हिरोशिमा परमाणु हमले की 81वीं बरसी: मेयर मात्सुई का निरस्त्रीकरण का आह्वान, जापान के गैर-परमाणु सिद्धांतों पर बहस तेज
सारांश
मुख्य बातें
हिरोशिमा में 6 अगस्त 2025 को परमाणु बम हमले की 81वीं वर्षगाँठ पर पीस मेमोरियल पार्क में आयोजित समारोह में वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की अपील की गई। हिरोशिमा के मेयर काजुमी मात्सुई ने 'पीस डिक्लेरेशन' जारी करते हुए चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों की विनाशकारी शक्ति को कमतर आँकना दुनिया को एक और हिरोशिमा की ओर धकेल सकता है। यह समारोह ऐसे समय में हुआ जब जापान के भीतर ही दशकों पुराने गैर-परमाणु सिद्धांतों पर पुनर्विचार की माँग उठ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय समयानुसार सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर ठीक दो मिनट का मौन रखा गया — यही वह क्षण था जब 6 अगस्त 1945 को अमेरिकी बमवर्षक विमान से गिराया गया परमाणु बम हिरोशिमा के ऊपर विस्फोटित हुआ था। इस हमले में 1945 के अंत तक लगभग 1.4 लाख लोगों की मौत हो गई थी। तीन दिन बाद अमेरिका ने नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया, जिससे हजारों और लोगों की जान गई।
मेयर मात्सुई का पीस डिक्लेरेशन
मेयर काजुमी मात्सुई ने अपने संबोधन में कहा कि परमाणु हथियारों की क्रूरता को नकारना और स्वार्थ के लिए बल-प्रयोग को स्वीकार करना हिंसा और प्रतिशोध का ऐसा दुष्चक्र पैदा कर सकता है, जो अंततः दुनिया को फिर किसी हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी की ओर ले जाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे परमाणु हमले के जीवित बचे लोगों — हिबाकुशा — की संख्या घट रही है, नई पीढ़ी को आगे आकर परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए व्यापक जनसमर्थन तैयार करना होगा।
जापान के गैर-परमाणु सिद्धांतों पर उठते सवाल
परमाणु हमलों का दंश झेलने वाला दुनिया का इकलौता देश जापान लंबे समय से अपने 'तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों' का पालन करता रहा है — न परमाणु हथियार रखना, न उनका निर्माण करना, और न ही उन्हें अपने क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देना। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में इन सिद्धांतों में बदलाव की माँग तेज हुई है, विशेषकर सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ वर्गों में।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की सरकार जापान में परमाणु हथियारों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले सिद्धांत की समीक्षा पर विचार कर रही है। इस संभावना ने जापानी समाज के विभिन्न वर्गों में गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है।
स्थानीय विधानसभाओं का विरोध
टोक्यो शिंबुन ने बुधवार को एक रिपोर्ट में बताया कि अक्टूबर 2025 में ताकाइची के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश के 36 प्रांतों की 128 स्थानीय विधानसभाओं ने जापानी संसद (डाइट) को लिखित प्रस्ताव भेजकर सरकार से तीनों गैर-परमाणु सिद्धांतों को यथावत बनाए रखने की माँग की है। यह आँकड़ा अब तक का सर्वाधिक बताया जा रहा है।
आगे क्या
हिरोशिमा की यह बरसी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक परमाणु तनाव बढ़ रहा है और जापान की घरेलू सुरक्षा नीति पर बहस गहरी हो रही है। हिबाकुशा की घटती संख्या और नई पीढ़ी के बीच प्रत्यक्ष स्मृति के क्षीण होने के साथ, परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में वैश्विक राजनीतिक इच्छाशक्ति का परीक्षण आने वाले वर्षों में और कठिन होता जाएगा।