नासा का मंगल मिशन 'मेवेन' समाप्त, 11 साल बाद अंतरिक्ष यान से टूटा संपर्क
सारांश
मुख्य बातें
नासा ने मंगल ग्रह के वातावरण का अध्ययन करने वाले अपने पहले समर्पित मिशन 'मार्स एटमॉस्फियर एंड वोलाटाइल इवोल्यूशन' (मेवेन) को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया है। एजेंसी ने बुधवार को बताया कि 6 दिसंबर 2025 को अंतरिक्ष यान से संपर्क टूटने के बाद किए गए विस्तृत आकलन के निष्कर्ष पर यह निर्णय लिया गया। यह मिशन अपनी निर्धारित अवधि से 10 गुना अधिक समय तक सक्रिय रहा।
मिशन की यात्रा
'मेवेन' अंतरिक्ष यान को 18 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था और यह 21 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित हुआ। शुरुआत में इसे केवल एक वर्ष के संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन यह 11 वर्षों से अधिक समय तक काम करता रहा और अपनी मूल समय-सीमा से कहीं आगे जाकर वैज्ञानिक डेटा भेजता रहा।
संपर्क कैसे टूटा
रिपोर्टों के अनुसार, यान से अंतिम संपर्क तब हुआ जब वह मंगल के पीछे से गुज़र रहा था, और इसके बाद अचानक सिग्नल बंद हो गया। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि इस दौरान अंतरिक्ष यान में तेज़ घुमाव शुरू हो गया, जिससे इसकी कक्षा और दिशा बिगड़ गई। नतीजतन इसकी बैटरियाँ धीरे-धीरे खत्म हो गईं और पावर खत्म होते ही संचार प्रणाली भी निष्क्रिय हो गई।
जाँच और निष्कर्ष
नासा ने फरवरी में एक जाँच बोर्ड का गठन किया था, ताकि समस्या के कारणों का पता लगाया जा सके और मरम्मत की संभावना का आकलन किया जा सके। बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला है कि 'मेवेन' को अब बहाल नहीं किया जा सकता और यह अपनी वैज्ञानिक एवं डेटा-प्रसारण भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है। एजेंसी के अनुसार, खराबी की वास्तविक वजह पर अंतिम रिपोर्ट इस साल के अंत तक आने की उम्मीद है।
विज्ञान के लिए विरासत
नासा मुख्यालय, वॉशिंगटन में प्लैनेटरी साइंस डिवीजन की निदेशक लुईस प्रॉक्टर ने कहा, “'मेवेन' ने जो विज्ञान हमें दिया है, वह इस बात को समझने में बहुत अहम है कि मंगल पर इंसानों को भेजने से पहले हमें किस तरह की रेडिएशन सुरक्षा और सुरक्षा उपायों की ज़रूरत होगी।” मिशन ने मंगल के ऊपरी वायुमंडल के क्षरण, सौर हवा के प्रभाव और जलवायु इतिहास से जुड़े आँकड़े उपलब्ध कराए, जो भविष्य के मानव अभियानों की योजना के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।
आगे क्या
नासा ने अब मिशन को औपचारिक रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मिशन के दौरान एकत्र किए गए विशाल डेटासेट को वैज्ञानिकों और वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए संरक्षित किया जा रहा है, ताकि आगामी मंगल अभियानों में इसका उपयोग किया जा सके।