नासा का मूनफॉल ड्रोन मिशन 2028: चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लूनर ड्रोन और रोबोटिक रोवर होंगे तैनात
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने चांद पर मानव उपस्थिति को दीर्घकालिक और स्थायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने 27 मई 2026 को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में स्वायत्त लूनर ड्रोन, रोबोटिक रोवर और सुदृढ़ संचार नेटवर्क तैनात करने की विस्तृत योजनाएँ सार्वजनिक कीं। नासा मुख्यालय में आयोजित मून बेस कार्यक्रम की ब्रीफिंग में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब लक्ष्य केवल चंद्रमा पर उतरना नहीं, बल्कि वहाँ एक स्थायी परिचालन ढाँचा खड़ा करना है।
मूनफॉल ड्रोन मिशन: मुख्य घटनाक्रम
इस पूरी रणनीति की धुरी है — मूनफॉल ड्रोन मिशन। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) इन ड्रोन्स का निर्माण कर रही है, जबकि फायरफ्लाई एयरोस्पेस को वाहक यान विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मिशन को 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ये ड्रोन दक्षिणी ध्रुव के उन गहरे क्रेटर्स की पड़ताल करेंगे जहाँ सूर्य की रोशनी कभी नहीं पहुँचती। इनका काम होगा — पानी की बर्फ की खोज, हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग, सेंटीमीटर-स्तरीय सटीकता से मानचित्रण, और भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षित लैंडिंग साइट की पहचान।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मून बेस प्रोग्राम के कार्यकारी कार्लोस गार्सिया गोलान ने बताया, 'ये ड्रोन हमें चांद के गहरे इलाकों की पड़ताल करने और वहाँ की वास्तविक स्थिति जानने में मदद करेंगे।' नासा प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने इसे अंतरिक्ष अन्वेषण में बड़े बदलाव का हिस्सा बताते हुए कहा कि नासा पूर्ण दक्षता और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इन मिशनों को अंजाम दे रहा है।
भविष्य के मून बेस की संरचना
नासा के अनुसार, भावी मून बेस किसी छोटे स्टेशन की तरह नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्ग मील में फैले एक शहर जैसा होगा। रहने की इकाइयाँ ऊँची चोटियों पर बनाई जाएंगी जहाँ सौर ऊर्जा उपलब्ध हो, जबकि सुरक्षा कारणों से न्यूक्लियर पावर सिस्टम कई किलोमीटर की दूरी पर रखे जाएंगे। मुख्य वास्तुकार नुजोद मेरेंसी ने बताया, 'जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ेगा, यह धीरे-धीरे एक विस्तृत शहर जैसा रूप ले लेगा।'
संचार और नेविगेशन नेटवर्क
एजेंसी चंद्रमा की कक्षा में एक मज़बूत संचार एवं नेविगेशन नेटवर्क भी विकसित कर रही है। इसमें उपग्रहों का एक समूह शामिल होगा जो रोबोटिक और मानव अभियानों को निरंतर सहायता प्रदान करेगा।
आर्टेमिस और मंगल अभियान से जुड़ाव
यह पूरा ढाँचा भविष्य के आर्टेमिस मिशन्स और मंगल ग्रह अभियान की आधारशिला बनेगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर संसाधनों — विशेषकर जल-बर्फ — को लेकर वैज्ञानिक और भू-राजनीतिक रुचि तेजी से बढ़ रही है। मूनफॉल मिशन की सफलता इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।