29 अगस्त 2026
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एनएएम की 65वीं वर्षगांठ: बेलग्रेड उच्चस्तरीय बैठक में किरेन रिजिजू करेंगे भारत का नेतृत्व

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एनएएम की 65वीं वर्षगांठ: बेलग्रेड उच्चस्तरीय बैठक में किरेन रिजिजू करेंगे भारत का नेतृत्व

सारांश

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के पहले शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ पर बेलग्रेड में उच्चस्तरीय स्मृति बैठक आयोजित होगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। 121 विकासशील देशों के इस मंच पर भारत संस्थापक सदस्य के रूप में बहुपक्षवाद और आतंकवाद-विरोध पर अपना पक्ष रखेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक बेलग्रेड, सर्बिया में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
बैठक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित है।
थीम: 'गुटनिरपेक्षता की विरासत: आज की दुनिया के लिए सबक' ; NAM में 121 विकासशील देश शामिल हैं।
NAM औपचारिक रूप से 1961 में बेलग्रेड में ही स्थापित हुआ था; भारत इसका संस्थापक सदस्य है।
अक्टूबर 2025 में कंपाला बैठक में भारत ने पहलगाम हमले का हवाला देते हुए आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का आह्वान किया था।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में आयोजित होने वाली एक उच्चस्तरीय स्मृति बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 29 अगस्त को जानकारी दी कि यह बैठक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुखों के सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।

बैठक की थीम और उद्देश्य

इस स्मृति बैठक की थीम 'गुटनिरपेक्षता की विरासत: आज की दुनिया के लिए सबक' (The Legacy of Non-Alignment: Lessons for Today's World) रखी गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, NAM ऐतिहासिक महत्व का वह मंच है जो 121 विकासशील देशों को एकजुट करता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत इस आंदोलन का संस्थापक सदस्य है और इसके मूल सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

एनएएम का ऐतिहासिक संदर्भ

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन में रखी गई थी, जहाँ एशिया और अफ्रीका के देशों ने संप्रभुता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप और उपनिवेशवाद-विरोध जैसे सिद्धांतों को स्वीकार किया था। इसके छह वर्ष बाद 1961 में बेलग्रेड में ही पहले शिखर सम्मेलन के साथ NAM औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। आज भी यह आंदोलन बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में विकासशील देशों की आवाज़ को मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय है।

कंपाला बैठक में भारत का रुख

इससे पूर्व अक्टूबर 2025 में युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित 19वीं NAM मध्यावधि मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकी हमलों का शिकार रहा है और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या इसका ताज़ा उदाहरण है।

सिंह ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह गहरी चिंता का विषय है कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम हमले पर विचार किया, तब एक सदस्य देश ने कथित तौर पर हमले के ज़िम्मेदार संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का बचाव किया और उसके सार्वजनिक उल्लेख को हटाने की माँग तक की।

आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' का आह्वान

कंपाला में सिंह ने NAM सदस्य देशों से आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का रुख अपनाने का आह्वान किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जब कोई देश आतंकवाद को राज्य नीति बना ले, आतंकी ठिकानों को बेरोकटोक फलने-फूलने दिया जाए और राज्य के अधिकारी आतंकवादियों का महिमामंडन करें, तो ऐसे कृत्यों की स्पष्ट और बिना शर्त निंदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद को प्रायोजित करने, समर्थन देने या छिपाने की किसी भी कोशिश का अंततः खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

आगे क्या

बेलग्रेड की यह स्मृति बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बहुपक्षीय मंचों की प्रासंगिकता पर बहस तेज़ है। रिजिजू के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल से अपेक्षा है कि वह NAM के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करेगा और समकालीन चुनौतियों — विशेषकर आतंकवाद और बहुपक्षवाद — पर भारत का पक्ष मज़बूती से रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्या 121 देशों का यह मंच आज की बहुध्रुवीय दुनिया में वास्तविक प्रभाव रखता है या केवल कूटनीतिक परंपरा निभाता है? भारत के लिए NAM हमेशा 'रणनीतिक स्वायत्तता' का प्रतीक रहा है, लेकिन क्वाड सदस्यता और पश्चिमी साझेदारियों के विस्तार के साथ यह संतुलन पहले से कहीं अधिक जटिल हो गया है। कंपाला में पाकिस्तान पर परोक्ष प्रहार और पहलगाम हमले का उल्लेख दर्शाता है कि भारत NAM को अब द्विपक्षीय एजेंडे के लिए भी एक मंच के रूप में देख रहा है। असली परीक्षा यह है कि क्या बेलग्रेड में भारत केवल वर्षगांठ की औपचारिकता निभाएगा या NAM के भीतर एक नई प्रासंगिक भूमिका की रूपरेखा भी पेश करेगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेलग्रेड में एनएएम की 65वीं वर्षगांठ बैठक क्या है?
यह गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुखों के सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक आयोजित एक उच्चस्तरीय स्मृति बैठक है। इसकी थीम 'गुटनिरपेक्षता की विरासत: आज की दुनिया के लिए सबक' रखी गई है।
बेलग्रेड बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय ने 29 अगस्त को यह जानकारी दी।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
NAM की नींव 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन में रखी गई और 1961 में बेलग्रेड में पहले शिखर सम्मेलन के साथ यह औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। भारत इस आंदोलन का संस्थापक सदस्य है और इसमें अब 121 विकासशील देश शामिल हैं।
कंपाला में NAM बैठक में भारत ने क्या रुख अपनाया था?
अक्टूबर 2025 में कंपाला (युगांडा) में 19वीं NAM मध्यावधि मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग की माँग की थी। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले का हवाला देते हुए NAM से 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने का आह्वान किया था।
NAM आज भी क्यों प्रासंगिक है?
NAM बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में 121 विकासशील देशों की सामूहिक आवाज़ को मज़बूत करने की दिशा में काम करता है। बेलग्रेड की 65वीं वर्षगांठ बैठक इस सवाल पर केंद्रित है कि आज की बहुध्रुवीय दुनिया में गुटनिरपेक्षता के सिद्धांतों से क्या सबक लिए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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