16 अगस्त 2026
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आंध्र प्रदेश में तीसरे-चौथे बच्चे पर ₹30,000–₹40,000 का प्रोत्साहन: चंद्रबाबू नायडू की जनसांख्यिकीय रणनीति

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आंध्र प्रदेश में तीसरे-चौथे बच्चे पर ₹30,000–₹40,000 का प्रोत्साहन: चंद्रबाबू नायडू की जनसांख्यिकीय रणनीति

सारांश

आंध्र प्रदेश की टीएफआर 1.5 पर आ गई है — जापान और दक्षिण कोरिया की राह पर। चंद्रबाबू नायडू, जो कभी जनसंख्या नियंत्रण के हिमायती थे, अब तीसरे-चौथे बच्चे पर ₹30,000–₹40,000 दे रहे हैं। यह भारत में जनसांख्यिकीय संकट की पहली बड़ी राज्य-स्तरीय स्वीकृति है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 17 मई 2026 को तीसरे बच्चे पर ₹30,000 और चौथे बच्चे पर ₹40,000 के प्रोत्साहन की घोषणा की।
आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1993 में 3.0 से घटकर अब 1.5 रह गई है — प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से काफी नीचे।
राज्य की औसत आयु 32.5 वर्ष है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 वर्ष है; 2040 के बाद जनसांख्यिकीय लाभांश समाप्त होने की आशंका।
मार्च 2026 में पेश 'जनसंख्या प्रबंधन नीति' में तीसरे बच्चे के लिए ₹1,000/माह पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान।
सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए दो-बच्चों की सीमा पहले ही समाप्त कर दी है।
निःसंतान दंपतियों के लिए पीपीपी मॉडल पर सरकारी अस्पतालों में आईवीएफ सेवाएँ और ' फर्टिलिटी कॉलेज ' स्थापित करने की योजना।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 17 मई 2026 को श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा के दौरान घोषणा की कि राज्य सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर ₹30,000 और चौथे बच्चे के जन्म पर ₹40,000 की वित्तीय सहायता देगी। यह घोषणा राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) के 1.5 के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर पहुँचने की पृष्ठभूमि में की गई है, जो 2.1 के राष्ट्रीय प्रतिस्थापन स्तर से काफी नीचे है।

नीति में क्या बदला और क्यों

गौरतलब है कि 1995 से 2004 तक संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे नायडू उस दौर में जनसंख्या नियंत्रण के प्रबल पक्षधर थे। अब वे सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संपत्ति है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश की औसत आयु 32.5 वर्ष है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 वर्ष है — यह अंतर दर्शाता है कि राज्य राष्ट्रीय गति से तेज़ बुजुर्ग होती आबादी की ओर बढ़ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के पास 2040 तक ही जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद कार्यशील आबादी का अनुपात घटने और बुजुर्ग वर्ग का बोझ बढ़ने की आशंका है। राज्य की टीएफआर 1993 में 3.0 थी, जो तीन दशकों में घटकर 1.5 रह गई है।

फ्रांस-हंगरी मॉडल से प्रेरणा

अधिकारियों के अनुसार, दूसरे बच्चे से आगे के प्रोत्साहन फ्रांस और हंगरी जैसे देशों की नीतियों से प्रेरित हैं, जहाँ जनसांख्यिकीय संकट से निपटने के लिए इसी तरह के वित्तीय प्रोत्साहन लागू किए गए हैं। नायडू ने विधानसभा में कहा था कि यदि प्रजनन दर में और गिरावट आई तो कार्यशील आबादी सिकुड़ेगी और आर्थिक विकास प्रभावित होगा — एक स्थिति जो जापान, दक्षिण कोरिया और इटली जैसे देशों में पहले से देखी जा रही है।

जनसंख्या प्रबंधन नीति: पाँच-चरणीय ढाँचा

मार्च 2026 में नायडू सरकार ने देश की कथित तौर पर पहली 'जनसंख्या प्रबंधन नीति' पेश की। इसके तहत तीसरे बच्चे के लिए पाँच वर्षों तक प्रति माह ₹1,000 की पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है। इसके अलावा 12 महीने का मातृत्व अवकाश और दो महीने का पितृत्व अवकाश देने की भी योजना है।

नीति के तहत 'मातृत्व', 'शक्ति', 'क्षेम', 'नैपुण्यम' और 'संजीवनी' — इन पाँच चरणों वाली जीवनचक्र प्रणाली लागू की जाएगी, जो गर्भावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हर पड़ाव पर सरकारी सहायता सुनिश्चित करेगी।

आईवीएफ सेवाएँ और फर्टिलिटी कॉलेज

राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सचिव सौरभ गौर ने कहा कि आंध्र प्रदेश अब उसी चुनौती से जूझ रहा है जो कई विकसित देशों में गैर-कार्यशील आयु वर्ग की बढ़ती आबादी के रूप में सामने आई है। निःसंतान दंपतियों के लिए सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मॉडल के तहत आईवीएफ सेवाएँ उपलब्ध कराने की योजना है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रजनन चिकित्सा के लिए एक 'फर्टिलिटी कॉलेज' स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है।

व्यापक नीतिगत बदलाव और आगे की राह

नायडू सरकार ने पहले ही स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू दो-बच्चों की सीमा समाप्त कर दी है। 'स्वर्ण आंध्र विजन 2047' के अंतर्गत 'पदि सूत्रालु' (10 सूत्र) में जनसंख्या प्रबंधन और मानव संसाधन विकास को तीसरा प्रमुख सूत्र बनाया गया है। सरकार ने किशोरावस्था में गर्भधारण दर को मौजूदा 8.8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत से नीचे लाने और सिजेरियन डिलीवरी की संख्या कम करने का लक्ष्य भी तय किया है। आने वाले महीनों में इन नीतियों के क्रियान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा वित्तीय प्रोत्साहन की पर्याप्तता में है। ₹30,000–₹40,000 की एकमुश्त राशि उन परिवारों को तीसरा या चौथा बच्चा पालने के लिए प्रेरित करने के लिए पर्याप्त नहीं लगती, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की लागत लगातार बढ़ रही है। फ्रांस और हंगरी ने दशकों की निरंतर, बहुआयामी नीतियों के बाद भी टीएफआर में मामूली सुधार ही पाया है। इसके अलावा, यह नीति राज्य के दक्षिणी और उत्तरी जिलों के बीच मौजूद सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को नजरअंदाज करती है — जहाँ गरीब परिवारों पर इसका असर और जटिल हो सकता है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में तीसरे और चौथे बच्चे पर कितना प्रोत्साहन मिलेगा?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की घोषणा के अनुसार, तीसरे बच्चे के जन्म पर ₹30,000 और चौथे बच्चे के जन्म पर ₹40,000 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह घोषणा 17 मई 2026 को श्रीकाकुलम जिले में की गई।
आंध्र प्रदेश की प्रजनन दर इतनी कम क्यों हो गई है?
राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1993 में 3.0 से घटकर 2026 में 1.5 रह गई है, जो 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से काफी नीचे है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शहरीकरण, महिला शिक्षा और बदलती जीवनशैली इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
आंध्र प्रदेश की जनसंख्या प्रबंधन नीति में और क्या शामिल है?
मार्च 2026 में पेश इस नीति में तीसरे बच्चे के लिए पाँच वर्षों तक ₹1,000 प्रति माह पोषण सहायता, 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा, 12 महीने का मातृत्व अवकाश और दो महीने का पितृत्व अवकाश शामिल है। निःसंतान दंपतियों के लिए पीपीपी मॉडल पर आईवीएफ सेवाएँ और एक 'फर्टिलिटी कॉलेज' स्थापित करने की भी योजना है।
क्या आंध्र प्रदेश में दो-बच्चों की नीति अभी भी लागू है?
नहीं। नायडू सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए पहले से लागू दो-बच्चों की सीमा समाप्त कर दी है। यह जनसंख्या नियंत्रण से जनसंख्या स्थिरता की ओर नीतिगत बदलाव का हिस्सा है।
आंध्र प्रदेश 2040 तक जनसांख्यिकीय संकट में क्यों पड़ सकता है?
अधिकारियों के अनुसार, राज्य के पास 2040 तक ही जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद बुजुर्ग आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ेगा और कार्यशील आबादी सिकुड़ेगी, जिससे आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर दबाव बढ़ेगा — जैसा जापान और दक्षिण कोरिया में देखा गया है।
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