बंगाल में ISI एजेंट वहाब आलम ने फर्जी आधार-पैन-EPIC से बनाया भारतीय पासपोर्ट का रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा से गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक वहाब आलम ने भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल करने के लिए सह-आरोपी मोहम्मद इजाज के पिता के नाम का इस्तेमाल किया था। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जाँच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आलम पर आरोप है कि उसे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने भारत के पूर्वी सेक्टर में सेना, नौसेना और रेलवे से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने का काम सौंपा था।
कैसे हासिल किए फर्जी दस्तावेज
जाँच अधिकारियों के अनुसार, 2012 में गैरकानूनी तरीके से भारत में प्रवेश करने के बाद आलम पूर्वी कोलकाता के टोपसिया में इजाज के घर पर लंबे समय तक रहा। इस दौरान उसने इजाज के पिता के दस्तावेजों का उपयोग करके अपने लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और EPIC कार्ड बनवा लिए। इन तीनों दस्तावेजों में इजाज के पिता को ही आलम का पिता दर्शाया गया था।
STF को मिली जानकारी के मुताबिक, आलम की अगली योजना इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने की थी — जो उसे एक वैध भारतीय नागरिक की तरह देश-विदेश में आवाजाही की छूट देता।
SIR प्रक्रिया ने खोली पोल
पश्चिम बंगाल में चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया ने आलम की साजिश को विफल कर दिया। 'लॉजिकल डिसक्रेपेंसी' (तार्किक विसंगति) की श्रेणी में आने पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने उसे पहचान सत्यापन के लिए सुनवाई में उपस्थित होने का नोटिस दिया। आलम सुनवाई से गायब हो गया और उत्तर 24 परगना के हाबरा भाग गया, जहाँ से STF ने उसे गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के समय वह बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर फरार होने की कोशिश में था।
नेपाल था साजिश की धुरी
जाँच से पता चला है कि नेपाल इस पूरे जासूसी नेटवर्क की एक अहम कड़ी था। आलम सबसे पहले 2012 में नेपाल के रास्ते ही भारत में दाखिल हुआ था, जहाँ एक मस्जिद में उसकी मुलाकात इजाज से हुई थी। हल्दिया में रहने के दौरान वह नेपाल में एक छोटे फ्रेंचाइजी कारोबार की आड़ में नियमित रूप से आता-जाता रहा।
अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में प्रवेश और ठहरने की पूरी रणनीति में नेपाल एक सुरक्षित पारगमन बिंदु के रूप में काम करता था।
सिम कार्ड से ISI हैंडलर्स से संपर्क
STF की जाँच में यह भी सामने आया है कि आलम ने अपने फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कई प्रीपेड मोबाइल सिम कार्ड हासिल किए थे। इन सिम कार्डों के ज़रिए वह पाकिस्तान में अपने ISI हैंडलर्स से संपर्क में रहता था।
जाँचकर्ताओं के मुताबिक, पकड़े जाने से बचने के लिए आलम कुछ बातचीत के बाद सिम कार्ड नष्ट कर देता था और नए सिम कार्ड ले लेता था — जो एक सुनियोजित जासूसी प्रोटोकॉल का संकेत है।
आगे क्या होगा
STF की जाँच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आलम ने भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे के बारे में कितनी और किस स्तर की जानकारी ISI को भेजी। सह-आरोपी मोहम्मद इजाज की भूमिका और उसके परिवार की जानकारी की जाँच भी की जा रही है। यह मामला उस व्यापक चिंता को रेखांकित करता है जो सीमावर्ती राज्यों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए घुसपैठियों के नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को है।