6 अगस्त 2026
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हिरोशिमा की 81वीं बरसी पर मेदवेदेव का जापान पर निशाना: परमाणु हमलावर का नाम न लेना शर्मनाक

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हिरोशिमा की 81वीं बरसी पर मेदवेदेव का जापान पर निशाना: परमाणु हमलावर का नाम न लेना शर्मनाक

सारांश

हिरोशिमा की 81वीं बरसी पर रूस के मेदवेदेव ने जापान को आईना दिखाया — परमाणु हमलावर का नाम न लेना 'शर्मनाक' करार दिया। 1945 में अमेरिकी बमों से 1.4 लाख मौतें हुई थीं। हिरोशिमा के मेयर ने नई पीढ़ी से परमाणु उन्मूलन का आह्वान किया।

मुख्य बातें

रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने 6 अगस्त 2026 को एक्स पर जापान की आलोचना की।
मेदवेदेव ने कहा कि जापानी अधिकारियों ने हिरोशिमा-नागासाकी बरसी पर परमाणु हमले के लिए जिम्मेदार देश का नाम नहीं लिया।
6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था; 1945 के अंत तक लगभग 1.4 लाख लोगों की मौत हुई।
तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया, जिससे हजारों और लोग मारे गए।
हिरोशिमा के मेयर काजुमी मात्सुई ने 'पीस डिक्लेरेशन' जारी कर हिबाकुशा की घटती संख्या के बीच नई पीढ़ी से परमाणु उन्मूलन का आह्वान किया।

रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने 6 अगस्त 2026 को हिरोशिमा परमाणु बम हमले की 81वीं बरसी के अवसर पर जापान की तीखी आलोचना की। मेदवेदेव ने कहा कि जापानी नेताओं ने इस खौफनाक त्रासदी को याद करते हुए एक बार भी उन लोगों का नाम नहीं लिया जिन्होंने ये हमले किए थे।

मेदवेदेव की एक्स पोस्ट: सीधा आरोप

मेदवेदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु बम हमलों को याद करते समय जापान के प्रधानमंत्री या किसी अन्य जापानी अधिकारी ने एक बार भी यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि ये हमले किसने किए थे। यह वाकई शर्म की बात है।' उन्होंने यह भी कहा कि जापान अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर है और एक दिन वह एक 'रोनिन' — यानी बिना संरक्षक के अकेले रह जाने वाले व्यक्ति — की स्थिति में पहुँच जाएगा।

हिरोशिमा और नागासाकी: इतिहास का वह काला अध्याय

6 अगस्त 1945 को अमेरिकी बमवर्षक विमान से गिराया गया परमाणु बम हिरोशिमा के ऊपर फटा था। इस हमले में वर्ष 1945 के अंत तक लगभग 1.4 लाख लोगों की मौत हो गई थी। हिरोशिमा हमले के ठीक तीन दिन बाद अमेरिका ने नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया, जिससे हजारों और लोगों की जान गई और व्यापक तबाही हुई। यह द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण की सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक थी।

हिरोशिमा में श्रद्धांजलि समारोह

हिरोशिमा के पीस मेमोरियल पार्क में आयोजित वार्षिक श्रद्धांजलि समारोह में मेयर काजुमी मात्सुई ने 'पीस डिक्लेरेशन' जारी करते हुए परमाणु हथियारों के विनाशकारी परिणामों पर गहरी चिंता जताई। मात्सुई ने कहा कि परमाणु हथियारों की क्रूरता को कमतर आँकना और अपने हितों के लिए बल प्रयोग को स्वीकार करना हिंसा और प्रतिशोध के ऐसे दुष्चक्र को जन्म दे सकता है, जो अंततः दुनिया को फिर किसी हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी की ओर धकेल सकता है।

हिबाकुशा की घटती संख्या और नई पीढ़ी की जिम्मेदारी

मेयर मात्सुई ने यह भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे परमाणु हमले के जीवित बचे लोगों — जिन्हें जापानी में हिबाकुशा कहा जाता है — की संख्या घट रही है, नई पीढ़ी को आगे आकर परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए व्यापक जनसमर्थन तैयार करना होगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण की बहस फिर से तेज हो रही है।

आगे क्या

मेदवेदेव की यह टिप्पणी रूस-जापान संबंधों की पहले से तनावपूर्ण पृष्ठभूमि में आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान वैश्विक परमाणु विमर्श को और जटिल बना सकते हैं, खासकर तब जब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा प्रक्रिया जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल मकसद अमेरिका-जापान गठबंधन को कमजोर करना है। विडंबना यह है कि रूस खुद परमाणु हथियारों के विस्तार और यूक्रेन संघर्ष में उनके उपयोग की धमकी देने वाला देश है, जो इस 'नैतिक' आलोचना को खोखला बनाता है। जापान की चुप्पी निश्चित रूप से एक वैध बहस का विषय है, लेकिन वह बहस मेदवेदेव के एजेंडे से नहीं, बल्कि स्वतंत्र ऐतिहासिक विमर्श से होनी चाहिए। हिबाकुशा की घटती संख्या के साथ यह सवाल और भी जरूरी हो जाता है कि दुनिया परमाणु जवाबदेही को किस तरह परिभाषित करती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिमित्री मेदवेदेव ने जापान की आलोचना क्यों की?
मेदवेदेव ने आलोचना की क्योंकि हिरोशिमा-नागासाकी की 81वीं बरसी पर जापान के प्रधानमंत्री या किसी अधिकारी ने परमाणु हमले के लिए जिम्मेदार देश — अमेरिका — का नाम नहीं लिया। उन्होंने इसे 'शर्म की बात' बताया।
हिरोशिमा पर परमाणु बम कब और किसने गिराया था?
6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। इस हमले में 1945 के अंत तक लगभग 1.4 लाख लोगों की मौत हुई थी। तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया।
हिरोशिमा की 81वीं बरसी पर क्या हुआ?
हिरोशिमा के पीस मेमोरियल पार्क में वार्षिक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ। मेयर काजुमी मात्सुई ने 'पीस डिक्लेरेशन' जारी कर परमाणु हथियारों के खतरे और हिबाकुशा की घटती संख्या पर चिंता जताई।
हिबाकुशा कौन होते हैं?
हिबाकुशा जापानी शब्द है जिसका अर्थ है परमाणु बम हमले में जीवित बचे लोग। इनकी संख्या लगातार घट रही है और मेयर मात्सुई ने नई पीढ़ी से इनकी विरासत को आगे ले जाने का आह्वान किया।
मेदवेदेव ने जापान को 'रोनिन' क्यों कहा?
मेदवेदेव ने कहा कि जापान अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर है और एक दिन 'रोनिन' — यानी बिना संरक्षक के अकेले रह जाने वाला — बन जाएगा। यह जापान-अमेरिका गठबंधन पर उनकी व्यापक आलोचना का हिस्सा था।
राष्ट्र प्रेस
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