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यूएनजीए फर्स्ट कमेटी में सांसद कमलजीत सहरावत ने रखा भारत का पक्ष, सैन्य जरूरत और मानवीय संतुलन पर दिया जोर

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यूएनजीए फर्स्ट कमेटी में सांसद कमलजीत सहरावत ने रखा भारत का पक्ष, सैन्य जरूरत और मानवीय संतुलन पर दिया जोर

सारांश

यूएनजीए की फर्स्ट कमेटी में सांसद कमलजीत सहरावत ने भारत की बहुआयामी स्थिति स्पष्ट की — सीसीडब्ल्यू के पाँच प्रोटोकॉल, सैन्य एआई के लिए घरेलू ढाँचा, 15,000 कृत्रिम अंग शिविर और 18 देशों की SALW फेलोशिप। यह भारत की जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की छवि को मज़बूत करता है।

मुख्य बातें

सांसद कमलजीत सहरावत ने 21 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूएनजीए फर्स्ट कमेटी में भारत का पक्ष प्रस्तुत किया।
भारत ने सीसीडब्ल्यू के सभी पाँच प्रोटोकॉल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई; सैन्य आवश्यकता और मानवीय जरूरत में संतुलन पर बल दिया।
'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' पहल के तहत कई देशों में 15,000 से अधिक कृत्रिम अंग शिविर आयोजित किए गए।
भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के लिए पाँच सिद्धांतों पर आधारित घरेलू ढाँचा तैयार किया है।
भारत ने इस वर्ष एशिया-प्रशांत में पहली एसएएलडब्ल्यू संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप की मेजबानी की, जिसमें 18 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की फर्स्ट कमेटी में 21 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की लोकसभा सदस्य कमलजीत सहरावत ने न्यूयॉर्क में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पारंपरिक हथियारों पर भारत का आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सैन्य आवश्यकता और मानवीय अनिवार्यता के बीच संतुलन को अपनी नीति की मूल धुरी मानता है।

सीसीडब्ल्यू प्रोटोकॉल पर भारत की प्रतिबद्धता

सांसद कमलजीत सहरावत ने कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपन्स (सीसीडब्ल्यू) के सभी पाँच प्रोटोकॉल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, 'सीसीडब्ल्यू के सभी पाँच प्रोटोकॉल के पक्षकार के रूप में भारत का मानना है कि इसकी स्थायी शक्ति संतुलन में निहित है, जो सैन्य आवश्यकता और मानवीय अनिवार्यता के बीच तालमेल स्थापित करती है और एक ही ढाँचे के भीतर विविध सुरक्षा हितों वाले राज्यों को एक साथ लाती है।'

संशोधित प्रोटोकॉल-II के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह प्रोटोकॉल भूमि माइनों से उत्पन्न मानवीय चिंताओं को लंबी सीमाओं वाले देशों की वैध रक्षा जरूरतों के साथ संतुलित करता है। भारत ने इस प्रोटोकॉल के तहत अपने दायित्वों का पालन किया है, जिसमें गैर-पहचान योग्य माइनों का उत्पादन न करना और सभी एंटी-पर्सनल माइनों को पहचान योग्य बनाना शामिल है।

आईईडी खतरों और पीड़ित सहायता पर भारत का रुख

सांसद सहरावत ने कहा कि प्रोटोकॉल-V के एक अंतरराष्ट्रीय हस्ताक्षरकर्ता के रूप में भारत युद्ध से उत्पन्न विस्फोटक अवशेषों के कारण होने वाले मानवीय नुकसान के प्रति गहराई से संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि आतंकवादी और अवैध सशस्त्र समूहों द्वारा तैनात किए जाने वाले आईईडी (इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से निपटने के लिए यह प्रोटोकॉल एक ठोस ढाँचा प्रदान करता है।

पीड़ित सहायता के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' पहल के अंतर्गत हाल के वर्षों में कई देशों में 15,000 से अधिक कृत्रिम अंग शिविर आयोजित किए गए हैं। यह भारत की मानवीय कूटनीति का एक ठोस उदाहरण है।

रक्षा क्षेत्र में एआई और भरोसेमंद तकनीक का ढाँचा

घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों और सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख करते हुए सांसद सहरावत ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के पहले अनौपचारिक विचार-विमर्श में रचनात्मक रूप से भाग लिया और उसका सह-प्रायोजन भी किया। भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के मूल्यांकन हेतु एक घरेलू ढाँचा विकसित किया है, जो विश्वसनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और निष्पक्षता — इन पाँच सिद्धांतों पर आधारित है।

अवैध हथियार व्यापार और एसएएलडब्ल्यू नियंत्रण

सांसद सहरावत ने बताया कि भारत छोटे हथियारों और हल्के हथियारों (SALW) पर संयुक्त राष्ट्र कार्ययोजना और अंतरराष्ट्रीय ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट्स का पूरी तरह समर्थन करता है। अवैध हथियार व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ भारत काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति और निरस्त्रीकरण के एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय केंद्र के साथ सक्रिय रूप से कार्य करता है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एसएएलडब्ल्यू नियंत्रण के लिए पहली बार संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप की मेजबानी की, जिसमें 18 देशों के प्रतिनिधियों को क्षमता निर्माण के लिए एक साथ लाया गया। यह आयोजन क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

आगे की राह

भारत ने पारंपरिक हथियारों और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए इनके उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया। यूएनजीए की यह भागीदारी भारत की बहुपक्षीय कूटनीति में बढ़ती सक्रियता और वैश्विक निरस्त्रीकरण चर्चाओं में एक ज़िम्मेदार आवाज के रूप में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वह एक तरफ लंबी सीमाओं की सुरक्षा जरूरतें रखता है और दूसरी तरफ मानवीय कूटनीति में अपनी छवि गढ़ रहा है। गौरतलब है कि 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' जैसी पहलें और 18 देशों की SALW फेलोशिप वैश्विक दक्षिण में भारत के नेतृत्व की दावेदारी को पुष्ट करती हैं। हालाँकि, स्वायत्त हथियारों पर बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय नियमों को लेकर भारत की स्थिति अभी भी सावधानीपूर्वक अस्पष्ट है — एक ऐसी खाई जिसे वैश्विक मंचों पर आलोचक नोटिस कर रहे हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनजीए फर्स्ट कमेटी में सांसद कमलजीत सहरावत ने भारत की ओर से क्या कहा?
सांसद कमलजीत सहरावत ने 21 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूएनजीए फर्स्ट कमेटी में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पारंपरिक हथियारों पर सैन्य जरूरत और मानवीय पहलू के बीच संतुलन की वकालत की। उन्होंने सीसीडब्ल्यू के सभी पाँच प्रोटोकॉल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
सीसीडब्ल्यू और उसके पाँच प्रोटोकॉल क्या हैं?
सीसीडब्ल्यू (कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपन्स) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो कुछ पारंपरिक हथियारों के उपयोग को सीमित करती है। इसके पाँच प्रोटोकॉल भूमि माइन, आईईडी, युद्ध के विस्फोटक अवशेष जैसे मानवीय नुकसान पहुँचाने वाले हथियारों को नियंत्रित करते हैं।
भारत की 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' पहल क्या है?
यह भारत सरकार की एक मानवीय सहायता पहल है जिसके तहत हाल के वर्षों में कई देशों में 15,000 से अधिक कृत्रिम अंग शिविर आयोजित किए गए हैं। यह पहल युद्ध और विस्फोटक अवशेषों से प्रभावित पीड़ितों की सहायता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत ने रक्षा क्षेत्र में एआई के लिए कौन-सा ढाँचा तैयार किया है?
भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के मूल्यांकन हेतु एक घरेलू ढाँचा विकसित किया है, जो विश्वसनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और निष्पक्षता — इन पाँच सिद्धांतों पर आधारित है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के पहले सैन्य एआई पर अनौपचारिक विचार-विमर्श का सह-प्रायोजन भी किया।
भारत ने एसएएलडब्ल्यू नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए हैं?
भारत ने इस वर्ष एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहली एसएएलडब्ल्यू संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप की मेजबानी की, जिसमें 18 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा भारत काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति और निरस्त्रीकरण के एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय केंद्र के साथ अवैध हथियार व्यापार के खिलाफ सक्रिय रूप से काम करता है।
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