पेइचिंग में शी चिनफिंग के संस्कृति विचारों पर संगोष्ठी, सीपीसी प्रचार विभाग प्रमुख ली शुलेई शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चीन की राजधानी पेइचिंग में 17 मई 2026 को सामाजिक विज्ञान जगत के विद्वानों और विशेषज्ञों के लिए राष्ट्रपति शी चिनफिंग के संस्कृति संबंधी विचारों के अध्ययन और कार्यान्वयन पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई। इस संगोष्ठी में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और सीपीसी केंद्रीय समिति के प्रचार विभाग के मंत्री ली शुलेई ने भाग लेकर संबोधन दिया।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य
इस आयोजन का केंद्रीय लक्ष्य दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत विद्वानों को शी चिनफिंग के संस्कृति विचारों को गहराई से आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना था। उपस्थित प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से, सामाजिक विज्ञान जगत ने महासचिव शी के दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान पर दिए गए महत्वपूर्ण भाषण की भावना का गहन अध्ययन किया है।
प्रतिनिधियों के अनुसार, इस अवधि में ज्ञान नवाचार, सैद्धांतिक नवाचार और उपाय नवाचार — तीनों स्तरों पर ठोस प्रगति दर्ज की गई है। इसके साथ ही चीनी विशेषताओं वाले दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान के निर्माण को गति मिली है।
विद्वानों की प्रतिक्रिया और संकल्प
संगोष्ठी में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि नए युग और नई यात्रा ने दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान की समृद्धि के लिए एक व्यापक व्यावहारिक आधार तैयार किया है। उनका मत था कि समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी और अकादमिक नवाचार की आंतरिक प्रेरणा को प्रोत्साहन देना होगा।
प्रतिनिधियों ने चीनी दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान के लिए एक स्वतंत्र ज्ञान प्रणाली के निर्माण में तेजी लाने का संकल्प व्यक्त किया — जो पश्चिमी अकादमिक ढाँचों से अलग एक स्वायत्त बौद्धिक परंपरा विकसित करने की दिशा में चीन की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह संगोष्ठी ऐसे समय में आयोजित हुई है जब चीन अपनी 'सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता' की नीति को शैक्षणिक और वैचारिक स्तर पर मज़बूत करने में जुटा है। शी चिनफिंग के संस्कृति संबंधी विचार — जिनमें चीनी सभ्यता की विशिष्टता और मार्क्सवाद के साथ उसके समन्वय पर बल दिया जाता है — को सीपीसी ने आधिकारिक वैचारिक ढाँचे के रूप में स्थापित किया है।
सीपीसी और देश के समग्र कार्य में सामाजिक विज्ञान के योगदान को रेखांकित करने वाली इस संगोष्ठी को पार्टी के वैचारिक एकीकरण अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
आगे की दिशा
संगोष्ठी के संकल्पों के अनुसार, आने वाले समय में सामाजिक विज्ञान संस्थाओं से अपेक्षा की जाएगी कि वे शी चिनफिंग के विचारों को अपने शोध और अध्यापन में और गहराई से शामिल करें। ली शुलेई के संबोधन को इस दिशा में एक नीतिगत संकेत के रूप में देखा जा रहा है।