ईरान में भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी का दावा फर्जी: MEA फैक्टचेक ने किया खंडन, पाकिस्तानी अकाउंट का हाथ उजागर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म MEA फैक्टचेक ने 17 अगस्त 2026 को उस वायरल दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि ईरानी अधिकारियों ने तेहरान के पास एक भारतीय नागरिक को संवेदनशील सैन्य स्थलों के जीपीएस निर्देशांक एकत्र करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण दावों पर विश्वास न करें और उन्हें आगे साझा करने से बचें।
क्या था वायरल दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कई पोस्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने एक भारतीय नागरिक को जासूसी के संदेह में हिरासत में लिया है। इन पोस्ट के साथ एक व्यक्ति की तस्वीर और कथित संवेदनशील सैन्य क्षेत्र की सैटेलाइट इमेज भी संलग्न की गई थी, ताकि दावे को विश्वसनीय दिखाया जा सके।
MEA फैक्टचेक ने इस संबंध में 4 पोस्ट साझा किए, जिनमें एक महत्वपूर्ण समानता सामने आई — सभी पोस्ट का टेक्स्ट लगभग एक जैसा था, यानी ये कट-पेस्ट शैली में फैलाई गई सामग्री थी। इसमें कोई मूल संपादकीय बदलाव नहीं किया गया था।
पाकिस्तानी अकाउंट का खुलासा
इन पोस्ट में से एक अकाउंट का नाम 'Pakistan Now' था। MEA फैक्टचेक के अनुसार, यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत-विरोधी अफवाहें फैलाने में पड़ोसी देश पाकिस्तान की भूमिका हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, पहले भी पाकिस्तान की ओर से इस तरह की भ्रामक सूचना अभियान चलाने की कोशिशें की जाती रही हैं।
व्यापक संदर्भ: क्यों है यह मामला गंभीर
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ईरान से जुड़ी सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहों की बाढ़ आई हुई है। किसी भारतीय नागरिक पर जासूसी जैसे गंभीर आरोप लगाने वाली बिना आधिकारिक पुष्टि की पोस्ट न केवल गलत सूचना फैलाती हैं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर डाल सकती हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी भारत-विरोधी दुष्प्रचार अभियान में फर्जी गिरफ्तारी या जासूसी के दावों का सहारा लिया गया हो।
MEA का रुख और नागरिकों के लिए अपील
भारत सरकार का विदेश मंत्रालय अपने आधिकारिक फैक्ट-चेक प्लेटफॉर्म के ज़रिए विदेश-संबंधित भ्रामक सूचनाओं का नियमित रूप से खंडन करता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे दावों को बिना जाँचे-परखे साझा करना सूचना-युद्ध (information warfare) को बढ़ावा देता है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि किसी भी संवेदनशील विदेश-नीति से जुड़ी खबर की पुष्टि MEA की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित सरकारी स्रोतों से करें।
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या ऐसे अकाउंट्स के विरुद्ध कोई कार्रवाई होती है और भारत-ईरान राजनयिक चैनलों के माध्यम से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक संवाद होता है।