कीर स्टार्मर के इस्तीफे की अटकलें तेज: एंडी बर्नहैम बन सकते हैं ब्रिटेन के अगले PM
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटिश राजनीति में 21 जून 2025 को बड़ी हलचल मची, जब कयास लगाए जाने लगे कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच स्टार्मर सोमवार को पद छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं, जिससे एंडी बर्नहैम के नेतृत्व में सत्ता हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त हो सके। यदि यह होता है, तो स्टार्मर पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बनेंगे जो पद छोड़ेंगे।
स्टार्मर सरकार पर दबाव की पृष्ठभूमि
महज दो वर्ष पूर्व कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी को 174 सीटों के बहुमत के साथ ऐतिहासिक चुनावी जीत दिलाई थी, जिसे पार्टी की निर्णायक वापसी माना गया था। लेकिन उनका कार्यकाल शुरू से ही विवादों में घिरा रहा। बुजुर्गों के लिए विंटर फ्यूल भुगतान से जुड़े फैसले और वॉशिंगटन में पीटर मैंडेलसन को ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने के निर्णय ने सबसे अधिक विवाद खड़ा किया।
कई नीतिगत यू-टर्न्स ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए और पार्टी के भीतर असंतोष को हवा दी। गौरतलब है कि मई में भी उन पर इस्तीफे का दबाव बना था, लेकिन उन्होंने तब पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया था।
सर्वेक्षणों में लेबर की गिरती साख
हाल के जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी की स्थिति लगातार कमज़ोर हुई है और स्टार्मर की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी गिरी है। इसी बीच, रिफॉर्म यूके दल लगातार 300 से अधिक राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में बढ़त बनाए हुए है। पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि यदि नेतृत्व में बदलाव नहीं हुआ, तो आगामी चुनावों में लेबर को भारी नुकसान हो सकता है और रिफॉर्म यूके के नेता नाइजल फैराज के सत्ता में आने की संभावना बढ़ सकती है।
एंडी बर्नहैम: 'मैनचेस्टरिज्म' का चेहरा
56 वर्षीय एंडी बर्नहैम, जो इससे पहले ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में कार्यरत थे, को लेबर पार्टी के भीतर एक सशक्त विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव में उन्होंने रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को पराजित कर अपनी राजनीतिक साख को और मजबूत किया।
उनके समर्थक उनके आर्थिक दृष्टिकोण को 'मैनचेस्टरिज्म' का नाम दे रहे हैं — जो मैनचेस्टर के तीव्र आर्थिक विकास और शहरी पुनर्निर्माण के अनुभवों पर आधारित एक मॉडल है। इस विचारधारा का उद्देश्य ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पुनर्गठित करना है, जो वर्षों से धीमी वृद्धि, अस्थिर नीतियों और सार्वजनिक वित्त पर दबाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
ऋषि सुनक की बर्नहैम को सलाह
ब्रिटेन के पूर्व कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने संडे टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में लेबर नेता बर्नहैम को महत्वपूर्ण राजनीतिक सलाह दी। सुनक ने चेतावनी दी कि उनके आसपास के लोग उन्हें प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने के लिए राजनीतिक दबाव, मंत्रियों के इस्तीफे और अन्य तरीकों का सहारा ले सकते हैं, लेकिन बर्नहैम को 'डिफॉल्ट' स्थिति में प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए। सुनक ने परोक्ष रूप से 2024 के आम चुनाव में मिली अपनी हार का भी संदर्भ दिया, जब कंजर्वेटिव पार्टी को अपने संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा था।
नेतृत्व चुनौती की राह आसान नहीं
लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, किसी भी नेतृत्व चुनौती के लिए कम से कम 20 प्रतिशत सांसदों का समर्थन आवश्यक है, यानी लगभग 81 सांसदों की सहमति ज़रूरी होगी। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने की इच्छा जताई है, हालाँकि उनके व्यापक समर्थन को लेकर संशय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कई सांसद संभावित विजेता के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं, जो बर्नहैम के पक्ष में माहौल बनाता है।
ब्रिटिश राजनीति में यह उथल-पुथल ऐसे समय में आई है जब देश आर्थिक अनिश्चितता और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव से जूझ रहा है। आने वाले दिनों में लेबर पार्टी का रुख स्पष्ट होगा।