लक्ष्मी विलास पैलेस वडोदरा में सांस्कृतिक कूटनीति की शाम, दर्जनों देशों के राजदूत एक मंच पर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के वडोदरा स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में 10 अक्टूबर 2026 को कला, विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति का एक विशेष संगम देखने को मिला, जब ऐक्यम 2026 पहल के अंतर्गत दुनिया के कई देशों के मिशन प्रमुख एक साथ एकत्रित हुए। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय कला परंपरा और वैश्विक संवाद को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करना था।
मुख्य घटनाक्रम
अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'गुजरात के वडोदरा में ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में राजदूत के दौरे के दौरान दुनिया भर के सहयोगी मिशन प्रमुखों के साथ। इस शानदार पहल के लिए राजदूत मोनिका कपिल और सिद्धांत मोहता का आभारी हूं।'
भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने भी इस शाम का अनुभव साझा करते हुए एक्स पर लिखा, 'गुजरात के वडोदरा में भव्य लक्ष्मी विलास पैलेस में कला, विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति की एक शाम, दुनिया भर के साथी मिशन प्रमुखों की मौजूदगी में।'
राजा रवि वर्मा की कृतियों की नाटकीय प्रस्तुति
तिस्साफी ने बताया कि इस कार्यक्रम में राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध कृतियों की नाटकीय प्रस्तुति की गई, जिसमें भारतीय पौराणिक विषयों और यूरोपीय यथार्थवाद का मंच पर सुंदर संगम देखने को मिला। यह प्रस्तुति ऐक्यम 2026 की थीम 'रस और यथार्थवाद' का सजीव प्रतिबिंब थी। गौरतलब है कि राजा रवि वर्मा वे चित्रकार थे जिन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं को पश्चिमी तकनीक के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई — और इस प्रस्तुति ने उसी सांस्कृतिक सेतु को जीवंत किया।
तिस्साफी ने एंबेसडर सिद्धांत मोहता और उनकी टीम के साथ-साथ महारानी राधिकराजे गायकवाड़ और महाराजा समरजीत सिंह गायकवाड़ का गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए विशेष धन्यवाद किया।
लक्ष्मी विलास पैलेस का ऐतिहासिक महत्व
लक्ष्मी विलास पैलेस भारत के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक है और इंडो-सरसेनिक वास्तुकला का एक अनुपम उदाहरण माना जाता है। गायकवाड़ राजवंश की यह धरोहर वडोदरा की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सॉफ्ट पावर कूटनीति को अपनी विदेश नीति का एक सक्रिय उपकरण बना रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति का व्यापक संदर्भ
ऐक्यम 2026 जैसी पहलें भारत की उस रणनीति का हिस्सा हैं जिसके तहत विरासत स्थलों को वैश्विक संवाद के मंच के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। विदेशी राजनयिकों का इस पैलेस में एकत्र होना भारत-विश्व के बीच सांस्कृतिक समझ को गहरा करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे आयोजन तब और प्रभावशाली होते हैं जब इनके साथ ठोस द्विपक्षीय सहयोग के कार्यक्रम भी जुड़े हों।
आगे की दिशा
ऐक्यम 2026 के अंतर्गत इस तरह के और आयोजनों की संभावना जताई जा रही है, जो भारत की कला परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का क्रम जारी रखेंगे। वडोदरा जैसे सांस्कृतिक केंद्रों को कूटनीतिक गतिविधियों के लिए चुना जाना इस बात का संकेत है कि भारत अपनी विरासत को एक जीवंत राजनयिक संसाधन के रूप में देख रहा है।