आंध्र प्रदेश में तीसरे-चौथे बच्चे पर ₹30,000–₹40,000 का प्रोत्साहन: चंद्रबाबू नायडू की जनसांख्यिकीय रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 17 मई 2026 को श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा के दौरान घोषणा की कि राज्य सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर ₹30,000 और चौथे बच्चे के जन्म पर ₹40,000 की वित्तीय सहायता देगी। यह घोषणा राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) के 1.5 के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुँचने की पृष्ठभूमि में की गई है, जो 2.1 के राष्ट्रीय प्रतिस्थापन स्तर से काफी नीचे है।
नीति में क्या बदला और क्यों
गौरतलब है कि 1995 से 2004 तक संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नायडू उस दौर में जनसंख्या नियंत्रण के प्रबल पक्षधर थे। अब वे सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संपत्ति है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश की औसत आयु 32.5 वर्ष है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 वर्ष है — यह अंतर दर्शाता है कि राज्य राष्ट्रीय गति से तेज़ बुजुर्ग होती आबादी की ओर बढ़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के पास 2040 तक ही जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद कार्यशील आबादी का अनुपात घटने और बुजुर्ग वर्ग का बोझ बढ़ने की आशंका है। राज्य की टीएफआर 1993 में 3.0 थी, जो तीन दशकों में घटकर 1.5 रह गई है।
फ्रांस-हंगरी मॉडल से प्रेरणा
अधिकारियों के अनुसार, दूसरे बच्चे से आगे के प्रोत्साहन फ्रांस और हंगरी जैसे देशों की नीतियों से प्रेरित हैं, जहाँ जनसांख्यिकीय संकट से निपटने के लिए इसी तरह के वित्तीय प्रोत्साहन लागू किए गए हैं। नायडू ने विधानसभा में कहा था कि यदि प्रजनन दर में और गिरावट आई तो कार्यशील आबादी सिकुड़ेगी और आर्थिक विकास प्रभावित होगा — एक स्थिति जो जापान, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों में पहले से देखी जा रही है।
जनसंख्या प्रबंधन नीति: पाँच-चरणीय ढाँचा
मार्च 2026 में नायडू सरकार ने देश की कथित तौर पर पहली 'जनसंख्या प्रबंधन नीति' पेश की। इसके तहत तीसरे बच्चे के लिए पाँच वर्षों तक प्रति माह ₹1,000 की पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है। इसके अलावा 12 महीने का मातृत्व अवकाश और दो महीने का पितृत्व अवकाश देने की भी योजना है।
नीति के तहत 'मातृत्व', 'शक्ति', 'क्षेम', 'नैपुण्यम' और 'संजीवनी' — इन पाँच चरणों वाली जीवनचक्र प्रणाली लागू की जाएगी, जो गर्भावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हर पड़ाव पर सरकारी सहायता सुनिश्चित करेगी।
आईवीएफ सेवाएँ और फर्टिलिटी कॉलेज
राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सचिव सौरभ गौर ने कहा कि आंध्र प्रदेश अब उसी चुनौती से जूझ रहा है जो कई विकसित देशों में गैर-कार्यशील आयु वर्ग की बढ़ती आबादी के रूप में सामने आई है। निःसंतान दंपतियों के लिए सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मॉडल के तहत आईवीएफ सेवाएँ उपलब्ध कराने की योजना है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रजनन चिकित्सा के लिए एक 'फर्टिलिटी कॉलेज' स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है।
व्यापक नीतिगत बदलाव और आगे की राह
नायडू सरकार ने पहले ही स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू दो-बच्चों की सीमा समाप्त कर दी है। 'स्वर्ण आंध्र विजन 2047' के अंतर्गत 'पदि सूत्रालु' (10 सूत्र) में जनसंख्या प्रबंधन और मानव संसाधन विकास को तीसरा प्रमुख सूत्र बनाया गया है। सरकार ने किशोरावस्था में गर्भधारण दर को मौजूदा 8.8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत से नीचे लाने और सिजेरियन डिलीवरी की संख्या कम करने का लक्ष्य भी तय किया है। आने वाले महीनों में इन नीतियों के क्रियान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट होगी।