शी चिनफिंग का निर्देश: चीन में दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान को उच्च गुणवत्ता से विकसित करें
सारांश
मुख्य बातें
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के महासचिव, राष्ट्रपति और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष शी चिनफिंग ने हाल ही में देश में दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश चीन की वैचारिक और शैक्षणिक नीति को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले एक दशक की उपलब्धियाँ
शी चिनफिंग ने अपने निर्देश में रेखांकित किया कि CPC की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र ने पार्टी की केंद्रीय समिति के निर्णयों को लागू करते हुए ज्ञान नवाचार, सिद्धांत नवाचार और पद्धति नवाचार को ठोस रूप से आगे बढ़ाया है। इस अवधि में अनुसंधान के क्रमबद्ध और मूल्यवान परिणाम प्राप्त हुए हैं, जो चीन की वैचारिक प्रगति का प्रमाण हैं।
नई यात्रा पर प्रमुख प्राथमिकताएँ
शी ने कहा कि नई यात्रा पर दर्शनशास्त्र और सामाजिक विज्ञान जगत को नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद की विचारधारा के अनुरूप CPC के व्यापक नेतृत्व को और सुदृढ़ करना होगा। इसके साथ ही पार्टी के नवाचार सिद्धांतों की प्रणालीबद्धता और सैद्धांतिकीकरण से जुड़े अनुसंधान को भी विस्तार देना आवश्यक है।
उन्होंने जोर दिया कि चीन की स्वतंत्र दार्शनिक और सामाजिक-वैज्ञानिक ज्ञान व्यवस्था के निर्माण को तेज किया जाए। यह व्यवस्था चीन, विश्व, जनता और युग से जुड़े प्रश्नों का बेहतर उत्तर देने में सक्षम हो — यही इस पहल का केंद्रीय लक्ष्य है।
चीनी आधुनिकीकरण में योगदान
शी चिनफिंग के अनुसार, इन प्रयासों से चीनी शैली के आधुनिकीकरण के निर्माण में बौद्धिक योगदान और नीतिगत बुद्धिमत्ता बढ़ेगी। गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी वैश्विक वैचारिक उपस्थिति को मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब बीजिंग पश्चिमी शैक्षणिक प्रभाव से अलग अपनी स्वायत्त ज्ञान प्रणाली खड़ी करने पर ज़ोर दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के निर्देश शैक्षणिक स्वतंत्रता पर पार्टी के नियंत्रण को और पुख्ता करते हैं, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय विकास की वैचारिक ज़रूरत बताती है। आगे आने वाले समय में इन निर्देशों के क्रियान्वयन पर चीन के शैक्षणिक और नीति-निर्माण वृत्तों की नज़र रहेगी।