25 जुलाई 2026
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चिंगतचन के हाथ से बने चीनी मिट्टी के बर्तन UNESCO विश्व विरासत सूची में शामिल, चीन का 61वाँ धरोहर स्थल

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चिंगतचन के हाथ से बने चीनी मिट्टी के बर्तन UNESCO विश्व विरासत सूची में शामिल, चीन का 61वाँ धरोहर स्थल

सारांश

चिंगतचन के हाथ से बने पोर्सिलेन को UNESCO की मान्यता मिलना महज एक सूची में नाम जुड़ना नहीं है — यह सिल्क और चाय के बाद प्राचीन चीनी व्यापार के तीसरे बड़े सांस्कृतिक वाहक की वैश्विक स्वीकृति है। 'औद्योगिक विरासत' श्रेणी में चीन की यह पहली प्रविष्टि, विश्व विरासत मानचित्र पर एक लंबे समय से खाली जगह को भरती है।

मुख्य बातें

चिंगतचन के हाथ से बने चीनी मिट्टी के बर्तन 25 जुलाई 2025 को UNESCO विश्व विरासत सूची में शामिल हुए।
दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित 48वें विश्व धरोहर सम्मेलन में विश्व धरोहर समिति ने इसे मंजूरी दी।
यह चीन का 61वाँ UNESCO विश्व विरासत स्थल बन गया है।
' औद्योगिक विरासत ' श्रेणी में चीन की यह पहली वैश्विक धरोहर प्रविष्टि है।
सिल्क और चाय के बाद अब पोर्सिलेन भी विश्व विरासत में शामिल — प्राचीन चीनी व्यापार के तीनों प्रमुख सांस्कृतिक वाहकों का पूर्ण प्रतिनिधित्व हुआ।

चीन के ऐतिहासिक शहर चिंगतचन के हाथ से बने चीनी मिट्टी के बर्तनों को 25 जुलाई 2025 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित 48वें विश्व धरोहर सम्मेलन में UNESCO की विश्व विरासत सूची में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया। विश्व धरोहर समिति की विस्तृत समीक्षा के बाद मिली यह मान्यता चीन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है — इससे चीन के विश्व विरासत स्थलों की कुल संख्या 61 हो गई है।

क्या है चिंगतचन की विरासत

चिंगतचन को 'हजार वर्षीय पोर्सिलेन कैपिटल' के रूप में जाना जाता है। यह शहर सदियों से हाथ से पोर्सिलेन निर्माण की परंपरा का केंद्र रहा है और इसकी कारीगरी को विश्व स्तर पर अद्वितीय माना जाता है। इस मान्यता के साथ चिंगतचन को दुनिया का सर्वोच्च सांस्कृतिक प्रमाणपत्र हासिल हुआ है।

औद्योगिक विरासत श्रेणी में पहली चीनी प्रविष्टि

यह नामांकन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि 'औद्योगिक विरासत' श्रेणी में चीन की यह पहली वैश्विक धरोहर प्रविष्टि है। इससे पहले पोर्सिलेन-थीम वाली कोई भी धरोहर विश्व विरासत सूची में नहीं थी — चिंगतचन के शामिल होने से यह कमी दूर हुई है।

प्राचीन व्यापार के तीन सांस्कृतिक वाहक

गौरतलब है कि सिल्क और चाय पहले से ही विश्व विरासत सूची में प्राचीन चीनी व्यापार के प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। चिंगतचन के पोर्सिलेन के शामिल होने के बाद, प्राचीन चीन के विदेशी व्यापार के तीनों प्रमुख सांस्कृतिक वाहकों — सिल्क, चाय और पोर्सिलेन — का अब विश्व विरासत के क्षेत्र में पूर्ण प्रतिनिधित्व हो गया है।

अंतर्राष्ट्रीय महत्व

यह उपलब्धि न केवल चिंगतचन की गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों की अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति है, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में भी एक मील का पत्थर है। यह सम्मेलन बुसान में आयोजित हुआ, जो स्वयं एशिया में सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। आने वाले समय में यह दर्जा चिंगतचन में सांस्कृतिक पर्यटन और पारंपरिक शिल्प संरक्षण को नई गति दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल पर्यटन-केंद्रित ब्रांडिंग तक सीमित रह जाता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिंगतचन के चीनी मिट्टी के बर्तन UNESCO विश्व विरासत सूची में कब शामिल हुए?
25 जुलाई 2025 को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित 48वें विश्व धरोहर सम्मेलन में UNESCO की विश्व धरोहर समिति ने चिंगतचन के हाथ से बने पोर्सिलेन को विश्व विरासत सूची में शामिल करने की मंजूरी दी।
चिंगतचन को 'हजार वर्षीय पोर्सिलेन कैपिटल' क्यों कहा जाता है?
चिंगतचन सदियों से हाथ से पोर्सिलेन निर्माण की अद्वितीय परंपरा का केंद्र रहा है और इसकी कारीगरी को विश्व स्तर पर बेजोड़ माना जाता है। इसी दीर्घकालिक शिल्प परंपरा के कारण इसे 'हजार वर्षीय पोर्सिलेन कैपिटल' की उपाधि मिली है।
यह चीन का कौन-सा UNESCO विश्व विरासत स्थल है?
चिंगतचन के पोर्सिलेन के शामिल होने के बाद चीन के UNESCO विश्व विरासत स्थलों की कुल संख्या 61 हो गई है। यह 'औद्योगिक विरासत' श्रेणी में चीन की पहली वैश्विक धरोहर प्रविष्टि भी है।
सिल्क, चाय और पोर्सिलेन का विश्व विरासत से क्या संबंध है?
प्राचीन चीन के विदेशी व्यापार के तीन सबसे बड़े सांस्कृतिक वाहक — सिल्क, चाय और पोर्सिलेन — माने जाते हैं। सिल्क और चाय पहले से ही विश्व विरासत सूची में स्थान पा चुके थे; चिंगतचन के पोर्सिलेन के शामिल होने से अब तीनों का पूर्ण प्रतिनिधित्व हो गया है।
इस UNESCO दर्जे का चिंगतचन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह दर्जा चिंगतचन में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है और पारंपरिक पोर्सिलेन शिल्प के संरक्षण को अंतर्राष्ट्रीय समर्थन मिल सकता है। यह मान्यता स्थानीय कारीगरों की कला को वैश्विक पहचान दिलाने में भी सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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