मकाऊ: पूर्व लोकतंत्र समर्थक सांसद आउ काम सैन को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में 12.5 साल की जेल
सारांश
मुख्य बातें
मकाऊ की एक अदालत ने पूर्व लोकतंत्र समर्थक सांसद आउ काम सैन को 7 नवंबर 2026 को 12.5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई — यह मकाऊ के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दर्ज पहला अभियोजन मामला है। अदालत ने उन्हें राज्य की राजनीतिक व्यवस्था के विरुद्ध साजिश रचने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कार्यों के लिए मकाऊ से बाहर स्थित संगठनों एवं व्यक्तियों से संपर्क बनाए रखने का दोषी पाया।
मामले का घटनाक्रम
अदालत के अनुसार, आउ ने लंबे समय तक विदेश स्थित कथित 'विरोधी संगठनों' को तस्वीरें और सूचनाएं जुटाने, तैयार करने और सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने में सहायता की। इन सामग्रियों में राज्य की राजनीतिक सत्ता के विरुद्ध संदेश शामिल बताए गए हैं। यह मुकदमा सितंबर 2026 में बंद कमरे में चला और मात्र तीन दिनों में समाप्त हो गया।
2025 में आउ की गिरफ्तारी 2009 में लागू हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत सार्वजनिक रूप से सामने आया पहला अभियोजन था। अदालत ने बंद सुनवाई का आदेश इस आधार पर दिया कि खुली कार्यवाही से राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
आउ काम सैन: कौन हैं ये नेता
69 वर्षीय आउ काम सैन के पास पुर्तगाल और मकाऊ दोनों की नागरिकता है। पेशे से शिक्षक रहे आउ बाद में राजनीति में आए और लगभग 20 वर्षों तक मकाऊ की विधानसभा में सांसद रहे — एक ऐसी विधानसभा जहाँ अधिकांश सदस्य बीजिंग-समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने 2021 में विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। वह 1989 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में हुए सैन्य दमन की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों के प्रमुख आयोजकों में भी शामिल रहे।
परिवार और समर्थकों के आरोप
आउ के परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद से उन्हें परिवार से संपर्क करने और अपनी पसंद के निजी वकील से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उनकी सहायता कर रहे संगठन जस्टिस एब्रॉड के निदेशक माइकल पोलाक ने इस सुनवाई को 'दिखावटी मुकदमा' करार दिया और कहा कि इससे मकाऊ की अंतरराष्ट्रीय छवि को गंभीर नुकसान पहुँचा है। पोलाक के अनुसार, आउ पर लगाए गए कथित आरोपों ने मकाऊ को उन देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है जहाँ सरकार विरोधियों को जेल भेज सकती है और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की पर्याप्त गारंटी नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि आउ के खिलाफ की गई यह कार्रवाई मकाऊ में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय रखने वाले लोगों के लिए भय का संदेश है। संगठन की उप-एशिया निदेशक माया वांग ने कहा कि लोकतंत्र समर्थक आवाजों को दबाने की यह कोशिश चीन सरकार द्वारा असहमति और बुनियादी स्वतंत्रता पर किए जा रहे व्यापक दबाव का हिस्सा प्रतीत होती है।
व्यापक संदर्भ: हांगकांग के बाद अब मकाऊ
आलोचकों का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में असहमति के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान अब मकाऊ तक पहुँच चुका है। गौरतलब है कि 1999 में चीन को सौंपे जाने के बाद से मकाऊ, हांगकांग की भाँति एक 'विशेष प्रशासनिक क्षेत्र' के रूप में कार्य करता है। यह मामला मकाऊ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के उपयोग को लेकर नई अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे रहा है।