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ब्रिक्स के बाद विश्व नेता बीमार पड़े? विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया के दावों को बताया भ्रामक

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ब्रिक्स के बाद विश्व नेता बीमार पड़े? विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया के दावों को बताया भ्रामक

सारांश

भारत में ब्रिक्स सम्मेलन के बाद विश्व नेता बीमार पड़े — यह दावा फर्जी है। विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक टीम ने एक्स पर फैल रहे कई भ्रामक पोस्ट उजागर किए, जिनमें रामाफोसा और शी जिनपिंग पर फूड पॉइजनिंग के बेबुनियाद आरोप लगाए गए थे।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय (MEA) की फैक्ट चेक टीम ने 17 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया के भ्रामक दावों के खिलाफ अलर्ट जारी किया।
दावे में कहा गया था कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन के बाद बीमार पड़े।
MEA फैक्ट चेक ने कम-से-कम 6 अकाउंट्स की पोस्टों को भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण करार दिया।
कुछ पोस्टों में 'ब्रिक्स के भोजन से फूड पॉइजनिंग' का निराधार दावा किया गया, जिसे मंत्रालय ने खारिज किया।
मंत्रालय ने नागरिकों को ऐसे भ्रामक सोशल मीडिया पोस्टों से सावधान रहने की अपील की।

विदेश मंत्रालय (MEA) की फैक्ट चेक टीम ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहे उन दावों को सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद कई विश्व नेता बीमार पड़ गए। मंत्रालय ने इन पोस्टों को 'भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण' करार देते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की।

किन दावों को बताया गया भ्रामक

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कई अकाउंट्स से पोस्ट किए गए इन दावों में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीमार पड़ने की बात कही गई थी। 'फर्स्ट स्क्वाक' नामक अकाउंट ने दावा किया कि बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार रामाफोसा सहित कई नेता ब्रिक्स सम्मेलन के बाद कथित तौर पर बीमार हुए, और शी जिनपिंग के बारे में रिपोर्टों की पुष्टि नहीं हुई।

'अनयूजुअल व्हेल्स' नामक अकाउंट ने भी इसी तर्ज पर दावा करते हुए लिखा कि रामाफोसा और कथित रूप से शी जिनपिंग सम्मेलन के बाद बीमार पड़े, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई। MEA फैक्ट चेक ने इन दोनों दावों को भ्रामक बताते हुए उन्हें उजागर किया।

फूड पॉइजनिंग के आरोप भी निराधार

'रॉ एग नेशनलिस्ट' नामक अकाउंट ने एक वीडियो के साथ दावा किया कि वे ब्रिक्स सम्मेलन के लिए तैयार किए गए उस भोजन का पहला वीडियो दिखा रहे हैं, जिसने कथित तौर पर शी जिनपिंग और रामाफोसा को बीमार कर दिया। इसी प्रकार 'डक्का-डक्का' नामक उपयोगकर्ता ने आरोप लगाया कि ब्रिक्स कार्यक्रम के दौरान कुछ नेताओं को फूड पॉइजनिंग हुई।

गौरतलब है कि ये सभी दावे बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के फैलाए गए थे। MEA फैक्ट चेक ने इन्हें स्पष्ट रूप से भ्रामक बताया।

और किन पोस्टों पर उठाए गए सवाल

'ब्रिक्स न्यूज' नामक एक्स अकाउंट ने दावा किया कि रामाफोसा ब्रिक्स सम्मेलन के बाद बीमार हो गए। 'इमैनुएल किमुताई मोटेलिन' की पोस्ट में भी ऐसे ही दावे किए गए। 'मैव्रिक' नाम के एक उपयोगकर्ता ने भारत से लौटे दो विश्व नेताओं की खराब सेहत को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की — जिसे भी मंत्रालय ने भ्रामक जानकारी फैलाने वाली पोस्टों का हिस्सा बताया।

विदेश मंत्रालय की चेतावनी

MEA फैक्ट चेक ने एक्स पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में लिखा, 'भ्रामक! लोगों को सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे दुर्भावनापूर्ण पोस्टों से सावधान रहना चाहिए।' मंत्रालय ने सभी उल्लिखित पोस्टों को एकत्रित कर सार्वजनिक रूप से उजागर किया — यह कदम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वाली झूठी सूचनाओं के खिलाफ सरकार के सक्रिय रुख को दर्शाता है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में ब्रिक्स की सफल मेज़बानी की है और देश की वैश्विक कूटनीतिक साख बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के भ्रामक अभियान बड़े राजनयिक आयोजनों के तुरंत बाद उभरते हैं और इनका उद्देश्य मेज़बान देश की विश्वसनीयता को कमज़ोर करना होता है। MEA से अपेक्षा है कि वह ऐसी भ्रामक पोस्टों की निगरानी जारी रखेगा और समय-समय पर नागरिकों को सचेत करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आम पाठक को गुमराह कर सकता है। MEA का सक्रिय हस्तक्षेप सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या केवल खंडन से इस गति को रोका जा सकता है — या इसके लिए प्लेटफॉर्म-स्तर पर जवाबदेही तय करने की ज़रूरत है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स सम्मेलन के बाद विश्व नेताओं के बीमार पड़ने का दावा क्या था?
सोशल मीडिया पर कई पोस्टों में दावा किया गया कि भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बीमार पड़ गए। कुछ पोस्टों में ब्रिक्स के भोजन से फूड पॉइजनिंग का भी दावा किया गया। विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक टीम ने इन सभी दावों को भ्रामक बताया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन दावों पर क्या कहा?
MEA फैक्ट चेक ने एक्स पर स्पष्ट किया कि ये पोस्टें 'भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण' हैं और नागरिकों को इनसे सावधान रहना चाहिए। मंत्रालय ने कम-से-कम छह अलग-अलग अकाउंट्स की पोस्टों को उजागर करते हुए उन्हें भ्रामक करार दिया।
क्या बीबीसी ने सच में यह रिपोर्ट की थी कि नेता बीमार पड़े?
नहीं। 'फर्स्ट स्क्वाक' अकाउंट ने बीबीसी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह दावा किया था, लेकिन MEA फैक्ट चेक ने इस पोस्ट को भ्रामक बताया। यह बीबीसी जैसे विश्वसनीय मीडिया संस्थान के नाम के दुरुपयोग का मामला है।
कौन-से अकाउंट्स ने ये भ्रामक दावे किए?
MEA फैक्ट चेक ने 'फर्स्ट स्क्वाक', 'अनयूजुअल व्हेल्स', 'रॉ एग नेशनलिस्ट', 'डक्का-डक्का', 'ब्रिक्स न्यूज', 'इमैनुएल किमुताई मोटेलिन' और 'मैव्रिक' जैसे एक्स अकाउंट्स की पोस्टों को भ्रामक बताया।
नागरिक सोशल मीडिया पर ऐसी फर्जी खबरों से कैसे बचें?
किसी भी सनसनीखेज दावे को शेयर करने से पहले सरकारी या आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करें। MEA फैक्ट चेक का एक्स अकाउंट ऐसी भ्रामक पोस्टों को नियमित रूप से उजागर करता है। बिना पुष्टि के वायरल खबरें फैलाना कानूनी और सामाजिक रूप से हानिकारक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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