12 अक्टूबर 2026
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वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में नवरात्र गरबा: 30 देशों के 160 विदेशी प्रतिनिधि झूमे

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वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में नवरात्र गरबा: 30 देशों के 160 विदेशी प्रतिनिधि झूमे

सारांश

वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में नवरात्र के पहले दिन एक अनोखा नजारा देखने को मिला — 30 देशों के 160 विदेशी प्रतिनिधि पारंपरिक परिधानों में स्थानीय लोगों के साथ गरबा करते नजर आए। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति की एक जीवंत मिसाल बन गया।

मुख्य बातें

12 अक्टूबर 2026 को नवरात्र के पहले दिन वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में भव्य गरबा उत्सव का आयोजन हुआ।
30 देशों के करीब 160 विदेशी प्रतिनिधियों ने पारंपरिक परिधानों में गरबा में भाग लिया।
वडोदरा की महारानी राधिका राजे गायकवाड़ , सांसद डॉ.
हेमांग जोशी और म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विदेशी प्रतिनिधियों ने भारतीय संस्कृति, एकजुटता और भक्तिभाव को अविस्मरणीय अनुभव बताया।
महारानी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति को विश्व तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।

नवरात्र के पहले दिन, 12 अक्टूबर 2026 को वडोदरा के ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में आयोजित भव्य गरबा उत्सव में 30 देशों के करीब 160 विदेशी प्रतिनिधियों ने भाग लेकर भारतीय लोक संस्कृति का जीवंत अनुभव किया। पारंपरिक परिधानों में सजे इन विदेशी मेहमानों ने स्थानीय नगरवासियों के साथ ढोल की थाप पर गरबा किया, जो भारत और विश्व के बीच सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक बना।

भव्य आयोजन का स्वरूप

वडोदरा की महारानी राधिका राजे गायकवाड़, वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी और वडोदरा म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू इस विशेष अवसर पर उपस्थित रहे। सभी ने विदेशी मेहमानों के साथ मिलकर मां की आराधना में गरबा किया। आयोजन की शुरुआत दीयों की थाली से मां की आरती से हुई, जिसके बाद पैलेस का विशाल प्रांगण रोशनी और भक्ति की लय में डूब गया।

गौरतलब है कि लक्ष्मी विलास पैलेस का गरबा उत्सव वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर वडोदरा की एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। इस वर्ष का आयोजन इसलिए भी विशेष रहा, क्योंकि अब तक के किसी भी आयोजन में इतने अधिक देशों के प्रतिनिधि एक साथ उपस्थित हुए।

महारानी की प्रतिक्रिया

महारानी राधिका राजे गायकवाड़ ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'इतने देशों से प्रतिनिधि आए हैं और उन्होंने हमारे गरबा में भाग लिया है। वे हमारे वडोदरा की संस्कृति की झलक और यादें अपने साथ ले जा रहे हैं। यह सब मां की कृपा है।'

उन्होंने आगे कहा कि विदेशी प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने कभी इतने सारे लोगों को एक साथ, एक जगह पर इतने प्रेम और श्रद्धा के साथ नाचते हुए नहीं देखा। महारानी के अनुसार, भारतीय संस्कृति को विदेशों तक पहुँचाने का यह एक सशक्त माध्यम है।

विदेशी प्रतिनिधियों के अनुभव

कार्यक्रम में शामिल एक विदेशी प्रतिनिधि ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'यह एक शानदार अवसर है कि कैसे इतने सारे लोग एक साथ एकत्र होकर नृत्य कर सकते हैं, मौज-मस्ती कर सकते हैं। मुझे यकीन है कि मैं इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी और खूबसूरत यादों में से एक के तौर पर अपने साथ ले जाऊंगा।'

एक अन्य महिला प्रतिनिधि ने उत्साहपूर्वक कहा, 'यह मेरे जीवन के सबसे खुशी के दिनों में से एक है।' सभी विदेशी मेहमान पहली बार गरबा का अनुभव कर काफी उत्साहित नजर आए और उन्होंने भारतीय संस्कृति, एकजुटता तथा प्रेमभाव की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

सांस्कृतिक कूटनीति का संदेश

यह आयोजन ऐसे समय में आया है जब भारत सांस्कृतिक कूटनीति को एक नीतिगत प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रहा है। वडोदरा जैसे शहरों में आयोजित उत्सव, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को आमंत्रित कर, भारत की 'सॉफ्ट पावर' को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का काम कर रहे हैं। आगामी नवरात्र दिवसों में भी लक्ष्मी विलास पैलेस परिसर में उत्सव जारी रहेगा, और अधिकारियों के अनुसार देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु व पर्यटक जुटने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का व्यावहारिक प्रदर्शन है — जहाँ 30 देशों के प्रतिनिधि एक ऐतिहासिक महल में ढोल की थाप पर झूमते हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत 'सॉफ्ट पावर' को विदेश नीति के औजार के रूप में तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। हालाँकि, मुख्यधारा की कवरेज उत्सव की चकाचौंध तक सीमित रह जाती है — यह प्रश्न कम पूछा जाता है कि इन प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान के दीर्घकालिक कूटनीतिक या आर्थिक परिणाम क्या होते हैं। उत्सव की सफलता निर्विवाद है, परंतु इसके असर को मापने का कोई सुस्पष्ट ढाँचा अभी भी दिखाई नहीं देता।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में नवरात्र गरबा उत्सव कब हुआ?
यह उत्सव 12 अक्टूबर 2026 को नवरात्र के पहले दिन आयोजित किया गया। वडोदरा के ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस परिसर में रात भर भक्ति और उत्सव का माहौल रहा।
इस गरबा उत्सव में कितने देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए?
30 देशों के करीब 160 विदेशी प्रतिनिधियों ने इस उत्सव में भाग लिया। सभी ने पारंपरिक परिधान धारण कर स्थानीय नगरवासियों के साथ गरबा किया।
इस आयोजन में कौन-कौन से प्रमुख लोग उपस्थित रहे?
वडोदरा की महारानी राधिका राजे गायकवाड़ , सांसद डॉ. हेमांग जोशी और म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने विदेशी मेहमानों के साथ मिलकर गरबा में भाग लिया।
विदेशी प्रतिनिधियों ने गरबा अनुभव के बारे में क्या कहा?
विदेशी प्रतिनिधियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। एक प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने कभी इतने लोगों को एक साथ इतने प्रेम और श्रद्धा के साथ नाचते नहीं देखा था।
यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह आयोजन भारत की 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सांस्कृतिक उत्सवों के जरिए विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को भारतीय परंपराओं से जोड़ा जाता है। महारानी राधिका राजे गायकवाड़ के अनुसार, यह भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम है।
राष्ट्र प्रेस
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