गांधी जयंती 2026: प्रयागराज के अनिल गुप्ता की अनोखी प्रदर्शनी में 400+ दुर्लभ टिकट और ऐतिहासिक संग्रह
सारांश
मुख्य बातें
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर 2 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के निवासी अनिल गुप्ता ने एक अनूठी प्रदर्शनी आयोजित की, जिसमें दशकों में जुटाए गए महात्मा गांधी से जुड़े दुर्लभ डाक टिकट, बैंक नोट, सिक्के और ऐतिहासिक दस्तावेज़ प्रदर्शित किए गए। इस संग्रह को देखने के लिए बड़ी संख्या में नागरिक उमड़ पड़े, और अनिल गुप्ता को स्थानीय लोगों ने 'गांधी जी का अनोखा प्रेमी' की उपाधि दे दी है।
संग्रह में क्या है खास
अनिल गुप्ता के इस असाधारण संग्रह में 400 से अधिक महात्मा गांधी से संबंधित डाक टिकट शामिल हैं। इनमें 1948 में जारी गांधी जी की पहली डाक टिकट विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अलावा संग्रह में बैंक नोट, स्मारक सिक्के और गांधी जी के बचपन से लेकर उनके स्कूली जीवन तक से जुड़ी दुर्लभ सामग्री भी मौजूद है।
संग्रह की व्यापकता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें ईरान, ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों द्वारा जारी किए गए पोस्टल कवर भी शामिल हैं — यह दर्शाता है कि गांधी जी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा।
अनिल गुप्ता का समर्पण
अनिल गुप्ता ने बताया, 'मेरा टिकट संग्रह का शौक शुरुआत से रहा है। समाज में एक-दूसरे से संपर्क रहे और मैंने चीजों को सहेजकर रखना शुरू किया। हम लोग डाक टिकट मंगाते रहे और उन्हें इकट्ठा करते रहे। मेरे पास अभी महात्मा गांधी से जुड़े हुए 400 से अधिक टिकट और उनके बचपन से लेकर स्कूल तक की चीजों को इकट्ठा किया।'
उन्होंने आगे कहा कि बचपन से ही गांधी जी के जीवन और अहिंसा के दर्शन को पढ़ते आए हैं। 'स्कूलों में भी बताया जाता था कि कैसे अहिंसा से भी क्रांति होती है और क्यों अहिंसा ज़रूरी है।' उनके इस समर्पण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल चुकी है।
आगंतुकों की प्रतिक्रिया
प्रदर्शनी में पहुँचीं कोमल ने कहा, 'यहाँ बहुत सारी चीज़ें रखी हैं और बहुत कुछ सीखने को मिला है। मैंने महात्मा गांधी के बारे में स्कूल के समय पढ़ा था, लेकिन उसके बाद चीज़ें छूट गईं। अभी यहाँ चीज़ों को देखकर काफ़ी अच्छा भी लग रहा है।' यह प्रतिक्रिया बताती है कि प्रदर्शनी न केवल इतिहास प्रेमियों, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी गांधी जी की विरासत को पुनर्जीवित करने का माध्यम बन रही है।
गांधी विरासत का वैश्विक आयाम
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गांधी जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि प्रयागराज का गांधी जी के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है — स्वतंत्रता आंदोलन के कई महत्वपूर्ण क्षणों की यह धरती गवाह रही है। अनिल गुप्ता जैसे संग्रहकर्ताओं का प्रयास न केवल व्यक्तिगत जुनून है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्मृति को जीवित रखने की एक सामाजिक ज़िम्मेदारी भी है।
आने वाले दिनों में यह प्रदर्शनी और अधिक लोगों को गांधी जी के विचारों और जीवन से परिचित कराने का मंच बनती रहेगी।