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मुंबई एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी घुसपैठिया गिरफ्तार: फर्जी आधार-पैन से बनवाया था भारतीय पासपोर्ट, 2016 से था देश में

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मुंबई एयरपोर्ट पर बांग्लादेशी घुसपैठिया गिरफ्तार: फर्जी आधार-पैन से बनवाया था भारतीय पासपोर्ट, 2016 से था देश में

सारांश

नौ साल तक भारत में छुपा रहा एक बांग्लादेशी नागरिक आखिरकार मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया — वह भी तब, जब उसके बोलने के लहजे ने एक आव्रजन अधिकारी को चौकन्ना कर दिया। फर्जी आधार, पैन और पासपोर्ट के ज़रिए वह मालदीव और कोलंबो तक घूम आया था।

मुख्य बातें

बाबू बिस्वास उर्फ तपस बिस्वास , 36 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक, को 27 जुलाई को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया।
आरोपी 2016 में पश्चिम बंगाल सीमा से अवैध रूप से भारत में घुसा था और नदिया जिले में बस गया था।
उसने फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाकर 2019 में कोलकाता पासपोर्ट कार्यालय से भारतीय पासपोर्ट हासिल किया।
2023 में इसी पासपोर्ट से दो बार मालदीव और एक बार कोलंबो की यात्रा की — बिना किसी जाँच के।
पुलिस अब फर्जी दस्तावेज नेटवर्क में शामिल एजेंटों और गिरोह की पहचान कर रही है।
मुंबई अपराध शाखा पहले ही 53 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।

मुंबई पुलिस ने छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 27 जुलाई को एक 36 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया, जो फर्जी तरीके से हासिल किए गए भारतीय पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था। आरोपी की पहचान बाबू बिस्वास उर्फ तपस बिस्वास के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बांग्लादेश के फरीदपुर जिले का निवासी है।

कैसे हुई पहचान

आरोपी श्रीलंकाई एयरलाइंस की उड़ान संख्या यूएल-141 से कोलंबो से मुंबई पहुँचा था। काउंटर नंबर 23 पर तैनात सहायक आव्रजन अधिकारी को उसके बोलने के लहजे में बांग्लादेशी उच्चारण का संदेह हुआ। अधिकारी ने कहा, 'भारतीय पासपोर्ट की जाँच के दौरान मुझे शक हुआ कि यात्री बांग्लादेश का रहने वाला है। मैंने उससे कुछ सवाल पूछे, लेकिन वह उनका संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।' इसके बाद उसे विस्तृत पूछताछ के लिए आव्रजन शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पेश किया गया।

दस्तावेज़ों ने खोली पोल

पूछताछ के दौरान बिस्वास ने अपनी पत्नी से व्हाट्सएप पर संपर्क कर पहचान से जुड़े दस्तावेज भेजने को कहा। पत्नी ने बांग्लादेश में बिस्वास के पिता के नाम पर दर्ज जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज भेजे, जिनसे उसकी बांग्लादेशी नागरिकता की पुष्टि हो गई। इसके बाद आरोपी ने स्वयं स्वीकार किया कि वह वर्ष 2016 में अपनी पत्नी और परिवार के साथ पश्चिम बंगाल की सीमा से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था।

फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, बिस्वास पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में बस गया और करीब सात साल तक कोलकाता में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करता रहा। इस दौरान उसने एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे भारतीय पहचान दस्तावेज बनवाए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने वर्ष 2019 में कोलकाता पासपोर्ट कार्यालय से भारतीय पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। जाँच में यह भी सामने आया कि उसने इस पासपोर्ट का उपयोग कर वर्ष 2023 में दो बार मालदीव और कम से कम एक बार कोलंबो की यात्रा की — और किसी को संदेह नहीं हुआ।

जाँच का दायरा

सहार पुलिस थाने के अधिकारियों ने बताया कि अब जाँच उन एजेंटों और गिरोह पर केंद्रित है, जिन्होंने आरोपी को फर्जी पहचान दस्तावेज बनवाने में मदद की। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह मामला अकेला नहीं है — मुंबई अपराध शाखा ने हाल ही में शहर के अलग-अलग इलाकों में चलाए गए अभियानों के दौरान पकड़े गए 53 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।

व्यापक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए भारतीय नागरिकता हासिल करने के मामले देशभर में बढ़ते जा रहे हैं। आव्रजन अधिकारियों की सतर्कता और भाषाई पहचान ने इस बार एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा जो करीब नौ साल तक भारतीय तंत्र की नज़रों से बचता रहा। पुलिस इस मामले की आगे की जाँच जारी रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पैन और पासपोर्ट को 'पहचान की अंतिम कड़ी' मानता है। बिस्वास ने न केवल भारतीय दस्तावेज हासिल किए, बल्कि उन्हीं से विदेश यात्राएँ भी कीं — और सिस्टम को वर्षों तक भनक तक नहीं लगी। असली सवाल यह है कि कोलकाता पासपोर्ट कार्यालय में सत्यापन की कौन-सी खामी ने 2019 में इसे संभव बनाया, और क्या यह अकेला मामला है। मुंबई में 53 अन्य अवैध नागरिकों की मौजूदगी बताती है कि यह समस्या छिटपुट नहीं, बल्कि संरचनात्मक है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक कौन है?
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान बाबू बिस्वास उर्फ तपस बिस्वास के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बांग्लादेश के फरीदपुर जिले का 36 वर्षीय निवासी है। वह 2016 से भारत में अवैध रूप से रह रहा था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल भारतीय पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था।
बिस्वास ने भारतीय पासपोर्ट कैसे हासिल किया?
पुलिस के अनुसार, बिस्वास ने पश्चिम बंगाल में एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने 2019 में कोलकाता पासपोर्ट कार्यालय से भारतीय पासपोर्ट भी हासिल कर लिया।
आव्रजन अधिकारियों को उस पर संदेह कैसे हुआ?
काउंटर नंबर 23 पर तैनात सहायक आव्रजन अधिकारी को बिस्वास के बोलने के लहजे में बांग्लादेशी उच्चारण का संदेह हुआ। जब उससे सवाल पूछे गए तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, और बाद में उसकी पत्नी द्वारा व्हाट्सएप पर भेजे गए बांग्लादेशी जमीन के दस्तावेजों ने उसकी पहचान की पुष्टि कर दी।
क्या बिस्वास ने इस पासपोर्ट से विदेश यात्राएँ की थीं?
हाँ, जाँच में सामने आया कि बिस्वास ने 2023 में इसी फर्जी भारतीय पासपोर्ट का उपयोग कर दो बार मालदीव और कम से कम एक बार कोलंबो की यात्रा की थी। इन यात्राओं के दौरान किसी भी आव्रजन चौकी पर उस पर संदेह नहीं हुआ।
इस मामले में पुलिस आगे क्या कर रही है?
सहार पुलिस थाना और मुंबई अपराध शाखा अब उन एजेंटों और गिरोह की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने बिस्वास को फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद की। इसके अलावा मुंबई अपराध शाखा पहले ही शहर में पकड़े गए 53 अन्य अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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