मुंबई एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार: फर्जी आधार-पैन से बनवाया था भारतीय पासपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 27 जुलाई को इमिग्रेशन जाँच के दौरान बाबू बिस्वास उर्फ तपस बिस्वास नामक 36 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया। आरोपी कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेजों के आधार पर बनवाए गए भारतीय पासपोर्ट का उपयोग कर कोलंबो से लौट रहा था। पुलिस के अनुसार, वह 2016 से अवैध रूप से भारत में रह रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
आरोपी कोलंबो से उड़ान भरकर मुंबई एयरपोर्ट पहुँचा और इमिग्रेशन काउंटर पर पासपोर्ट पर स्टांप लगवाने की कोशिश की। सहायक इमिग्रेशन अधिकारी को उसके पासपोर्ट में कुछ संदिग्ध लगा, जिसके बाद पूछताछ शुरू की गई। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उसे इमिग्रेशन विंग के प्रभारी और ड्यूटी अधिकारियों के सामने पेश किया गया।
पहचान का खुलासा कैसे हुआ
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपनी पत्नी को व्हाट्सएप पर कॉल किया और उससे बांग्लादेशी नागरिकता के प्रमाण के रूप में दस्तावेज भेजने को कहा। इसके बाद उसे बाबू बिस्वास के पिता के नाम पर बांग्लादेश में पंजीकृत ज़मीन के दस्तावेजों की फोटोकॉपी प्राप्त हुई। इससे यह पुष्टि हो गई कि वह बांग्लादेश के फरीदपुर का मूल निवासी है।
फर्जी दस्तावेजों की पूरी कहानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विश्वास ने स्वीकार किया कि वह 2016 में अपने परिवार के साथ बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। वह पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में रहा और मज़दूर के रूप में काम किया। वहाँ रहते हुए उसने एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाए।
इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने 2019 में कोलकाता के पासपोर्ट कार्यालय से भारतीय पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। इस पासपोर्ट का उपयोग करते हुए उसने 2023 में मालदीव की दो यात्राएँ कीं और कोलंबो भी गया।
आम जनता पर असर
यह मामला उस व्यापक चिंता को उजागर करता है जो फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए भारतीय नागरिकता और पासपोर्ट हासिल करने की घटनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में बनी हुई है। गौरतलब है कि आरोपी ने न केवल आधार और पैन बनवाए, बल्कि इन्हीं के आधार पर विदेश यात्रा भी की — जो दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।
क्या होगा आगे
मुंबई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, उस स्थानीय व्यक्ति की भी तलाश की जा रही है जिसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद की थी।