खामेनेई की अंतिम यात्रा: तेहरान में राष्ट्रगान के साथ विदाई, लाखों उमड़े
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा सोमवार, 6 जुलाई की सुबह तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर से ईरानी राष्ट्रगान की धुन के साथ शुरू हुई। लाखों शोकाकुल नागरिक सड़कों पर उमड़ आए, और ईरानी इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक जमावड़ों में से एक का दृश्य उपस्थित हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
खामेनेई के ताबूत को तेहरान के प्रमुख मार्गों से होते हुए पवित्र शहर कोम ले जाया जाएगा, जहाँ अंतिम दफन की रस्में अदा की जाएँगी। यात्रा में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता और सेना के शीर्ष अधिकारी शामिल रहे।
ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम और सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी के अनुसार, यह ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा सार्वजनिक जमावड़ा है। भीड़ की विशालता को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने 193 बसें इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात कीं, ताकि देश-विदेश से आए प्रतिनिधिमंडलों और नागरिकों को कार्यक्रम स्थल तक पहुँचने में सुविधा हो।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन का संकल्प
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस अवसर पर कहा कि खामेनेई की यह यात्रा विदाई नहीं, बल्कि उनके मार्ग पर चलने का प्रण है। उन्होंने कहा, 'मैं इसे विदाई नहीं मानता। यह उनके मिशन और विचारों को आगे बढ़ाने का वादा है।'
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार में उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ और उनकी आँखों के आँसू किसी आदेश से नहीं आ सकते। उनके शब्दों में, 'लोगों का व्यवहार किसी भी भाषण से ज़्यादा असरदार होता है और पूरी दुनिया इसे समझती है।'
सेना प्रमुख की प्रतिज्ञा
ईरानी सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातमी ने न्याय की तलाश कभी न छोड़ने की प्रतिज्ञा ली। प्रेस टीवी के अनुसार उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने यह अपराध किया है, उन्हें यह जान लेना चाहिए कि ईरान की जनता और हम सभी न्याय की अपनी माँग और उसकी प्राप्ति के प्रयास को कभी नहीं छोड़ेंगे। यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हम इस प्रयास को लगातार जारी रखेंगे।'
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर थे — तीन दशकों से अधिक समय तक देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक दिशा को आकार देने वाले। उनके निधन के बाद उत्तराधिकार का प्रश्न ईरान के भविष्य की दिशा तय करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान क्षेत्रीय तनावों और अंतरराष्ट्रीय दबावों से जूझ रहा है। कोम तक की यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ईरानी राजनीतिक व्यवस्था की एकजुटता का प्रतीक भी मानी जा रही है।
क्या होगा आगे
अंतिम दफन की रस्में कोम में संपन्न होंगी। इसके बाद ईरान में उत्तराधिकार प्रक्रिया और नेतृत्व के अगले चरण पर दुनिया की नज़रें टिकी रहेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण काल ईरान की घरेलू और वैश्विक नीतियों दोनों के लिए निर्णायक होगा।