बांग्लादेश के खलीलुर रहमान UNGA के 81वें सत्र के अध्यक्ष चुने गए, जयशंकर ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र का अध्यक्ष चुन लिया गया है। मंगलवार को न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में हुए मतदान में उन्होंने साइप्रस के उम्मीदवार को आठ वोटों के अंतर से हराया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उन्हें बधाई देते हुए बहुपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
जयशंकर का बधाई संदेश
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई। हमारी साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने का इंतजार रहेगा।” यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ढाका और नई दिल्ली के बीच पिछले कुछ महीनों से कूटनीतिक संवाद नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है।
मतदान का गणित
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव न्यूयॉर्क समयानुसार सुबह 10 बजे जनरल असेंबली हॉल में ‘रूल्स ऑफ़ प्रोसीजर’ के नियम-30 के तहत हुआ। यूएनजीए की मौजूदा अध्यक्ष और जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बारबॉक ने बताया कि कुल 190 वोट डाले गए। डॉ. खलीलुर रहमान को 99 वोट मिले, जबकि साइप्रस के राजदूत एंड्रियास एस. काकौरिस को 91 वोट प्राप्त हुए।
एशिया-प्रशांत समूह की वापसी
इस जीत के साथ बांग्लादेश ने 81वें सत्र के लिए एशिया-प्रशांत समूह की रोटेशनल सीट अपने नाम कर ली है। गौरतलब है कि यह लगभग चार दशक बाद इस हाई-प्रोफ़ाइल पद पर बांग्लादेश की वापसी है। इससे पहले 1986-87 में तत्कालीन विदेश मंत्री हुमायूं रशीद चौधरी महासभा के 41वें सत्र के अध्यक्ष चुने गए थे।
भू-राजनीतिक संकेत
कूटनीतिक सूत्रों ने रिपोर्टों में बताया कि मुकाबले पर आख़िरी चरण तक कड़ी नज़र रखी गई और बदलते भू-राजनीतिक तालमेल ने नतीजे में अहम भूमिका निभाई। महासभा की अध्यक्षता हर साल पाँच क्षेत्रीय समूहों — अफ़्रीका, एशिया-प्रशांत, पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका व कैरिबियन तथा पश्चिमी यूरोप व अन्य — के बीच रोटेट होती है, और यूएन के 193 सदस्य देश प्रत्येक चुनाव में एक-एक वोट डालते हैं।
आगे क्या
यूएनजीए का 81वाँ सत्र 8 सितंबर 2026 को आरंभ होगा, जबकि उच्चस्तरीय आम चर्चा 22 सितंबर से शुरू होगी। बांग्लादेश की अध्यक्षता के दौरान दक्षिण एशिया से जुड़ी प्राथमिकताओं और भारत-बांग्लादेश सहयोग के नए अध्याय पर भी नज़र रहेगी।