जापान के PM कार्यालय ने JIP को गैर-परमाणु सिद्धांतों की समीक्षा पर 'एक कदम आगे' बढ़ने को कहा
सारांश
मुख्य बातें
जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) को देश के दशकों पुराने तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों की समीक्षा की माँग को लेकर 'एक कदम और आगे बढ़ने' का सुझाव दिया है। यह घटनाक्रम 19 अगस्त को सामने आया, जब मेनिची शिंबुन ने JIP के एक सूत्र के हवाले से इस अंदरूनी संवाद का खुलासा किया।
तीन गैर-परमाणु सिद्धांत क्या हैं
जापान के तीन गैर-परमाणु सिद्धांत देश को परमाणु हथियार न रखने, न बनाने और न लाने की अनुमति देने से रोकते हैं। ये सिद्धांत हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी के बाद जापान की शांतिवादी विदेश नीति की नींव बने हुए हैं। इस साल जून में, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के गठबंधन में सबसे छोटे सहयोगी दल JIP ने प्रधानमंत्री साने ताकाइची को एक प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें देश के तीन प्रमुख सुरक्षा दस्तावेज़ों में संशोधन की माँग की गई थी।
प्रस्ताव में क्या था
JIP के प्रस्ताव में 'परमाणु हथियार न लाने की अनुमति देने' वाले सिद्धांत की 'यथार्थवादी समीक्षा' करने की बात कही गई थी। साथ ही, अमेरिका के 'विस्तारित परमाणु सुरक्षा कवच' (Extended Nuclear Deterrence) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वाशिंगटन के साथ सक्रिय परामर्श और ज़रूरी कदम उठाने का सुझाव दिया गया था। मेनिची शिंबुन के अनुसार, JIP के एक सूत्र ने कहा, 'एलडीपी पर हर तरह के बोझ हैं, और कुछ बातें ऐसी हैं जो वह खुद नहीं कह पा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि हम चाहते हैं कि आप एक कदम और आगे बढ़ें।'
पर्दे के पीछे की तैयारी
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव पेश करने से पहले JIP के कई वरिष्ठ नेताओं ने — जिनमें सह-प्रतिनिधि फुमिताके फुजिता भी शामिल थे — रक्षा मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी काज़ुहिसा शिमाडा और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के पूर्व प्रमुख कियोफुमी इवाता के साथ गुप्त बैठकें कीं। उल्लेखनीय है कि प्रस्ताव में शिमाडा के विचारों को लगभग हूबहू अपनाया गया। मेनिची शिंबुन ने यह भी बताया कि प्रस्ताव तैयार करते समय JIP ने मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा और सुरक्षा नीति पर PM के विशिष्ट सलाहकार सदामासा ओउए सहित प्रधानमंत्री के करीबी लोगों से निरंतर संपर्क बनाए रखा।
अमेरिकी मिसाइल की भूमिका
मेनिची शिंबुन के अनुसार, इस समीक्षा माँग के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका की नई समुद्र-आधारित परमाणु क्रूज मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक बताई जाती है। इस मिसाइल को 2032 के बाद तैनात किया जाना है। ये युद्धपोत जापान के आसपास के जलक्षेत्र में गश्त कर सकते हैं और योकोसुका स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर भी ठहर सकते हैं। गौरतलब है कि स्वयं प्रधानमंत्री ताकाइची ने पद संभालने से पहले संकेत दिए थे कि वे 'परमाणु हथियार न लाने' वाले सिद्धांत में बदलाव की पक्षधर हैं।
आगे क्या होगा
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब जापान अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुज़र रहा है — रक्षा बजट बढ़ाने से लेकर 'काउंटर-स्ट्राइक क्षमता' अपनाने तक। विशेषज्ञों का मानना है कि गैर-परमाणु सिद्धांतों पर कोई भी आधिकारिक बदलाव जापान की संसद और जनमत में तीखी बहस छेड़ेगा। फिलहाल सरकार ने इस मुद्दे पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।