मनीला में बाढ़ के बाद लेप्टोस्पायरोसिस का कहर, सैन लाजारो अस्पताल में 50 मामले, 2 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
फिलीपींस की राजधानी मनीला में मूसलाधार बारिश और व्यापक बाढ़ के बाद लेप्टोस्पायरोसिस तेजी से पाँव पसार रहा है। संक्रामक रोगों के राष्ट्रीय रेफरल केंद्र सैन लाजारो अस्पताल में अब तक 50 मामले दर्ज हो चुके हैं और 2 मरीजों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग (डीओएच) के आँकड़ों के अनुसार, पूरे देश में यह संख्या 3,760 तक पहुँच चुकी है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका है।
मुख्य घटनाक्रम
सैन लाजारो अस्पताल — जो डीओएच द्वारा संचालित देश का प्रमुख संक्रामक रोग केंद्र है — ने बढ़ती माँग के मद्देनज़र लेप्टोस्पायरोसिस के मरीजों के लिए एक अलग एक्सप्रेस लेन खोली है। स्थानीय मीडिया चैनल टीवी5 की रिपोर्ट के अनुसार यह कदम मरीजों की संख्या में अचानक आई वृद्धि के जवाब में उठाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों ने देश के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया है।
इलोइलो में मृत्यु दर दोगुनी
मध्य फिलीपींस के इलोइलो प्रांत में पिछले आठ महीनों में लेप्टोस्पायरोसिस से करीब 10 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह संख्या 2025 की इसी अवधि की तुलना में दोगुनी है — जो इस बीमारी के बढ़ते खतरे को रेखांकित करती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि संक्रमण की आशंका होने पर तुरंत प्रोफिलैक्सिस एंटीबायोटिक्स लें।
88 शहरों में आपदा घोषित, 10 लाख प्रभावित
नागरिक सुरक्षा कार्यालय के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के कारण देश के कुल 88 शहरों और नगर पालिकाओं में आपदा की स्थिति घोषित की जा चुकी है। सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में सेंट्रल लुजोन के पम्पांगा, बाटान और बुलाकान प्रांत शामिल हैं।
पम्पांगा प्रांत में आधे से अधिक गाँव अभी भी जलमग्न हैं, जिससे करीब 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और कृषि को लगभग 1.4 अरब पेसो (करीब 2.27 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हुआ है। बाटान प्रांत ने आपदा की स्थिति घोषित कर करीब 8,000 निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। बुलाकान में बाढ़ के कारण सांता मारिया का एक पुल बंद रहा।
आम जनता पर असर
लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु संक्रमण है जो बाढ़ के पानी में चलने या उसके संपर्क में आने से फैलता है — विशेषकर जब पानी चूहों या अन्य जानवरों के मूत्र से दूषित हो। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग, किसान और बचाव कार्यों में लगे स्वयंसेवक सबसे अधिक जोखिम में हैं। गौरतलब है कि फिलीपींस में मानसून के दौरान हर साल इस बीमारी के मामले बढ़ते हैं, लेकिन इस बार मृत्यु दर और मामलों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में चिंताजनक रूप से अधिक है।
क्या होगा आगे
डीओएच ने देशभर में निगरानी बढ़ाने और प्रभावित क्षेत्रों में एंटीबायोटिक्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जब तक बाढ़ का पानी नहीं उतरता और स्वच्छता व्यवस्था बहाल नहीं होती, तब तक नए मामलों में और वृद्धि की आशंका बनी रहेगी।