यूएनजीए फर्स्ट कमेटी में सांसद कमलजीत सहरावत ने रखा भारत का पक्ष, सैन्य जरूरत और मानवीय संतुलन पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की फर्स्ट कमेटी में 21 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की लोकसभा सदस्य कमलजीत सहरावत ने न्यूयॉर्क में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पारंपरिक हथियारों पर भारत का आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सैन्य आवश्यकता और मानवीय अनिवार्यता के बीच संतुलन को अपनी नीति की मूल धुरी मानता है।
सीसीडब्ल्यू प्रोटोकॉल पर भारत की प्रतिबद्धता
सांसद कमलजीत सहरावत ने कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपन्स (सीसीडब्ल्यू) के सभी पाँच प्रोटोकॉल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, 'सीसीडब्ल्यू के सभी पाँच प्रोटोकॉल के पक्षकार के रूप में भारत का मानना है कि इसकी स्थायी शक्ति संतुलन में निहित है, जो सैन्य आवश्यकता और मानवीय अनिवार्यता के बीच तालमेल स्थापित करती है और एक ही ढाँचे के भीतर विविध सुरक्षा हितों वाले राज्यों को एक साथ लाती है।'
संशोधित प्रोटोकॉल-II के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह प्रोटोकॉल भूमि माइनों से उत्पन्न मानवीय चिंताओं को लंबी सीमाओं वाले देशों की वैध रक्षा जरूरतों के साथ संतुलित करता है। भारत ने इस प्रोटोकॉल के तहत अपने दायित्वों का पालन किया है, जिसमें गैर-पहचान योग्य माइनों का उत्पादन न करना और सभी एंटी-पर्सनल माइनों को पहचान योग्य बनाना शामिल है।
आईईडी खतरों और पीड़ित सहायता पर भारत का रुख
सांसद सहरावत ने कहा कि प्रोटोकॉल-V के एक अंतरराष्ट्रीय हस्ताक्षरकर्ता के रूप में भारत युद्ध से उत्पन्न विस्फोटक अवशेषों के कारण होने वाले मानवीय नुकसान के प्रति गहराई से संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि आतंकवादी और अवैध सशस्त्र समूहों द्वारा तैनात किए जाने वाले आईईडी (इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से निपटने के लिए यह प्रोटोकॉल एक ठोस ढाँचा प्रदान करता है।
पीड़ित सहायता के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 'इंडिया फॉर ह्यूमैनिटी' पहल के अंतर्गत हाल के वर्षों में कई देशों में 15,000 से अधिक कृत्रिम अंग शिविर आयोजित किए गए हैं। यह भारत की मानवीय कूटनीति का एक ठोस उदाहरण है।
रक्षा क्षेत्र में एआई और भरोसेमंद तकनीक का ढाँचा
घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों और सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख करते हुए सांसद सहरावत ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के पहले अनौपचारिक विचार-विमर्श में रचनात्मक रूप से भाग लिया और उसका सह-प्रायोजन भी किया। भारत ने रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद एआई के मूल्यांकन हेतु एक घरेलू ढाँचा विकसित किया है, जो विश्वसनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और निष्पक्षता — इन पाँच सिद्धांतों पर आधारित है।
अवैध हथियार व्यापार और एसएएलडब्ल्यू नियंत्रण
सांसद सहरावत ने बताया कि भारत छोटे हथियारों और हल्के हथियारों (SALW) पर संयुक्त राष्ट्र कार्ययोजना और अंतरराष्ट्रीय ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट्स का पूरी तरह समर्थन करता है। अवैध हथियार व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ भारत काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति और निरस्त्रीकरण के एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय केंद्र के साथ सक्रिय रूप से कार्य करता है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एसएएलडब्ल्यू नियंत्रण के लिए पहली बार संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप की मेजबानी की, जिसमें 18 देशों के प्रतिनिधियों को क्षमता निर्माण के लिए एक साथ लाया गया। यह आयोजन क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
आगे की राह
भारत ने पारंपरिक हथियारों और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए इनके उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया। यूएनजीए की यह भागीदारी भारत की बहुपक्षीय कूटनीति में बढ़ती सक्रियता और वैश्विक निरस्त्रीकरण चर्चाओं में एक ज़िम्मेदार आवाज के रूप में उसकी स्थिति को और सुदृढ़ करती है।