नागासाकी बमबारी की 81वीं बरसी: रूसी प्रवक्ता जाखारोवा का तकाइची पर हमला, 'अमेरिका का नाम लेने की हिम्मत नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने 9 अगस्त 2025 को जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची पर तीखा हमला बोला और कहा कि तकाइची में यह स्वीकार करने का साहस नहीं है कि 81 साल पहले जापान पर परमाणु बम किसने गिराया था। नागासाकी परमाणु बमबारी की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित स्मृति समारोह में प्रधानमंत्री तकाइची ने अमेरिका का नाम लेने से परहेज किया, जिस पर रूस ने कड़ी आपत्ति जताई।
जाखारोवा की तीखी टिप्पणी
जाखारोवा ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा, 'क्या जापान का मौजूदा नेतृत्व यह मानता है कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु यूएफओ गिरा गए थे?' उन्होंने इसके विपरीत नागासाकी के मेयर शिरो सुजुकी की प्रशंसा की, जिन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बम एक 'अमेरिकी सैन्य विमान' की ओर से गिराया गया था। जाखारोवा के अनुसार, जापान के शीर्ष नेतृत्व और मेयर के बयानों के बीच यह विरोधाभास उल्लेखनीय है।
हिरोशिमा समारोह में भी यही रुख
जाखारोवा ने यह भी बताया कि नागासाकी दिवस से तीन दिन पहले, हिरोशिमा परमाणु बमबारी की वर्षगांठ पर आयोजित स्मृति समारोह में भी हिरोशिमा के मेयर काजुमी मात्सुई और प्रधानमंत्री तकाइची ने उस देश का नाम नहीं लिया जिसने शहर पर परमाणु हमला किया था। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अपने संदेश में अमेरिका का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।
मेदवेदेव की आलोचना
रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जापान की आलोचना की। उन्होंने लिखा, 'हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु बम हमलों को याद करते समय जापान के प्रधानमंत्री या किसी अन्य जापानी अधिकारी ने एक बार भी यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि ये हमले किसने किए थे। यह वाकई शर्म की बात है।' मेदवेदेव ने यह भी कहा कि जापान अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर है और किसी समय वह एक 'रोनिन' — यानी बिना संरक्षक के एकाकी व्यक्ति — की तरह हो जाएगा।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब जापान-अमेरिका सुरक्षा संधि और जापान की विदेश नीति पर वैश्विक बहस तेज है। गौरतलब है कि जापान अमेरिकी सुरक्षा छत्र के तहत अपनी रक्षा नीति संचालित करता है, जिसके कारण आलोचकों का कहना है कि टोक्यो के लिए वाशिंगटन की ऐतिहासिक जिम्मेदारी को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करना राजनयिक दृष्टि से संवेदनशील है। रूस की यह प्रतिक्रिया मॉस्को की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें वह पश्चिमी गठबंधन में दरारें उजागर करने की कोशिश करता है।
आगे क्या
जापान सरकार की ओर से रूसी टिप्पणियों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद परमाणु निरस्त्रीकरण की वैश्विक बहस और जापान की 'शांतिवादी कूटनीति' की सीमाओं पर नए सिरे से ध्यान खींचेगा।