कीर स्टार्मर का इस्तीफा: 10 साल में ब्रिटेन के 6वें पीएम की विदाई, अब एंडी बर्नहैम की ओर नज़रें
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 22 जून 2026 को 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भावुक होते हुए अपने पद से इस्तीफे की घोषणा की, जिससे वे पिछले एक दशक में उस ऐतिहासिक पते से विदा होने वाले छठे प्रधानमंत्री बन गए। जुलाई 2024 में भारी बहुमत से सत्ता में आई लेबर पार्टी के लिए यह झटका महज दो वर्षों के भीतर आया है।
ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था और पीएम बदलने की प्रक्रिया
ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करती। मतदाता हाउस ऑफ कॉमन्स — संसद के निचले सदन — के लिए सांसद चुनते हैं, और जिस पार्टी को बहुमत मिलता है उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है। यदि पार्टी के सांसद अपने नेता पर विश्वास खो दें, तो आंतरिक चुनाव के ज़रिए उसे हटाया जा सकता है — आम चुनाव की प्रतीक्षा किए बिना। यही वह संवैधानिक प्रावधान है जिसने पिछले एक दशक में बार-बार सत्ता-परिवर्तन को संभव बनाया।
ब्रेक्जिट से शुरू हुई राजनीतिक उथल-पुथल
राजनीतिक अस्थिरता की जड़ें 2016 के ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में जनमत संग्रह कराया, लेकिन परिणाम उनकी उम्मीद के विपरीत रहा और ब्रिटेन ने 'ब्रेक्जिट' का रास्ता चुना। नतीजे के तुरंत बाद कैमरून ने इस्तीफा दे दिया।
ब्रेक्जिट ने ब्रिटिश राजनीति की पारंपरिक संरचना को झकझोर कर रख दिया — मतदाता पुरानी राजनीतिक निष्ठाओं से दूर होते गए और देश की राजनीति तेज़ी से ध्रुवीकृत हो गई। गौरतलब है कि विंस्टन चर्चिल ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में नौ साल, मार्गरेट थैचर ने करीब 12 वर्ष और टोनी ब्लेयर ने एक दशक बिताए थे — वह स्थायित्व अब इतिहास बन चुका है।
एक के बाद एक छह प्रधानमंत्रियों की विदाई
कैमरून के बाद थेरेसा मे ने सत्ता संभाली, लेकिन ब्रेक्जिट को लागू करने को लेकर अपनी ही पार्टी के भीतर मतभेदों से जूझती रहीं और 2019 में पद छोड़ना पड़ा। बोरिस जॉनसन 'गेट ब्रेक्जिट डन' के नारे के साथ आए, परंतु उनके कार्यकाल में आव्रजन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा और कोविड लॉकडाउन के दौरान 'पार्टीगेट' विवाद ने उन्हें भी इस्तीफे पर मजबूर कर दिया।
लिज़ ट्रस ब्रिटिश संसदीय इतिहास का सबसे छोटा कार्यकाल लेकर आईं — विवादास्पद 'मिनी बजट' से वित्तीय बाज़ारों में हलचल मची और महज 45 दिनों में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद भारतीय मूल के ऋषि सुनक 2022 में प्रधानमंत्री बने। उन्होंने पाँच वायदे किए, जिनमें से मुद्रास्फीति कम करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के दो वायदे पूरे हुए, लेकिन सरकारी ऋण घटाने, एनएचएस की प्रतीक्षा सूची कम करने और इंग्लिश चैनल पार से अप्रवासियों को रोकने के वायदे अधूरे रहे। 20 महीने के कार्यकाल के बाद 2024 के आम चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
स्टार्मर की विदाई और नए नेतृत्व की तलाश
जुलाई 2024 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने भारी मतों से जीत दर्ज की। लेकिन दो वर्षों से भी कम समय में स्थानीय चुनावों में खराब प्रदर्शन, पार्टी के भीतर असंतोष और वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों ने उनकी स्थिति कमज़ोर कर दी। इसी दौर में रिफॉर्म यूके के नेता नाइजेल फैरज का नाम अगले प्रधानमंत्री के तौर पर चर्चा में आया।
हालांकि, एंडी बर्नहैम ने उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव में रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को पराजित कर लेबर पार्टी में उम्मीद की नई लहर जगाई। स्टार्मर ने अपने विदाई भाषण में कहा कि लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू करेगी और यह प्रक्रिया संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश — जो 16 जुलाई से शुरू होने की संभावना है — से पहले पूरी कर ली जाएगी।
आगे क्या होगा
यदि बर्नहैम के सामने कोई गंभीर चुनौती नहीं आती, तो कथित तौर पर 17 जुलाई तक ब्रिटेन को अपना नया प्रधानमंत्री मिल सकता है। ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 में होना है, और लेबर पार्टी के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन उस चुनाव की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।