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ली शुलेइ ने बीजिंग में शी चिनफिंग विचारधारा संगोष्ठी के विदेशी प्रतिनिधियों से की मुलाकात

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ली शुलेइ ने बीजिंग में शी चिनफिंग विचारधारा संगोष्ठी के विदेशी प्रतिनिधियों से की मुलाकात

सारांश

बीजिंग में आयोजित शी चिनफिंग विचारधारा पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सीपीसी प्रचार मंत्री ली शुलेइ ने विदेशी प्रतिनिधियों से मुलाकात की। ली ने इस विचारधारा को 'वर्तमान चीन को समझने की कुंजी' बताया, जबकि विदेशी प्रतिनिधियों ने चीन की विकास उपलब्धियाँ प्रत्यक्ष देखने के बाद इसके अध्ययन को मजबूत करने की इच्छा जताई।

मुख्य बातें

ली शुलेइ — सीपीसी पोलित ब्यूरो सदस्य और प्रचार विभाग मंत्री — ने 11 जुलाई को बीजिंग में विदेशी प्रतिनिधियों से भेंट की।
संगोष्ठी का विषय था: 'नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर शी चिनफिंग की विचारधारा और विश्व'।
ली ने कहा कि 18वीं सीपीसी राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद चीन ने ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।
विदेशी प्रतिनिधियों ने चीन के विभिन्न क्षेत्रों में विकास प्रत्यक्ष देखा और शी चिनफिंग विचारधारा के अध्ययन को सुदृढ़ करने की इच्छा जताई।
चीन ने विभिन्न देशों के राजनीतिक दलों के साथ राष्ट्र-शासन पर विचार-विमर्श जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय कमेटी के पोलित ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी प्रचार विभाग के मंत्री ली शुलेइ ने 11 जुलाई को बीजिंग में आयोजित 'नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर शी चिनफिंग की विचारधारा और विश्व' नामक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने वाले विदेशी प्रतिनिधियों से भेंट की। यह संगोष्ठी विभिन्न देशों के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को एकत्र कर राष्ट्र-शासन के अनुभवों के आदान-प्रदान का मंच बनी।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में ली शुलेइ ने रेखांकित किया कि नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर शी चिनफिंग की विचारधारा का गहन अध्ययन वर्तमान चीन को समझने की केंद्रीय कुंजी है। उन्होंने कहा कि 18वीं सीपीसी राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद महासचिव शी चिनफिंग के नेतृत्व में सीपीसी केंद्रीय कमेटी के मार्गदर्शन में चीन ने ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन विभिन्न देशों के राजनीतिक दलों के साथ राष्ट्र-शासन पर विचार-विमर्श और परस्पर सीखने के लिए तत्पर है।

विदेशी प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

संगोष्ठी में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्होंने चीन के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की उपलब्धियाँ प्रत्यक्ष रूप से देखीं। उन्होंने महासचिव शी चिनफिंग की विचारधारा के अध्ययन को और सुदृढ़ करने की इच्छा जताई, ताकि राष्ट्र-विकास की बुद्धिमत्ता को आत्मसात किया जा सके।

संगोष्ठी का महत्व

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब चीन वैश्विक स्तर पर अपनी वैचारिक पहुँच विस्तारित करने के प्रयासों में लगा है। गौरतलब है कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ सीपीसी के लिए विदेशी राजनीतिक दलों के साथ संवाद का एक नियमित माध्यम बन चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन मंचों का उद्देश्य चीन के शासन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाना है।

आगे की दिशा

इस बैठक के माध्यम से सीपीसी ने विभिन्न देशों के राजनीतिक दलों के साथ द्विपक्षीय संवाद को और प्रगाढ़ करने का संकेत दिया है। आने वाले समय में इस प्रकार के और आदान-प्रदान कार्यक्रमों की संभावना जताई जा रही है, जिनमें शासन, विकास और वैचारिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सीपीसी के 'पार्टी-टू-पार्टी डिप्लोमेसी' मॉडल का सुनियोजित विस्तार है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के मंचों पर विचारधारात्मक एकरूपता को प्रोत्साहित किया जाता है, न कि वास्तविक नीतिगत बहस को। भारत सहित कई लोकतांत्रिक देशों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि इन संगोष्ठियों के माध्यम से कौन-से देश चीन के शासन मॉडल को अपना संदर्भ बिंदु मान रहे हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ली शुलेइ कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
ली शुलेइ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय कमेटी के पोलित ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय कमेटी के प्रचार विभाग के मंत्री हैं। वे चीन में विचारधारात्मक प्रसार और मीडिया नीति के शीर्ष अधिकारी माने जाते हैं।
बीजिंग में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी किस विषय पर थी?
यह संगोष्ठी 'नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर शी चिनफिंग की विचारधारा और विश्व' विषय पर आयोजित की गई थी। इसमें विभिन्न देशों के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए और राष्ट्र-शासन के अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।
विदेशी प्रतिनिधियों ने इस संगोष्ठी में क्या कहा?
विदेशी प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने इस यात्रा के दौरान चीन के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की उपलब्धियाँ प्रत्यक्ष देखीं। उन्होंने शी चिनफिंग की विचारधारा का अध्ययन और मजबूत करने की इच्छा जताई ताकि राष्ट्र-विकास की बुद्धिमत्ता प्राप्त की जा सके।
18वीं सीपीसी राष्ट्रीय कांग्रेस का इस संदर्भ में क्या महत्व है?
18वीं सीपीसी राष्ट्रीय कांग्रेस (2012) के बाद से शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीन ने जो नीतिगत और आर्थिक दिशा अपनाई, उसे ली शुलेइ ने 'ऐतिहासिक उपलब्धियों' का आधार बताया। यही काल चीनी विशेषता वाले समाजवाद की वर्तमान विचारधारा का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है।
इस प्रकार की संगोष्ठियों का चीन की विदेश नीति में क्या स्थान है?
ये संगोष्ठियाँ सीपीसी की 'पार्टी-टू-पार्टी डिप्लोमेसी' रणनीति का हिस्सा हैं, जिनके ज़रिए चीन विदेशी राजनीतिक दलों के साथ सीधा संवाद स्थापित करता है। इनका उद्देश्य चीन के शासन मॉडल और विचारधारा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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