सहित जापान के पड़ोसी देश वहाँ जापानी नेताओं के दौरे को जापान के सैन्य अतीत को महिमामंडित करने की कोशिश के रूप में देखते हैं।
गौरतलब है कि यह विवाद दशकों पुराना है और हर वर्ष आत्मसमर्पण दिवस पर इस श्राइन से जुड़ी गतिविधियाँ क्षेत्रीय तनाव का कारण बनती हैं।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया
सोल ने भी इन दौरों पर कड़ी आपत्ति जताई। दक्षिण कोरिया ने जापान से अपने युद्धकालीन इतिहास का सामना करने और अतीत के लिए वास्तविक पश्चाताप प्रदर्शित करने की अपील की।
क्या होगा आगे
जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस पृष्ठभूमि में उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया और चीन की तीखी प्रतिक्रियाएँ पूर्वी एशिया में कूटनीतिक तनाव को और गहरा कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यासुकुनी दौरों को लेकर यह तनाव तब तक बना रहेगा जब तक जापान अपने युद्धकालीन अतीत पर कोई ठोस और स्वीकार्य रुख नहीं अपनाता।